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मध्यप्रदेश का बजट वर्ष 2010-2011

कृषि को लाभ का धन्धा बनाने के लिए 21 सौ करोड़ का प्रस्ताव

 

मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री श्री राघवजी ने 25 फरवरी को मध्यप्रदेश विधानसभा में वर्ष 2010-2011 का बजट प्रस्तुत किया। बजट में वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य, चिकित्सा पर व्यय बढ़ाया है। यह इस बात का संकेत है कि सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की इच्छुक है। ऊर्जा पर ज्यादा व्यय का प्रावधान किया गया है। इससे बिजली संकट से निपटने में मदद मिलेगी। कृषि और संबंधित क्षेत्र पर इक्कीस सौ करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव है। यह कृषि के लिए फायदेमंद होगा। सरकार ने अकुशल कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए कौशल उन्नयन कार्यक्रम की घोषणा की है। कर्मचारी इसका लाभ लेकर अपनी कार्यकुशलता सुधार सकते हैं। इन तमाम बातों को समाहित करते हुये वित्त मंत्री द्वारा दिये भाषण के संपादित अंश यहां प्रकाशित किये जा रहे हैं।


इक्कीसवीं सदी के द्वितीय दशक का प्रथम तथा लगातार सातवाँ वार्षिक बजट इस सदन में प्रस्तुत करते हुए मैं बहुत रोमांचित हूँ। विरासत में मिले जर्जर मध्यप्रदेश के कारण भारतीय जनता पार्टी सरकार का प्रथम वार्षिक बजट बहुत चुनौतीपूर्ण था। वैश्विक आर्थिक मंदी, कमरतोड़ महंगाई और छठवें वेतनमान के भारी-भरकम वित्तीय बोझ के कारण यह सातवाँ बजट भी कम चुनौती वाला नहीं है।

2. वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में हमने प्रदेश की जनता से वादा किया था कि हम 'प्रदेश की तकदीर भी बदलेंगे और तस्वीर भी।' प्रदेश की जनता ने हमारी दुबारा सरकार बनवाकर यह प्रमाण-पत्र दिया कि हम वादा सिर्फ करते ही नहीं हैं, अपितु वादा निभाते भी हैं।

3. छत्तीसगढ़ अलग होने के बाद, मध्यप्रदेश के प्रथम वर्ष 2001-02 में प्रदेश की तस्वीर क्या थी और आज वर्ष 2010-11 के वार्षिक बजट प्रस्तुत करते समय क्या है, इसको संक्षेप में, मैं अपने बजट भाषण में बताने का प्रयास कर रहा हूँ।

4. जिस समय हमारी राष्ट्रीय आर्थिक विकास दर तेजी से बढ़ रही थी, तब वर्ष 2001-02 से वर्ष 2002-03 के बीच में प्रदेश की आर्थिक विकास दर ऋणात्मक थी। वर्ष 2008-09 के त्वरित अनुमानों के अनुसार प्रदेश की विकास दर 8.67 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय विकास दर 6.7 प्रतिशत से भी अधिक है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2001-02 में प्रचलित मूल्यों पर रुपये 12,697 थी जो वर्ष 2002-03 में घटकर रुपये 12,303 ही रह गई, जबकि वर्ष 2008-09 में यह रुपये 21,648 हो गई है। प्रदेश की स्वयं की राजस्व प्राप्तियां वर्ष 2001-02 में रुपये 6,270 करोड़ थी, वह वर्ष 2009-10 में रुपये 20,011 करोड़ अनुमानित है। वर्ष 2001-02 में कुल व्यय रुपये 16,438 करोड़ था, वह वर्ष 2009-10 में रुपये 46,444 करोड़ अनुमानित है। पूंजीगत व्यय वर्ष 2001-02 में रुपये 1,470 करोड़ था, वह वर्ष 2009-10 में रुपये 6,793 करोड़ अनुमानित है। आयोजना व्यय वर्ष 2001-02 में रुपये 4,311 करोड़ था वह वर्ष 2009-10 में रुपये 19,028 करोड़ अनुमानित है। वर्ष 2001-02 एवं वर्ष 2002-03 में क्रमशः 172 एवं 175 दिन ओव्हर ड्राफ्ट में बिताना पड़े, जबकि पिछले छः वर्षों में ओव्हर ड्राफ्ट की स्थिति पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। वर्ष 2001-02 में जहां राजस्व घाटा रुपये 3,167 करोड़ था, वह वर्ष 2009-10 के बजट अनुमान के अनुसार बदलकर राजस्व आधिक्य रुपये 1,698 करोड़ हो गया है। हमारी सरकार पिछले छ: वर्षों में विकास एवं लोक कल्याणकारी कार्यों हेतु पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराती रही है।

5. प्रदेश की मजबूत आर्थिक स्थिति से उत्पन्न आत्मविश्वास ने हमें स्वर्णिम मध्यप्रदेश के विचार को मूर्तरूप देने का अवसर प्रदान किया है। इस पृष्ठभूमि में हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री जी द्वारा 'मंथन 2009' का आयोजन कराया गया जिसमें प्रदेश की वर्तमान योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने एवं जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप नई योजनाओं को लागू करने हेतु कई बहुमूल्य सुझाव प्राप्त हुये। मुझे सदन को यह अवगत कराने में हर्ष हो रहा है कि मंथन के प्रमुख सुझावों को क्रियान्वित करने के लिये इस बजट में आवश्यक प्रावधान प्रस्तावित किये गये हैं।

6. मैं सदन को अवगत कराना चाहूँगा कि वर्ष 2010-11 में प्रदेश की विभिन्न आवश्यकताओं हेतु रुपये 51,507 करोड़ का कुल व्यय प्रस्तावित है जो वर्ष 2009-10 के बजट अनुमानों से 10.9 प्रतिशत अधिक है। इस राशि का उपयोग कर किये जाने वाले प्रमुख कार्यों के लिये प्रस्तावित प्रावधानों को अब मैं सदन के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।

सड़क

7. प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि इसमें आवागमन के लिये सड़क सर्वाधिक उपयोग में आने वाला साधन है। इसीलिये हमारे द्वारा सड़क अधोसंरचना को प्राथमिकता देते हुये बजट में लगातार वृद्धि की जा रही है। सड़क निर्माण, उन्नयन एवं संधारण हेतु वर्ष 2001-02 में रुपये 408 करोड़ के व्यय की तुलना में वर्ष 2010-11 में रुपये 2,859 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। वर्ष 2009-10 में सड़क निर्माण एवं उन्नयन हेतु रुपये 2,100 करोड़ का प्रावधान है जिसमें वर्ष 2010-11 में 11.62 प्रतिशत की वृद्धि की जा रही है।

8. लोक निर्माण विभाग द्वारा किये जाने वाले सड़क निर्माण एवं उन्नयन के लिये वित्तीय वर्ष 2010-11 में रुपये 1,925 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जिससे कुल 3,316 किलोमीटर सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन, 25 वृहद् पुलों का निर्माण एवं एक रेल्वे ओव्हर ब्रिज के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

9. प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 34,719 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का निर्माण कर हमारी सरकार ने देश भर में कीर्तिमान स्थापित किया है। इस योजना में वर्ष 2010-11 में रुपये 1,700 करोड़ का व्यय अनुमानित है।

