|
एकीकृत
अनाज
विकास
कार्यक्रम
(मोटा
अनाज)
उद्देश्य
व
कार्यक्षेत्र-
प्रदेश
में
गेहूं,
ज्वार,
चावल
और
अन्य
मोटे
अनाजों
के
उत्पादन
और
उत्पादकता
में
वृद्धि
करना।
योजना
संपूर्ण
मध्यप्रदेश
में
लागू
है।
पात्र
हितग्राही-
अनुसूचित
जाति,
जनजाति
के
लघु
और
सीमांत
श्रेणी
तथा
सामान्य
वर्ग
के
कृषक।
हितग्राही
चयन
प्रक्रिया-
कृषकों
का
चयन
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी,
कृषि
विस्तार
अधिकारी
और
वरिष्ठ
कृषि
विकास
अधिकारी
द्वारा
किया
जाता
है।
फील्ड
प्रदर्शन
(प्रौद्योगिकी
प्रदर्शन)
के
लिये
अधिकतम
रु. 1000
प्रति
प्रदर्शन
प्रति
एकड़
(0.405
हैक्टर)
धान
की
मेडागास्कर
पद्धति
प्रदर्शन
के
लिए
रु. 1000
प्रति
एकड़
अनुदान
तथा
कृषकों
को
धान
की
मेडागास्कर
पद्धति
के
प्रशिक्षण
के
लिए
रु, 10000
प्रति
प्रशिक्षण।
आधार
बीज
उत्पादन
पर रु.
200
प्रति
क्विटंल
के
मान
से
सहायता।
आधार
बीज
से
प्रमाणित
बीज
उत्पादन
पर रु.
200
प्रति
क्विंटल
के
मान
से
सहायता।
आधार
बीज
वितरण-
10
वर्ष
के
अंदर
अधिसूचित
उन्नत
किस्मों
के
गेहूं,
जौ,
धान,
ज्वार,
बाजरा,
कोदों,
कुटकी,
रागी
बीज
पर रु.
200
प्रति
क्विंटल
अनुदान।
सम्पर्क
- स्थानीय
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी।
तिलहन
दलहन
एवं
मक्का
की
एकीकृत
योजना
(आईसोपाम)
उद्देश्य-
प्रदेश
में
दलहन,
तिलहन
और
मक्का
के
उत्पादन
और
उत्पादकता
को
बढ़ावा
देना।
योजना
संपर्ण
मध्यप्रदेश
में
लागू
है।
अनुसूचित
जाति,
अनुसूचित
जनजाति
लघु
और
सीमान्त
श्रेणी
तथा
सामान्य
श्रेणी
के
कृषक
हितग्राही
का
चयन
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी,
कृषि
विकास
अधिकारी
और
वरिष्ठ
कृषि
विकास
अधिकारी
द्वारा
किया
जाता
है।
योजना-
(1) बीज
मिनीकिट-
0.1 से 0.2
हेक्टर
क्षेत्र
के
लिए
वास्तविक
मूल्य
के 100
प्रतिशत
अनुदान
पर
कृषकों
को
बीज
मिनीकिट
का
वितरण।
(2)
प्रमाणित/आधार
बीज
उत्पादन-
रु. 300
प्रति
क्विंटल
अनुदान।
(3)
प्रमाणित
बीज
वितरण-
कुल
कीमत
का 30
प्रतिशत
या
रु. 300
प्रति
क्विंटल
जो
भी
कम
हो
अनुदान।
(4)
ब्लाक
प्रदर्शन
के
लिये
इनपुट
की
कीमत
का 50।़
या दलहनी
फसलों
पर रु.
2000 से 2500
तक व तिलहनी
फसलों
पर रु.
1500 से
रु. 4000
तक
और मक्का
पर अधिकतम
रुपये
4000/- का
अनुदान
देय
है।
(5)
आई.पी.एम.
प्रदर्शन
सरसों-
ट्राईकोडर्मा,
नीम
1500,
क्राई
सोपर्ला
नीम 1500
अधिकतम
रु. 930
प्रति
हेक्टर।
सरसों
मूंगफली,
सोयाबीन,
चना,
अदरक,
सूरजमुखी,
मक्का
आदि
के
ट्राईकोडर्मा,
क्राइसोपार्ला,
एन
पी.व्ही-एस.एल.
ट्रेपअल्योर,
नीम
1500, एन.पी.व्ही.
एस.एल.
