|
केन्द्र
सरकार
भी
करेगी
समीक्षा,
एक
अक्टूबर
से
शुरू
होगा
काम
बोगस
और
अपात्र
लोगों
के
कब्जे
में
पड़े
राशन
कार्डों
को
खंगालने
के
लिए
केन्द्र
और
राज्य
दोनों
ही
सरकारें
फिक्रमंद
हैं।
प्रस्तावित
राष्ट्रीय
खाद्य
सुरक्षा
अधिनियम
में
भी
यह
कार्रवाई
प्राथमिकता
से
शुमार
की
गई
है।
केन्द्र
ने
इस
सिलसिले
में
एक
अक्टूबर
से
31
दिसंबर,
2009
तक
तीन
महीनों
की
खास
मुहिम
छेड़ने
को
कहा
है।
राज्य
सरकार
ने
इसकी
तैयारियां
अंजाम
देने
के
लिए
सभी
संभाग
आयुक्तों
को
इत्तेला
कर
दी
है।
प्रमुख
सचिव
खाद्य
आपूतिर्
श्री
अशोक
दास
जहां
राज्य
स्तर
पर
खुद
इस
कार्रवाई
की
समीक्षा
करेंगे
वहीं
केन्द्र
सरकार
ने
जनवरी,
2010
तक
इसकी
रिपोर्ट
बुलाई
है।
यह
साफ
कर
दिया
गया
है
कि
बोगस
राशन
कार्ड
जारी
करने
वाले
अफसर
और
इन
कार्डों
को
रखने
वाले
लोग
दोनों
ही
अब
दण्डात्मक
कार्रवाई
के
दायरे
में
आ
जायेंगे।
बोगस
कार्डों
का
मामला
गंभीर
इसलिए
है
कि
प्रदेश
में
इनका
अनुमानित
प्रतिशत
54.6
बताया
गया
है।
केन्द्र
और
राज्य
दोनों
यह
मानते
हैं
कि
बोगस
और
अपात्र
लोगों
के
राशन
कार्ड
खत्म
होने
पर
ही
वास्तविक
जरूरतमंदों
तक
पर्याप्त
खाद्य
सामग्री
पहुँच
सकेगी।
इस
मकसद
से
हर
जिले
में
एएवाय
और
बीपीएल
परिवारों
को
जारी
किए
गए
राशन
कार्डों
की
पात्रता
और
वास्तविकता
की
जांच
होगी।
उधर
केन्द्रीय
ग्रामीण
विकास
मंत्रालय
भी
नए
सिरे
से
गरीबी
रेखा
को
परिभाषित
करने
जा
रहा
है।
इसलिए
कमिश्नरों
को
भेजे
गए
निर्देश
में
बताया
गया
है
कि
ग्राम
पंचायतें
नए
मापदण्डों
के
तहत
बीपीएल
परिवारों
की
जानकारी
इकट्ठा
करेंगी
और
इनकी
सूची
पंचायत
कार्यालयों
में
चस्पा
की
जाएगी।
इसके
बाद
आपत्तियों
का
निराकरण
भी
होगा।
इसी
पद्धति
को
सभी
जिलों
में
बोगस
राशन
कार्डों
के
चिन्हांकन
में
अपनाने
को
कहा
गया
है।
इससे
सार्वजनिक
वितरण
प्रणाली
के
तहत
लक्षित
वर्ग
के
लिए
सही
तरीके
से
राशन
कार्ड
बनाना
भी
संभव
हो
सकेगा।
जल्द
ही
पेश
होने
वाले
खाद्य
सुरक्षा
अधिनियम
के
साथ
ही
सामाजिक
सुरक्षा
योजना
पर
अमल
के
लिए
भी
सभी
राज्यों
को
सार्वजनिक
वितरण
प्रणाली
के
तहत
परिवारों
का
सही
तरीके
से
चिन्हांकन
करना
जरूरी
बताया
गया
है।
जांच
के
दौरान
बोगस
राशन
कार्डों
और
उनमें
उल्लेखित
फर्जी
सदस्यों
की
संख्या
समाप्त
की
जाएगी।
|