10. वर्तमान में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 500 से कम एवं आदिवासी क्षेत्रों में 250 से कम आबादी के ग्रामों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने हेतु उपयुक्त व्यवस्था नहीं है। मुझे सदन को यह बताते हुये हर्ष हो रहा है कि अगले तीन वर्ष में ऐसे सभी ग्रामों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिये मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना प्रारंभ की जा रही है। इस योजना के तहत वर्तमान में प्रचलित अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण करते हुये राज्य शासन द्वारा प्रावधानित राशि को मिलाकर पुल-पुलियों सहित कुल 19,386 किलोमीटर लंबाई की मुरमीकृत सड़कें बनाई जायेंगी। वर्ष 2010-11 में इस योजना के लिये रुपये 200 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। इस प्रकार आगामी 3 वर्षों में प्रदेश का प्रत्येक गांव बारहमासी सड़कों से जुड़ जायेगा। यह एक चमत्कारिक उपलब्धि होगी।

11. प्रदेश निजी क्षेत्र के सहयोग से सड़कों का विकास करने वाला देश का अग्रणी राज्य है जिसके अंतर्गत अभी तक 1,743 किलोमीटर मार्गों को विकसित किया जा चुका है और 756 किलोमीटर मार्ग निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। भविष्य में निर्माण हेतु 204 किलोमीटर नयी परियोजनायें चयनित की गई हैं। हमारा प्रदेश भारत सरकार से वायबिलिटी गैप फण्ड लेने वाला पहला राज्य है। इसके अंतर्गत प्रदेश द्वारा अभी तक 214 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त की गई है।

सिंचाई

12. प्रदेश के जल संसाधनों के समुचित उपयोग हेतु शासन निरंतर प्रयासरत है। विभिन्न स्त्रोतों से सिंचाई क्षमता में वृद्धि करने के लिये शासन द्वारा समुचित धनराशि की व्यवस्था की जा रही है एवं निर्माणाधीन सिंचाई योजनाओं को पूर्ण करने के प्रयास जारी हैं। वर्ष 2001-02 तक प्रदेश में शासकीय स्रोतों से निर्मित सिंचाई क्षमता 20.84 लाख हैक्टेयर थी जो वर्ष 2009-10 में बढ़कर लगभग 30.73 लाख हैक्टेयर हो जायेगी। वर्ष 2010-11 में कुल रुपये 3,522 करोड़ के प्रस्तावित प्रावधान से 1.84 लाख हैक्टेयर से अधिक सिंचाई क्षमता के निर्माण का लक्ष्य है।

13. जल संसाधन विभाग अन्तर्गत वर्ष 2010-11 के लिये रुपये 2,428 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जो वर्ष 2009-10 की तुलना में 47 प्रतिशत अधिक है। इस प्रावधान के माध्यम से 7 वृहद, 23 मध्यम तथा 1,424 लघु सिंचाई योजनाओं का निर्माण कार्य होगा।

14. नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत नर्मदा घाटी के समग्र विकास की योजनाओं पर निरन्तर कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत अब तक सात वृहद परियोजनायें निर्मित हो चुकी हैं तथा वर्ष 2010-11 में रुपये 1,094 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

ऊर्जा

15. प्रदेश में बिजली की बढ़ती हुई मांग को देखते हुये विद्युत उत्पादन की स्थापित क्षमता बढ़ाने हेतु गम्भीर प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2001-02 में प्रदेश में कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 2,935 मेगावॉट के विरुद्ध वर्ष 2009-10 में 6,081 मेगावॉट हो गई है। प्रदेश में अमरकंटक ताप विद्युत गृह की 210 मेगावॉट इकाई में वाणिज्यिक उत्पादन सितंबर 2009 से प्रारंभ हो चुका है। वर्ष 2010-11 में उत्पादन क्षमता में 400 मेगावॉट की वृद्धि किये जाने का लक्ष्य है। हमारी सरकार द्वारा भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के साथ खंडवा में 1,600 मेगावॉट का सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत गृह स्थापित करने के लिये संयुक्त उपक्रम बनाया गया है। वर्ष 2010-11 के दौरान नई विद्युत उत्पादन परियोजनाओं के निर्माण, विद्यमान उत्पादन केन्द्रों के नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण तथा अन्य कार्यों हेतु रुपये 2,448 करोड़ व्यय होना अनुमानित है। इसमें से रुपये 2,167 करोड़ वित्तीय संस्थाओं से प्राप्त किये जायेेंगे एवं रुपये 281 करोड़ की राशि की पूर्ति आयोजना व्यय से की जायेगी। वर्ष 2010-11 में पारेषण कार्यों हेतु रुपये 945 करोड़ के निवेश की आवश्यकता होगी, जिसमें से रुपये 670 करोड़ की राशि वित्तीय संस्थाओं से ऋण के रूप में प्राप्त किये जायेंगे एवं रुपये 275 करोड़ की राशि राज्य आयोजना से जुटायी जायेगी।

16. नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत मुख्य बांधों से सिंचाई हेतु छोड़े जाने वाले जल का उपयोग कर विद्युत उत्पादन करने के लिये नहर शीर्ष पर प्रस्तावित तीन विद्युत गृहों में से रानी अवंती बाई लोधी सागर (बरगी) बायीं केनाल हेड पर 10 मेगावॉट क्षमता के विद्युत गृह का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। इंदिरा सागर केनाल हेड पर 15 मेगावॉट क्षमता के विद्युत गृह का 85 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण कर प्रथम इकाई को दिसम्बर 2009 में क्रियाशील किया गया है एवं शेष दो इकाई मार्च 2010 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। ओंकारेश्वर केनाल हेड पर 3.75 मेगावॉट क्षमता के विद्युत गृह का निर्माण कार्य प्रगति पर है जिसे वर्ष 2011-12 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।

17. वर्तमान में उप-पारेषण एवं वितरण के क्षेत्र में प्रणाली के सुधार, एनर्जी ऑडिट, शत-प्रतिशत मीटरीकरण एवं विद्युत चोरी रोकने के कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। इन कार्यों हेतु एशियन विकास बैंक, पावर फाईनेन्स कार्पोरेशन, ग्रामीण विद्युतीकरण निगम आदि वित्तीय संस्थाओं से तथा पुनरीक्षित त्वरित ऊर्जा विकास एवं पुनर्संरचना कार्यक्रम अन्तर्गत वित्तीय संसाधन जुटाने के प्रयास किये जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत उपलब्धता में सुधार हेतु फीडर विभक्तीकरण का कार्य किया जा रहा है। वर्ष 2010-11 में उप-पारेषण एवं वितरण कार्यों हेतु कुल रुपये 2,214 करोड़ की आवश्यकता होगी, जिसमें से रुपये 1,478 करोड़ विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से तथा लगभग रुपये 736 करोड़ राज्य आयोजना मद से जुटाये जायेंगे।

नगरीय अधोसंरचना

18. नगरीय अधोसंरचना विकास तथा सेवाओं में सुधार कार्यों हेतु राज्य शासन प्रतिबद्ध है। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के विकास के लिये केन्द्र सरकार द्वारा अभी तक जवाहरलाल नेहरू शहरी पुनर्नवी मिशन अंतर्गत रुपये 3,181 करोड़, एकीकृत शहरी एवं मलिन बस्ती विकास कार्यक्रम अंतर्गत रुपये 280 करोड़ तथा लघु एवं मध्यम नगरीय अधोसंरचना विकास कार्यक्रम हेतु रुपये 762 करोड़ लागत की परियोजनाओं की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इन योजनाओं हेतु वर्ष 2010-11 में कुल रुपये 520 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जो वर्ष 2009-10 के प्रावधानों से 104 प्रतिशत अधिक है।

19. हमारी सरकार द्वारा प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं पवित्र नगरों की नगर विकास योजनाओं को तैयार कराये जाने का निर्णय लिया गया है। इस हेतु वर्ष 2010-11 में रुपये 5 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। प्रदेश के 2 बड़े शहरों भोपाल एवं इंदौर में शहरी यातायात के बढ़ते हुये दबाव को दृष्टिगत रखते हुये मास रेपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की योजना तैयार करने हेतु सर्वे कराया जायेगा।