ल्योर,
बी.टी.
पर
रु. 428
से
अधिकतम
रु. 1627.50
प्रति
हेक्टर
अनुदान
देय
होगा।
(6)
पौध
संरक्षण
औषधि
की
कीमत
का 50
प्रतिशत
या
रु. 500
जो
भी
कम
हो,
अनुदान
देय
है।
(7)
हस्त
चलित
पौध
संरक्षण
यंत्र
के
लिये
कीमत
का 50
प्रतिशत
या
रु. 800
प्रति
यंत्र
जो
भी
कम
हो,
और शक्ति
चलित
यंत्र
के
लिये
- कीमत
का 50।़
या
रु. 2000
प्रति
यंत्र
जो
भी
कम
हो,
अनुदान
देय
है।
(8)
कृषि
यंत्र-
(1)
बैल
चलित
बीज/उर्वरक
बुवाई
यंत्र,
(2)
ग्रेन
क्लीनर
(दाना
शोधक),
(3)
साइकल
व्हील
हेंड
हो, (4)
बीज/उर्वरक
नींदानाशक
(दाना)
पर
कीमत
का 50
प्रतिशत
या
क्रमश:
(1) रु. 2200,
(2) रु. 6221,
(3) रु. 235,
(4) रु. 750
जो
भी
कम
हो
का
अनुदान
देय
है।
(9)
नींदानाशक
दवा
के
लिये-
कीमत
का 50।़
या
रु. 500
प्रति
हैक्टर
जो
भी
कम
हो,
अनुदान
देय
है।
(10)
राइजोबियम
कल्चर
के
लिये-
कीमत
का 50।़
या
रु. 50
प्रति
हैक्टयर
जो
भी
कम
हो,
अनुदान
देय
है।
(11)
पी.एस.बी.
न्यूक्लियर
पॉलीहिड्रोसिस
वायरस
(एन.पी.व्ही.)-
कीमत
का 50।़
या
रु. 250
प्रति
हैक्टर,
अनुदान
देय
है।
(12)
जिप्सम/पायराइट/डोलोमट-
कीमत
का 50।़
(सामग्री
तथा
परिवहन
सहित)
या
रु. 500
प्रति
हैक्टर
जो
भी
कम
हो,
अनुदान
देय
है।
(13)
कृषक
प्रशिक्षण-
50
कृषकों
के
समूह
को
दो
दिवसीय
प्रशिक्षण
हेतु
रु. 15000
प्रति
प्रशिक्षण।
(14)
सिंचाई
स्रोत
से
खेत
तक
पानी
की
सुविधा
के
लिए
पाइप
लाइन
लाने
हेतु-
अनुसूचित
जाति/जनजाति/लघु
सीमांत
महिला
कृषक
को
कीमत
का 50
प्रतिशत
या
रु. 7200
एवं
सामान्य
श्रेणी
के
कृषक
को
कीमत
का 33
प्रतिशत
या
रु. 4800,
अनुदान
देय
है।
(15)
स्प्रिंकलर
सेट
के
लिये-
अनुसूचित
जाति/जनजाति/लधु
सीमांत
महिला
कृषक
को
कीमत
का 50
प्रतिशत
या
रु. 5500
जो
भी
कम
हो
तथा
अन्य
कृषकों
को
कीमत
का 33
प्रतिशत
या
रु. 3630
जो
भी
कम
हो,
अनुदान
देय
होगा।
(16)
माइक्रोन्यूट्रीयेन्ट
की
कीमत
का 50।़
या 500
रु.
प्रति
हेक्टर
जो
भी
कम
हो
अनुदान
देय
होगा।
(17)
रिज़/फेरो
कल्टीवेशन
के
लिये
-
इकाई
लागत
क 50।़
या 1000/-
रु.