पेयजल

20. प्रदेश की समस्त ग्रामीण बसाहटों में शुद्ध पेयजल प्रदाय हेतु योजनायें क्रियान्वित की जा रही हैं। प्रदेश में जल प्रदाय योजनाओं के कार्य भारत शासन के राष्ट्रीय ग्रामीण जलप्रदाय कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारित मानदण्डों के अनुसार किये जा रहे हैं। इसके साथ ही शासकीय भवनों में संचालित ग्रामीण शालाओं में भी जलप्रदाय व्यवस्था के कार्य किये जा रहे हैं।

21. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अन्तर्गत वर्ष 2001-02 में जलप्रदाय कार्यक्रम में रुपये 225 करोड़ व्यय किये गये थे। वर्ष 2010-11 में इस हेतु रुपये 1,051 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जो वर्ष 2009-10 की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक है।

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र

22. प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित है। इसके महत्व को समझते हुये, हमारी सरकार कृषि एवं कृषकों के कल्याण हेतु निरंतर प्रयासरत रही है। प्रदेश में वर्ष 2001-02 में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में रुपये 701 करोड़ का व्यय किया गया था। वर्ष 2010-11 में इस हेतु रुपये 2,170 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जो वर्ष 2009-10 के बजट अनुमान से 22 प्रतिशत अधिक है।

23. किसान कल्याण एवं कृषि विभाग अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिये रुपये 183 करोड़, कृषकों को सिंचाई उपकरणों के लिये अनुदान हेतु रुपये 17 करोड़, मैक्रोमैनेजमेंट योजना के लिये रुपये 119 करोड़, राष्ट्रीय तिलहन एवं दलहन विकास कार्यक्रमों के लिये रुपये 75 करोड़, बलराम तालाब योजना के लिये रुपये 25 करोड़, कपास विकास कार्यक्रम के लिये रुपये 13 करोड़, विपणन अधोसंरचना एवं भण्डार गृहों के निर्माण के लिये रुपये 139 करोड़, फसल बीमा योजना के लिये रुपये 61 करोड़, राष्ट्रीय कृषि विस्तार योजना के लिये रुपये 58 करोड़ तथा भूमि संरक्षण के लिये रुपये 42 करोड़ की राशि प्रस्तावित है। वर्तमान युग की आवश्यकता को देखते हुये प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु हमारी सरकार प्रयासरत है। इसके प्रमाणीकरण हेतु भी प्रयास किये जा रहे हैं।

24. उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण के लिये वर्ष 2010-11 में रुपये 167 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जिसमें राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन हेतु राज्यांश रुपये 16 करोड़, पौधशाला विकास के लिये रुपये 43 करोड़, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना हेतु रुपये 11 करोड़ तथा माइक्रो इरीगेशन योजना हेतु रुपये 47 करोड़ के प्रावधान सम्मिलित हैं।

25. पशुधन विकास के लिये वर्ष 2010-11 में रुपये 372 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जिसमें गहन पशु विकास परियोजना के लिये रुपये 78 करोड़, पशु चिकित्सालयों एवं औषधालयों के लिये रुपये 142 करोड़ तथा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अन्तर्गत रुपये 11 करोड़ के प्रावधान शामिल हैं। सीधी एवं बैतूल जिले में लागू मुर्गी पालन विस्तार योजना के परिणामों से उत्साहित होकर इस योजना का विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों में करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में मत्स्य पालन गतिविधियों के लिये रुपये 37 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

26. आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजनान्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के निर्धन पशु पालक परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिये भारतीय उन्नत नस्ल की गाय क्रय हेतु महिला हितग्राहियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी। इस हेतु रुपये 2 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

27. मैंने अपने पिछले बजट भाषण में जबलपुर में पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रारंभ किये जाने के सरकार के निर्णय से अवगत कराया था। मुझे यह बताते हुये प्रसन्नता है कि यह विश्वविद्यालय स्थापित हो चुका है। वर्ष 2010-11 में इस विश्वविद्यालय के भवन निर्माण के लिये रुपये 2 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। इसी प्रकार ग्वालियर में स्थापित किये गये राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के भवन के लिये भी रुपये 5 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

28. हमारे द्वारा प्रदेश के किसानों से कृषि ऋण पर ब्याज दर कम करने के संबंध में किये गये वायदे को हम पूरा करने जा रहे हैंै। आगामी कृषि वर्ष से सहकारी बैंकों द्वारा 3 प्रतिशत की ब्याज दर पर कृषि हेतु अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इस हेतु ब्याज सहायता अनुदान के रूप में वर्ष 2010-11 के लिये रुपये 100 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

29. हमारी सरकार कृषकों को कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिये कृत संकल्पित है। हमने इस वर्ष खरीफ में धान के उपार्जन हेतु रुपये 50 प्रति क्विंटल का बोनस दिया है। गत वर्ष रबी में गेहूँ उपार्जन हेतु रुपये 50 प्रति क्विंटल बोनस दिया गया था। वर्तमान रबी में इसे बढ़ाकर रुपये 100 प्रति क्विंटल किया गया है। खाद्यान्न उपार्जन के लिये बोनस हेतु वर्ष 2010-11 में रुपये 300 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

खाद्यान्न सुरक्षा

30. गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले प्रदेश के नागरिकों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलायी जा रही मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के अंतर्गत वर्ष 2010-11 के बजट में रुपये 290 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। यह गत वर्ष की तुलना में 20.8 प्रतिशत अधिक है।

31. हमारी सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी आधारित फूड कूपन व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

पर्यावरण सुधार

32. वन संपदा हमारे प्रदेश की पहचान है। प्रदेश में वनों के विकास के लिये वर्ष 2001-02 में रुपये 440 करोड़ व्यय किये गये थे जिसकी तुलना में वर्ष 2010-11 में रुपये 1,246 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। यह वर्ष 2009-10 की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2010-11 में लगभग 3 लाख 48 हजार हैक्टेयर वन क्षेत्र में संरक्षण, पुर्नस्थापना एवं पुनरुत्पादन संबंधित वानिकी कार्य कराया जाना प्रस्तावित है।

33. प्रदेश में संचालित विभिन्न योजनाओं का अभिसरण करते हुये अधिक से अधिक वृक्षारोपण कार्य सम्पादित किये जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की जलाऊ लकड़ी एवं पशु चारे की आवश्यकता की पूर्ति हेतु चारागाह विकास और ऊर्जा वन योजनायें संचालित की जा रही हैं। वर्ष 2010-11 में लगभग पांच करोड़ बांस के पौधे लगाये जायेंगे तथा इसे बांस वर्षʈ के रूप में मनाया जायेगा।

शिक्षा

34. मानव संसाधन विकास में शिक्षा की महती भूमिका है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वसुलभ बनाना हमारी सरकार का लक्ष्य रहा है। जहां वर्ष 2001-02 में शिक्षा पर कुल व्यय रुपये 1,865 करोड़ था, वहीं वर्ष 2010-11 में इस हेतु रुपये 6,009 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। यह वर्ष 2009-10 की तुलना में 9.5 प्रतिशत अधिक है।

35. स्कूल शिक्षा के लिये वर्ष 2010-11 में रुपये 5,174 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है, जिसमें सर्वशिक्षा अभियान के राज्यांश के रूप में रुपये 799 करोड़, बालिकाओं को साईकल वितरण के लिये रुपये 94 करोड़, निःशुल्क गणवेश वितरण के लिये रुपये 80 करोड़ तथा निःशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण हेतु रुपये 50 करोड़ के प्रावधान सम्मिलित हैं। महिला साक्षरता दर में 20 प्रतिशत की वृद्धि के उद्देश्य से प्रथम चरण में इस वर्ष से प्रदेश के 14 जिलों में साक्षर भारत योजना क्रियान्वित की जा रही है। इस हेतु वर्ष 2010-11 में राज्यांश के रूप में रुपये 2 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

36. प्रदेश के प्रतिभावान विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में आने वाली आर्थिक कठिनाईयों से निजात दिलाने के लिये हमारी सरकार द्वारा माँ सरस्वती उच्च शिक्षा बैंक ऋण गारंटी योजना प्रारंभ की गई है जिसके अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों द्वारा उच्च शिक्षा हेतु लिये जाने वाले बैंक ऋण पर राज्य सरकार द्वारा गारंटी दी जायेगी।

37. उच्च शिक्षा के लिये बैंक ऋण गारंटी योजना के अलावा वर्ष 2010-11 से एक नई डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी छात्रवृत्ति योजना प्रारंभ की जाना प्रस्तावित है। इसमें माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं परीक्षा में कृषि एवं विज्ञान, वाणिज्य तथा कला संकाय में क्रमशः प्रथम 3 हजार, 1 हजार, तथा 1 हजार तक स्थान पाने वाले ऐसे विद्यार्थियों, जिन्होंने 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये हों और जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय रुपये 3 लाख से कम है, को उच्च शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति उन्हीं दरों पर प्रदान की जायेगी जिन दरों पर अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को प्राप्त हो रही है। यह छात्रवृत्ति उनके द्वारा संबंधित संकाय में स्नातक उपाधि प्राप्त होने तक प्रदान की जायेगी। इसके अतिरिक्त जो विद्यार्थी गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों के हैं, उन्हें शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति भी, राज्य शासन के कॉलेजों में उक्त पाठ््यक्रम हेतु देय शुल्क की सीमा तक, की जायेगी।

38. वर्ष 2009 में भारत सरकार द्वारा राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एण्ड कम्पलसरी एजूकेशन एक्ट अधिनियमित किया गया है। इसके तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों की निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करना शासन का दायित्व है। इस अधिनियम को भारत सरकार द्वारा प्रभावशील किये जाने पर इसके तहत शासन पर अधिरोपित दायित्वों के निर्वहन हेतु आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिये हमारी सरकार प्रतिबद्ध है।

39. उच्च शिक्षा के लिये वर्ष 2010-11 में रुपये 552 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जिसमें गांव की बेटी योजना हेतु रुपये 17 करोड़, प्रतिभा किरण योजना हेतु रुपये 60 लाख एवं शासकीय महाविद्यालयों के भवन निर्माण हेतु रुपये 20 करोड़ के प्रावधान सम्मिलित हैं।

40. प्रदेश के 14 जिलों में नये महाविद्यालयों की स्थापना की जायेगी। ये महाविद्यालय मूंदी (खण्डवा), बैढ़न (सिंगरौली), लालबर्रा (बालाघाट), लटेरी (विदिशा), पोलायकला (शाजापुर), कालूखेड़ा (रतलाम), बुरहानपुर, रामपुर बाघेलान (सतना), विदिशा, विजय राघौगढ़ (कटनी), पिपरियामंडी (मंदसौर), घटिया (उज्जैन), भितरवार (ग्वालियर) एवं मझौली (जबलपुर) में खोले जायेंगे।

41. शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाने में तकनीकी शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2010-11 में तकनीकी शिक्षा हेतु रुपये 263 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जिसमें शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थानों के रूप में विकसित किये जाने हेतु रुपये 23 करोड़ का प्रावधान सम्मिलित है। हमारी सरकार का यह लक्ष्य है कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक पोलीटेकनिक की स्थापना की जाये। इस उद्देश्य से देवास, उमरिया, कटनी, अनूपपुर, रायसेन, आलिराजपुर, मंदसौर, शाजापुर एवं दतिया में पोलीटेकनिक प्रारंभ किये जाने की कार्यवाही वर्ष 2010-11 में की जायेगी।

ग्रामीण विकास

42. राज्य शासन ग्रामीण विकास गतिविधियों को अभिसरण प्रक्रिया के माध्यम से सफल एवं फलदायी बनाने के लिये कृतसंकल्पित है। वर्ष 2001-02 में ग्रामीण विकास हेतु रुपये 165 करोड़ व्यय किये गये थे। वर्ष 2010-11 में इसके लिये रुपये 3,685 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जो वर्ष 2009-10 की तुलना में 49.5 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2010-11 के प्रावधानों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी कार्यक्रम हेतु रुपये 584 करोड़, बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड हेतु रुपये 475 करोड़, इंदिरा आवास योजना हेतु रुपये 87 करोड़, समग्र स्वच्छता अभियान हेतु रुपये 53 करोड़, इंटीग्रेटेड वाटर शेड मैनेजमेंट प्रोग्राम हेतु रुपये 15 करोड़, जिला गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम हेतु रुपये 100 करोड़ तथा मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका परियोजना हेतु रुपये 73 करोड़ के प्रावधान सम्मिलित हैं।

43. बच्चों की स्कूलों में निरन्तर उपस्थिति सुनिश्चित करने में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम का उल्लेखनीय योगदान रहा है। अगले वर्ष से इस योजना को और अधिक प्रभावी एवं आकर्षक बनाने हेतु भोजन बनाने की लागत में प्राथमिक शालाओं के लिये प्रति विद्यार्थी प्रतिदिन 70 प्रतिशत एवं माध्यमिक शालाओं के लिये 100 प्रतिशत की वृद्धि की जायेगी। इसके अलावा रसोईये का मानदेय पृथक से देय होगा।

44. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के जरूरतमंद ग्रामीणों को रुपये 584 करोड़ के राज्यांश सहित रुपये 5,584 करोड़ का व्यय करते हुये 32 करोड़ मानव दिवसों का रोजगार उपलब्ध कराये जाने का लक्ष्य है। योजना को प्रभावी और परिणामदायक बनाने के लिये सभी विकासखण्डों में समेकित विकास ग्राम योजना का क्रियान्वयन किया जायेगा।

45. ग्रामीण भूमिहीन परिवारों के लिये आम आदमी बीमा योजना तथा गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले, गैर-भूमिहीन ग्रामीण एवं शहरी परिवारों के लिये जनश्री बीमा योजना वर्ष 2008-09 में लागू की गई हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत दावों का निपटारा अपेक्षा अनुरूप नहीं रहा है। अतः हितग्राहियों की सुविधा के लिये दावों के त्वरित निपटारे हेतु मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद का सहयोग प्राप्त किया जायेगा, जिससे प्रदेश के नागरिकों को उनके दावों का भुगतान मिलने में कठिनाई न आये।

स्वास्थ्य

46. लोक स्वास्थ्य के विभिन्न संकेतकों की दृष्टि से यद्यपि हमारा प्रदेश अन्य प्रदेशों की तुलना में पीछे रहा है, परंतु अब इसमें तेजी से सुधार हो रहा है। यह सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति गहरी प्रतिबद्धता और इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता प्रदान करने के कारण संभव हो सका है।

47. प्रदेश में वर्ष 2001-02 में स्वास्थ्य के क्षेत्र में रुपये 636 करोड़ व्यय किये गये थे। इसकी तुलना में वर्ष 2009-10 के बजट अनुमान के रुपये 1,650 करोड़ के प्रावधान को 13.8 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2010-11 में रुपये 1,878 करोड़ किया जाना प्रस्तावित है।

48. स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के लिये संस्थागत प्रसव सुविधा महत्वपूर्ण गतिविधि है। इस गतिविधि में उत्तरोत्तर वृद्धि करने के लिये विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं में आवश्यक सुविधायें उपलब्ध कराने हेतु सरकार के द्वारा अथक प्रयास किये गये हैं। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आये हैं। प्रदेश में वर्ष 2001-02 में शिशु मृत्यु दर 86 थी, जो वर्ष 2008-09 में घटकर 70 हो गई है। जननी सुरक्षा योजना के तहत वर्ष 2010-11 के लिये राशि रुपये 202 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

49. स्वास्थ्य संस्थाओं की भौतिक अधोसंरचना की कमी को दूर करने के लिये विशेष प्रयास किये गये हैं। इसके लिये वर्ष 2010-11 के बजट में रुपये 78 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 152 उप स्वास्थ्य केन्द्रों, 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, 32 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा 10 जिला चिकित्सालयों के भवनों का निर्माण किये जाने के प्रावधान सम्मिलित हैं।

50. प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में रोग निदान सेवाओं की आवश्यकता को देखते हुये 10 क्षेत्रीय नैदानिक केन्द्र जिला अस्पताल गुना, मुरैना, सतना, छतरपुर, होशंगाबाद, धार, छिन्दवाड़ा, राजगढ़, खंडवा तथा मण्डला में स्थापित किये गये हैं। प्रत्येक केन्द्र में लगभग रुपये 2 करोड़ मूल्य के अत्याधुनिक नैदानिक तथा उपचार सहयोगी उपकरण उपलब्ध कराये गये हैं। जिला स्तरीय ब्लड बैंक के सुदृढ़ीकरण के लिये 7 स्थानों, पाली (उमरिया), बजाग (डिंडोरी), कोतमा (अनूपपुर), खिरकिया (हरदा), खकनार (बुरहानपुर), चंदेरी (अशोकनगर) एवं विजयपुर (श्योपुर) में एवं 71 सीमांक संस्थाओं में ब्लड बैंक यूनिट स्थापित किये जाने के लिये वर्ष 2010-11 में रुपये 2 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

51. गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार के सदस्यों को इलाज के लिये निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु संचालित दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना में वर्ष 2010-11 के लिये रुपये 29 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। वर्ष 2010-11 से राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना भी प्रदेश में लागू की जा रही है तथा प्रथम चरण से इसे प्रदेश के 10 जिलों में लागू किया जायेगा। इस हेतु रुपये 60 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

महिला एवं बाल विकास

52. महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण एवं विकास हेतु हमारी सरकार निरंतर प्रयासरत रही है। वर्ष 2001-02 में महिला एवं बाल विकास हेतु जहां रुपये 189 करोड़ व्यय किये गये थे, वहीं वर्ष 2010-11 में इस हेतु रुपये 1,720 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। एकीकृत बाल विकास योजना के अंतर्गत राज्य की 453 परियोजनाओं में 78,929 आँगनवाड़ियों एवं 9,820 मिनी आँगनवाड़ियों के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं एवं बच्चों को लाभान्वित किया जा रहा है। इस हेतु वर्ष 2010-11 में रुपये 445 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। मंगल दिवस योजना अंतर्गत वर्ष 2010-11 में रुपये 19 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। लाड़ली लक्ष्मी योजना की सफलता को दृष्टिगत रखते हुये वर्ष 2010-11 में इस हेतु रुपये 302 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित हैै।

53. प्रदेश में बाल संरक्षण के उद्देश्य से नवीन "समेकित बाल संरक्षण योजना" प्रारंभ की जा रही है। वर्ष 2010-11 में इस हेतु रुपये 22 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। मुझे सदन को बताते हुये हर्ष हो रहा है कि प्रदेश में बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन किया गया है।

अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण

54. प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों एवं अनुसूचित जातियों के कल्याण और विकास के लिये अनेक कल्याणकारी योजनायें संचालित की गई हैं। हमारी सरकार ने इन वर्गों के कल्याण के लिये निवेश में निरन्तर वृद्धि की है। अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण के लिये वर्ष 2001-02 में राज्य आयोजना में रुपये 1,305 करोड़ का प्रावधान रखा गया था जिसे बढ़ाकर 2010-11 में रुपये 6,839 करोड़ किया जाना प्रस्तावित है। अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिये वर्ष 2010-11 में रुपये 4,090 करोड़ एवं अनुसूचित जाति उपयोजना के लिये रुपये 2,749 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

55. अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति उपयोजनाओं के अन्तर्गत इन वर्गों के कल्याण हेतु नवीन आश्रम, प्रीमैट्रिक एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रावास खोले जायेंगे तथा सीटों की संख्या में भी वृद्धि की जायेगी। इसके अतिरिक्त 50 माध्यमिक शालाओं का हाईस्कूल, 20 हाईस्कूल का हायर सेकेण्डरी शालाओं में उन्नयन एवं 20 हायर सेकेण्डरी शालाओं में अतिरिक्त संकाय प्रारंभ किये जायेंगे। इसके साथ ही वर्ष 2010-11 में 10 हायर सेकेण्डरी, 20 हाईस्कूल एवं 40 आश्रम शाला भवनों तथा 59 छात्रावास भवनों का निर्माण भी प्रस्तावित है।

56. वर्ष 2010-11 में इन वर्गों के मजरे-टोलों में विद्युतीकरण कार्य हेतु रुपये 37 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके साथ ही कृषकों के कुओं तक विद्युत लाईन के विस्तार के लिये रुपये 23 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण

57. प्रदेश में पिछड़े एवं अल्पसंख्यक वर्गों के आर्थिक उत्थान के भरपूर अवसर उपलब्ध कराने के निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। इन वर्गों के विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्तियां उपलब्ध कराई जाकर शिक्षा हेतु प्रेरित कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इन वर्गों के कल्याण की गतिविधियों हेतु वर्ष 2010-11 के बजट में रुपये 315 करोड़ के प्रावधान प्रस्तावित हैं।

स्थानीय निकाय

58. संविधान के अनुच्छेद 243 के अंतर्गत राज्य की पंचायतों एवं नगरीय निकायों को राज्य करों मे उनके अंश के समनुदेशन के सिद्धांतों के संबंध में अनुशंसा किये जाने के लिये तृतीय राज्य वित्त आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग की अनुशंसाओं पर निर्णय लिया जाकर कृत कार्यवाही प्रतिवेदन सदन में मेरे द्वारा प्रस्तुत किया जा चुका है। तृतीय राज्य वित्त आयोग की अनुशंसाओं एवं उन पर लिये गये निर्णयों के अनुपालन में वित्तीय वर्ष 2010-11 में स्थानीय निकायों हेतु रुपये 3,098 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है, जिसमें ग्रामीण निकायों हेतु रुपये 921 करोड़ एवं शहरी निकायों हेतु रुपये 2,177 करोड़ प्रदत्त किये जाने का प्रस्ताव है। यह अनुदान वित्तीय वर्ष 2009-10 में प्रावधानित राशि से रुपये 498 करोड़ अधिक है।

सामाजिक न्याय

59. कमजोर वर्गों के आर्थिक उत्थान के लिये हमारी सरकार प्रयासरत है। वर्ष 2001-02 में जहां इन वर्गों के लिये रुपये 18 करोड़ व्यय किये गये थे, वहीं वर्ष 2010-11 में रुपये 945 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। वर्ष 2010-11 के प्रावधानों में मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना हेतु रुपये 20 करोड़, मुख्यमंत्री कन्यादान योजनान्तर्गत रुपये 28 करोड़ तथा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम अंतर्गत रुपये 777 करोड़ के प्रावधान सम्मिलित हैं। आम आदमी हमारी सभी योजनाओं का केन्द्र बिन्दु है। अन्त्योदय हमारा लक्ष्य है।

उद्योग एवं खनिज साधन

60. राज्य शासन उद्योगों को प्रदेश में आकर्षित करने हेतु कटिबद्ध है तथा राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों को उद्योग संवर्धन नीति अन्तर्गत अधिकाधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये जहां वर्ष 2001-02 में रुपये 40 करोड़ व्यय हुआ था, वहीं वर्ष 2010-11 में इस हेतु रुपये 233 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। यह वर्ष 2009-10 की तुलना में 47 प्रतिशत अधिक है।

61. हमारे प्रदेश में अन्य खनिजों के साथ-साथ कोल बेड मीथेन गैस भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। शहडोल एवं अनूपपुर जिलों में कोल बेड मीथेन गैस के 36.5 खरब घन फीट गैस भण्डार मिले हैं जिसका उपयोग ईंर्धन के रूप में तथा वाणिज्यिक उपयोग हेतु किया जा सकेगा।

पर्यटन

62. हमारे प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में विकास की अपार संभावनायें हैं। हमारी सरकार ने इन संभावनाओं को यथार्थ में बदलने के लिये अभिनव प्रयास किये हैं। वर्ष 2001-02 में पर्यटन गतिविधियों के लिये रुपये 14 करोड़ व्यय किया गया था जबकि वर्ष 2009-10 में रुपये 58 करोड़ का व्यय अनुमानित है।

63. हमारी सरकार ने पर्यटन के विस्तृत प्रचार-प्रसार के लिये 'हिन्दुस्तान का दिल देखो' का नारा दिया है। पन्ना, बालाघाट एवं उमरिया में हवाई पट्टियों का विकास कर उड्डयन गतिविधियों का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये निजी क्षेत्र के माध्यम से हैलिकाप्टर सेवायें प्रारंभ करना प्रस्तावित है। पर्यटन में बेस्ट मेन्टेंड टूरिस्ट मान्यूमेंट के लिये माण्डू को राष्ट्रीय पर्यटन एवार्ड प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त सर्वश्रेष्ठ वीडियो फिल्म का एवार्ड तथा हास्पीटेलिटी के लिये बेस्ट टूरिज्म स्टेट का एवार्ड प्राप्त हुआ है।

खेलकूद

64. हमारी सरकार के निरन्तर प्रयास के फलस्वरूप प्रदेश खेल शक्ति के रूप में उभर रहा है। जहां वर्ष 2001-02 में खेलकूद गतिविधियों के लिये रुपये 2 करोड़ का व्यय होता था, वहीं वर्ष 2010-11 में इस हेतु रुपये 79 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। यह वर्ष 2009-10 के रुपये 57 करोड़ के प्रावधान से 38 प्रतिशत अधिक है। पायका योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है।

बुन्देलखण्ड पैकेज

65. प्रदेश का बुन्देलखण्ड क्षेत्र बहुधा सूखे से प्रभावित रहा है। इस क्षेत्र के विकास को सदैव हमने अपनी प्राथमिकताओं में रखा है तथा इसी उद्देश्य से बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण का गठन भी किया गया है। मुख्यमंत्री जी द्वारा इस क्षेत्र के विकास हेतु भारत सरकार से रुपये 24,244 करोड़ के विशेष पैकेज देने की मांग की गई थी। भारत सरकार द्वारा देर से ही सही, अब एक विशेष पैकेज की घोषणा की गई है। इस पैकेज के अंतर्गत यद्यपि तीन वर्षों में रुपये 4,310 करोड़ उपलब्ध कराने का उल्लेख है, परन्तु इस पैकेज में तीन वर्षों में मात्र रुपये 1,853 करोड़ की अतिरिक्त राशि ही भारत सरकार से प्राप्त होगी। शेष राशि उन्हीं योजनाओं से उपलब्ध कराई जानी है जो प्रदेश में पहले से चल रही हैं तथा इन योजनाओं के लिये कोई अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने का आश्वासन भारत सरकार से नहीं मिला है। इस राशि के समय पर उपयोग हेतु हमने पृथक से नई मांग संख्या का सृजन किया है।

कानून व्यवस्था

66. प्रदेश के नागरिकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में है। वर्ष 2001-02 में गृह विभाग अंतर्गत रुपये 813 करोड़ का व्यय हुआ था, जो वर्ष 2003-04 में रुपये 885 करोड़ तक ही पहुँच सका। इस हेतु वर्ष 2010-11 में रुपये 1,917 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जो वर्ष 2009-10 के रुपये 1,606 करोड़ की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के पुलिस थानों के सुदृढ़ीकरण के लिये स्टेशनरी एवं फर्नीचर हेतु वर्ष 2010-11 में रुपये 3 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान प्रस्तावित है। प्रदेश की कानून व्यवस्था को और अधिक चौकस एवं चाक-चौबंद करने के लिये पुलिस बल में 1,500 एवं विशेष शाखा में 331 नवीन पद निर्मित किये गये हैं।

प्रशासनिक सुधार

67. राज्य के शासकीय सेवकों के कौशल उन्नयन हेतु उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में भेजने की योजना प्रारंभ की जा रही है। इस योजना के तहत राज्य के लिये उपयोगी प्रशिक्षणों का चयन कर भारत सरकार की योजनाओं से समन्वय स्थापित कर अन्तर की राशि का व्यय भार राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा तथा राज्य के शासकीय सेवकों को इन कार्यक्रमों में भेजा जायेगा।

68. युवाओं को शासकीय सेवाओं में रोजगार के समस्त अवसरों की जानकारी एक ही स्रोत से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वेबसाइट तैयार की जायेगी।

69. मेरे द्वारा पिछले बजट भाषण में शासकीय भुगतान की व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सिस्टम के माध्यम से प्रारम्भ करने की योजना का उल्लेख किया गया था। मुझे सदन को यह अवगत कराने में हर्ष हो रहा है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली भोपाल जिले में प्रारंभ की जा चुकी है। प्रारंभिक दौर में यह व्यवस्था कर्मचारियों के स्वत्वों के भुगतान के लिये प्रारंभ की गयी है। अप्रैल 2010 से सभी जिलों में कर्मचारियों के वेतन, भत्ते आदि का भुगतान इसी प्रणाली से करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रणाली को शीघ्र ही अन्य शासकीय भुगतानों के लिये भी लागू किया जायेगा।

70. प्रदेश में परिवहन विभाग के अंतर्गत करों का अधिकांश भुगतान ई-पेमेन्ट पद्धति से किया जा रहा है। इस व्यवस्था को वाणिज्यिक कर विभाग अंतर्गत भी प्रभावी तौर पर लागू किया जायेगा। इसके साथ ही वाणिज्यिक कर विभाग अंतर्गत रिर्टन्स की ई-फाईलिंग की व्यवस्था भी लागू की जायेगी।

71. राजस्व संग्रहण विभागों में कर संग्रह की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये भवन, वाहन आदि सभी संबंधित सुविधायें मुहैया कराई जा रही हैं। खनिज विभाग अन्तर्गत 20 जिलों में कार्यालय भवनों के निर्माण की योजना प्रस्तावित है।

72. प्रदेश के व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य में भामाशाह योजना लागू की गई है। इसके अच्छे परिणामों को देखते हुये इसे आगे भी जारी रखा जायेगा।

73. वित्तीय वर्ष 2010-11 में पी. पी.पी. मॉडल के आधार पर कम्प्यूटरीकृत समेकित जांच चौकियों का निर्माण कार्य किया जाना प्रस्तावित है। इस हेतु भू-अर्जन के लिये वर्ष 2010-11 में रुपये 55 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

कर्मचारी कल्याण

74. हम सिर्फ घोषणा नहीं करते बल्कि घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने के लिये जाने जाते हैं। हमने प्रदेश के कर्मचारियों से यह वायदा किया था कि छठवें वेतनमान का लाभ दिनांक 1 जनवरी 2006 से देंगे। उसी के अनुक्रम में हमने वेतनमान पुनरीक्षित कर दिये हैं तथा 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक की अवधि के एरियर्स की पहली किस्त के भुगतान के लिये वर्ष 2010-2011 के बजट में रुपये 1,017 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। मैं सदन को अवगत कराना चाहूँगा कि विगत तीन वर्षों में हमारी सरकार ने शासकीय सेवकों के वेतन एवं पेंशन में अकल्पनीय वृद्धि की है। वर्ष 2007-08 की तुलना में वर्ष 2010-11 में वेतन पर व्यय होने वाली राशि में 79 प्रतिशत एवं पेंशन पर व्यय होने वाली राशि में 68 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है।

75. हमारी सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों को नवम्बर 2009 एवं जनवरी 2010 से क्रमश: 3, 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते की किस्त देना प्रारंभ कर दिया है। वर्तमान में हमारे द्वारा दिये जा रहे महंगाई भत्ते की दर, केन्द्र सरकार से मात्र 5 प्रतिशत कम है। इस अन्तर को पाटने हेतु अप्रैल 2010 एवं जुलाई 2010 से महंगाई भत्ते की क्रमशः 3 एवं 2 प्रतिशत की किस्त दी जायेगी। इसी के अनुरूप पेंशनरों के महंगाई राहत में भी वृद्धि की जायेगी।

पुनरीक्षित अनुमान 2009-10

76. वर्ष 2009-10 के पुनरीक्षित अनुमानों के अनुसार राज्य की राजस्व प्राप्तियां रुपये 43,284 करोड़ तथा राजस्व व्यय रुपये 37,976 करोड़ है। आयोजनेत्तर व्यय का पुनरीक्षित अनुमान रुपये 29,682 करोड़ तथा आयोजना व्यय का पुनरीक्षित अनुमान रुपये 20,259 करोड़ है। राजस्व आधिक्य का पुनरीक्षित अनुमान रुपये 5,307 करोड़ है। राजकोषीय घाटे का पुनरीक्षित अनुमान रुपये 6,593 करोड़ है जो कि सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 3.65 प्रतिशत होने से भारत सरकार द्वारा वर्ष 2009-10 के लिये निर्धारित 4 प्रतिशत की सीमा से कम है।

बजट अनुमान 2010-11
राजस्व प्राप्तियां

77. वर्ष 2010-11 में कुल राजस्व प्राप्तियों का बजट अनुमान रुपये 43,443 करोड़ है। राजस्व प्राप्तियों में राज्य करों से प्राप्तियां रुपये 18,670 करोड़, करेत्तर राजस्व प्राप्तियां रुपये 4,322 करोड़, केन्द्रीय करों में प्रदेश के हिस्से के अंतर्गत प्राप्तियां रुपये 11,047 करोड़ तथा केन्द्र सरकार से सहायक अनुदान अंतर्गत प्राप्तियां रुपये 9,403 करोड़ अनुमानित है।

78. केन्द्र से राज्यों को उनकी संचित निधि के माध्यम से उपलब्ध होने वाली सहायता के अतिरिक्त विभिन्न संस्थाओं को सीधे लगभग रुपये 10,405 करोड़ की सहायता राशि उपलब्ध होना अनुमानित है। यह धनराशि लोक वित्त का अंश है परंतु राज्य के शासकीय लेखे का भाग नहीं है।

आयोजना एवं आयोजनेत्तर व्यय

79. वर्ष 2010-11 के लिये आयोजना व्यय का बजट अनुमान रुपये 21,939 करोड़ है जिसमें राज्य आयोजना अंतर्गत रुपये 18,014 करोड़ का प्रावधान शामिल है। अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिये रुपये 4,090 करोड़ तथा अनुसूचित जाति उपयोजना के लिये रुपये 2,749 करोड़ के प्रावधान प्रस्तावित हैं। प्रस्तावित आयोजना व्यय कुल व्यय का 42.6 प्रतिशत है। आयोजना अंतर्गत पूंजीगत परिव्यय रुपये 7,993 करोड़ प्रस्तावित है। आयोजनेत्तर व्यय का अनुमान रुपये 29,568 करोड़ है।

80. मैं सदन को अवगत कराना चाहूँगा कि वर्ष 2001-02 में जहां वेतन एवं पेंशन पर कुल रुपये 5,939 करोड़ का व्यय होता था, वहीं वर्ष 2010-11 में इन मदों में रुपये 15,821 करोड़ का व्यय अनुमानित है। वर्ष 2010-11 में वेतन एवं पेंशन पर अनुमानित व्यय, राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का क्रमशः 28.8 एवं 7.6 प्रतिशत है जो वर्ष 2007-08 में क्रमशः 22.8 एवं 6.4 प्रतिशत था। इस प्रकार वेतन एवं पेंशन पर व्यय में तीव्रता से वृद्धि हुई है।

81. कुशल ऋण प्रबंधन के परिणाम-स्वरूप कुल राजस्व प्राप्तियों की तुलना में राज्य के ब्याज भुगतान के दायित्वों में निरन्तर कमी आई है। वर्ष 2001-02 में जहां कुल ब्याज भुगतान, राजस्व प्राप्तियों का 20.1 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2010-11 में यह 11.6 प्रतिशत रहना अनुमानित है।

शुद्ध लेन-देन

82. वर्ष 2010-11 की कुल प्राप्तियां रुपये 51,570 करोड़ तथा कुल व्यय रुपये 51,507 करोड़ अनुमानित होने से वर्ष का शुद्ध लेन-देन रुपये धनात्मक 63 करोड़ एवं अंतिम शेष रुपये ऋणात्मक 128 करोड़ रहेगा।

राजकोषीय स्थिति

83. कुल राजस्व व्यय रुपये 41,863 करोड़ एवं कुल राजस्व प्राप्तियां रुपये 43,443 करोड़ होने से राजस्व आधिक्य रुपये 1,580 करोड़ अनुमानित है। इस प्रकार आगामी वर्ष में राजस्व आधिक्य की स्थिति निरंतर रहने का अनुमान है। वर्ष 2010-11 के लिये राजकोषीय घाटे का अनुमान रुपये 8,003 करोड़ है। यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 4 प्रतिशत है जो भारत सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर है।

भाग- 2

1. वर्ष 2009-10 की देश एवं प्रदेश की ज्वलंत आथिर्क समस्या है- बढ़ती हुई महंगाई जिसने जन मानस को झकझोर दिया है विशेषकर आम आदमी को - क्योंकि आम आदमी के उपयोग की वस्तुओं में महंगाई अपेक्षाकृत अधिक बढ़ी है।

2. महंगाई का विषय मुख्यत: केन्द्र सरकार का है। राज्य सरकार की भूमिका अत्यंत सीमित है। इसके बावजूद हमारी सरकार की दूर दृष्टि एवं संवेदनशीलता के कारण हमने प्रारंभ से जीवन उपयोगी वस्तुओं जैसे खाद्यान्न, दलहन, आटा, दाल, नमक, गुड़, शक्कर कपड़ा आदि को वेट कर से मुक्त रखा है, जबकि अनेक राज्यों में ये वस्तुएं कर योग्य हैं। डीजल पर कर की दरें भी कम की हैं परन्तु केन्द्र सरकार की दोषपूर्ण नीतियों के कारण महंगाई नियंत्रण में नहीं है।

3. महंगाई से उत्पन्न आम आदमी की कठिनाईयों को ध्यान में रखते हुये यह निर्णय किया है कि आगामी वर्ष 2010-11 में भी खाद्यान्न, दलहन, आटा, दाल, नमक, गुड़, शक्कर कपड़ा आदि वस्तुओं को वेट कर से मुक्त रखा जाये।

केन्द्रीय विक्रय कर

4. क़ेन्द्रीय विक्रय कर की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने से राज्यों को होने वाली राजस्व हानि की क्षतिपूतिर् का वादा केन्द्र सरकार द्वारा किया गया था। परन्तु यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एकपक्षीय निर्णय लेते हुये उसके द्वारा क्षतिपूतिर् के मापदण्डों को संशोधित कर दिया गया है तथा वर्ष 2010-11 के लिये क्षतिपूतिर् देने से ही मना कर दिया गया है। इतना ही नहीं, राजस्व में इस कमी की क्षतिपूतिर् हेतु शक्कर तथा कपड़े जैसी वस्तुओं पर वेट लगाने के लिये राज्यों को कहा गया है।

वस्तु तथा सेवा कर (जी.एस.टी.)

5. जी.एस.टी. के प्रस्तावित ढांचे के संबंध में राज्य सरकार की चिंताओं एवं आशंकाओं से मैंने अपने पिछले बजट भाषण में इस सदन को अवगत कराया था। अब अधिकांश राज्य भी इन आशंकाओं से चिन्तित हैं।

6. केन्द्र सरकार को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों ही तरह के कराधान के साधन उपलब्ध हैं जबकि राज्यों के प्रत्यक्ष कर के साधन अत्यंत सीमित हैं। विक्रय कर राज्य के स्वयं के कर-राजस्व का सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधन है जिसे जी.एस.टी. में शामिल कर तथा उसकी दरों पर अपना नियंत्रण रख केन्द्र सरकार राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता समाप्त करना चाहती है। केन्द्र सरकार यह भी चाहती है कि राज्यों के कराधान के सभी साधन जी.एस.टी. में शामिल कर लिये जायें।

7. प्रस्तावित संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत केन्द्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में एक परिषद का गठन होगा जिसमें 10 राज्यों के वित्त मंत्री नामांकित सदस्य होंगे। इस परिषद को यह निश्चित करने का अधिकार होगा कि राज्यों के कौन से कराधान के साधन जी.एस.टी. में शामिल किए जाएं, कौन सी वस्तुएं तथा सेवाएं कर मुक्त हों तथा कर की दरों का ढांचा क्या हो। इस तरह की संवैधानिक व्यवस्था संसदीय लोकतंत्र तथा संघीय ढांचे की परिकल्पना के विपरीत है।

8. राज्यों का यह दृष्टिकोण है कि जी.एस.टी. में भी वेट की तरह कर की दरें होनी चाहिए। दैनिक आवश्यकताओं के लिये निम्न दरें तथा अन्य वस्तुओं के लिये सामान्य दर, परन्तु केन्द्र सरकार चाहती है कि सभी वस्तुओं पर कर की दरें एक बराबर ही हों।

9. जी.एस.टी. के लिए विचाराधीन दरों पर राज्यों को राजस्व की भारी हानि होगी। हमें आशंका है कि इस हानि की प्रतिपूतिर् करने में केन्द्र सरकार सक्षम नहीं है। केन्द्रीय विक्रय कर क्षतिपूतिर् के मामले में उसका व्यवहार हमारी आशंका को और बढ़ाता है। इतना ही नहीं यह हानि स्थाई स्वरूप की भी होगी।

कराधान

10. आम जनता तथा उद्योगों पर कर का अतिरिक्त बोझ डाले बिना ही राज्य के समग्र विकास के लिये अधिकाधिक राजस्व संग्रहण करने में हम सफल रहे हैं। हमारी यह नीति है कि प्रदेश में निवेश आकषिर्त करने के लिये हमारी कर की दरें प्रतिस्पधीर् तथा स्थिर हों। हम इस प्रयास में सफल रहे हैं। प्रदेश में निवेश बढ़ा है तथा विकास कार्यों के लिये वित्तीय संसाधन बढ़े हैं।

प्रवेश कर

11. प्रवेश कर ढाँचे का युक्तिकरण प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत अधिनियम की अनुसूची एक में जिन वस्तुओं का उल्लेख है केवल वे ही प्रवेश कर मुक्त रहेंगी और शेष सभी वस्तुओं पर प्रवेश कर देय होगा। अनाज तथा दलहन पर प्रवेश कर से छूट निरन्तर रखना प्रस्तावित है।

12. सूत पर प्रवेश कर समाप्त करना तथा प्रदेश में सूत बनाने वाली औद्योगिक इकाईयों द्वारा उपयोग किये जाने वाले कपास पर प्रवेश कर में छूट को निरन्तर रखना भी प्रस्तावित है।

13. ऑटोमोबाईल उद्योग को प्रतिस्पधीर् बनाने के लिए इन इकाईयों द्वारा उपयोग में लाये जाने वाले लोहा एवं इस्पात पर प्रवेश कर की दर 2 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत करना तथा कलपुर्जों को कर मुक्त करना प्रस्तावित है।

14. प्रदेश के औद्योगीकरण के लिये हमें ऐसे उद्योगों को कर की अनुकूल दरें देनी होंगी जो राज्य के बाहर से कच्चा माल लाकर विशिष्ट उत्पाद बना रहे हैं और राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। ऐसे कुछ उद्योगों में लगने वाली निम्न वस्तुओं को प्रवेश कर से मुक्त करना प्रस्तावित है :-

(क) विदेश से आयातित तथा मैन्यूफैक्चरिंग में उपयोग की गई लकड़ी

(ख) सिक्कों के निर्माण में उपयोग की गई धातु

(ग) मैन्यूफैक्चरिंग में लगने वाले चमड़े।

15. उच्च आय वर्ग के उपयोग में आने वाली अनेक वस्तुएं अभी प्रवेश कर से मुक्त हैं अथवा उन पर 1 प्रतिशत की दर से कर देय है। इन वस्तुओं पर प्रवेश कर की दर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। प्रमुख वस्तुएं जो वर्तमान में कर मुक्त हैं तथा उन पर 2 प्रतिशत की दर से प्रवेश कर लगाना प्रस्तावित है, इस प्रकार हैं :-

(1) फर, तथा स्किन से निमिर्त वस्तुएँ,
(2) चमड़े की वस्तुएँ,
(3) वेक्यूम फ्लास्क, थर्मस, आईस-बाक्स,
(4) सिम कार्ड,
(5) कार्पेट, कालीन, गलीचा,
(6) फूड सप्लीमेन्ट, एपीटाइज़र, डायटिकल फूड,
(7) तैयार खाद्य पदार्थ जो मध्यप्रदेश वेट अधिनियम की अनुसूची 1 तथा 2 में उल्लेखित नहीं हैं,
(8) एयरक्राफ्ट तथा उसके पुर्जे।

16. वस्तुएं जिन पर प्रवेश कर की दर 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत करना प्रस्तावित है मुख्य रूप से इस प्रकार हैं :-

(1) घरेलू एवं वाणिज्यिक उपयोग के विद्युत तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण,
(2) सिनेमेटोग्रॉफिक उपकरण,
(3) श्रृंगार एवं प्रसाधन सामग्री,
(4) इलेक्ट्रॉनिक खिलौने तथा मनोरंजन के उपकरण,
(5) रंगीन टेलीविज़न सेट्स,
(6) क्रॉकरी, कटलरी, नॉनस्टिक वेयर, हीट रेजिस्टेन्ट कुकवेयर,
(7) कन्फेक्शनरी, टॉफी, चॉकलेट तथा आईस जेली,
(8) फोटोकापिंग मशीन, कार्यालयीन उपकरण,
(9) मार्बल तथा ग्रेनाइट्स के ब्लाक्स एवं सभी प्रकार के टाईल्स,

 

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