प्रति
हेक्टर
जो
भी
कम
हो
अनुदान
देय
होगा।
सम्पर्क-
स्थानीय
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी।
सघन
कपास
विकास
कार्यक्रम
उद्देश्य-
प्रदेश
में
कपास
के
उत्पादन
और
उत्पादकता
को
बढ़ावा
देना।
प्रदेश
के
कपास
उत्पादक
14
जिलों-
धार,
खण्डवा,
बुरहानपुर,
खरगोन,
झाबुआ,
शाजापुर,
रतलाम,
मंदसौर,
बैतूल,
सीहोर,
छिंदवाड़ा,
बड़वानी,
हरदा
और
देवास
में
यह
योजना
लागू
है।
पात्र
हितग्राही-
अनुसूचित
जाति/जनजाति,
लघु
और
सीमांत
श्रेणी
तथा
सामान्य
वर्ग
के
कृषक।
हितग्राही
चयन
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी
द्वारा
किया
जाता
है।
योजना
के
अंतर्गत
उन्नत
बीज,
स्प्रिंकलर
सैट
ड्रिप
(टपक)
सिंचाई,
फोरमेन
ट्रेप,
पौध
संरक्षण
यंत्र
तथा
बीजोपचार
व
बायो
एजेन्ट्स
के
लिये
निर्धारित
कीमत
के 50
प्रतिशत
तक
अथवा
खेत
के
क्षेत्रफल
के
अनुपात
में
सहायता
प्रदान
की
जाती
है।
कार्यक्रम
के
अंतर्गत
कृषक
खेत
पाठशाला
और
कीट
व्याधि
सर्वेक्षण
आदि
की
व्यवस्था
भी
है।
सम्पर्क-
स्थानीय
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी।
गन्ना
विकास
योजना
उद्देश्य-
प्रदेश
में
गन्ने
के
उत्पादन
और
उत्पादकता
में
वृद्धि
करना।
योजना
प्रदेश
के 27
जिले-
भोपाल,
बैतूल,
राजगढ़,
होशंगाबाद,
श्योपुर,
कला,
शिवपुरी,
दतिया,
खरगौन,
बड़वानी,
रतलाम,
गुना,
सीहोर,
हरदा,
मुरैना,
ग्वालियर,
खंडवा,
सागर,
टीकमगढ़
और
उज्जैन,
बुरहानपुर,
नरसिंहपुर,
छिंदवाड़ा,
देवास,
छतरपुर,
सिवनी,
इन्दौर,
धार
में
लागू
है।
पात्र
हितग्राही-
उपरोक्त
जिलों
के
गन्ना
उत्पादक
कृषक।
हितग्राही
चयन
प्रक्रिया-
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी
अपने
क्षेत्र
में
गन्ना
उत्पादकों
से
संपर्क
कर
बीज
उत्पादन
का
कार्यक्रम
तैयार
करते
है
तथा
गन्ना
उत्पादकों
को
उन्नत
बीज
उपलब्ध
कराते
हैं।
(1)
गन्ना
बीज
अनुदान-
शासकीय
प्रक्षेत्र/अनुसंधान
प्रक्षेत्र
से
उन्नत
गन्ना
बीज
क्रय
करने
पर
प्रति
कृषक
1
हैक्टर
जोत
सीमा
तक
लगने
वाले
बीज
की
कीमत
का 25
प्रतिशत,
अधिकतम
रु. 2500
प्रति
हैक्टर,
जो
भी
कम
हो।
(2)
कृषक
प्रशिक्षण
व
कृषक
भ्रमण
कार्यक्रम
की
व्यवस्था।
(3)
गन्ना
बीज
प्रगुणन
के
लिये
उत्पादन
लागत
का 10
प्रतिशत
अथवा
रु. 2000/-
प्रति
हेक्टर
जो
भी
कम
हो,
अनुदान
देय
है।
सम्पर्क-
स्थानीय
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी।
सूरजधारा
अन्नपूर्णा
योजना
उद्देश्य-
अनुसूचित
जाति
और
अनुसूचित
जनजाति
के
लघु
एवं
सीमांत
कृषकों
को
अलाभकारी
फसलों/किस्मों
के
स्थान
पर
लाभकारी
दलहनी/तिलहनी
तथा
खाद्यान्न
फसलों
के
उन्नत
एवं
अधिक
उत्पादन
देने
वाली
फसलों
के
बीज
उपलब्ध
कराकर
उत्पादकता
एवं
उत्पादन
बढ़ाकर
उनकी
आर्थिक
स्थिति
सुधारना।
योजना
का
कार्यक्षेत्र
संपूर्ण
मध्यप्रदेश।
बीज
की
अदला
बदली- कृषक
द्वारा
दिये
गये
अलाभकारी
बीज
के
बदले
में
लाभकारी
दलहनी/तिलहनी
फसलों
का
उन्नत
बीज (1
हैक्टर
को
सीमा
तक)
प्रदान
किया
जायेगा।
कृषक
को
उनके
बीज
के
बराबर
उसी
फसल
का
उन्नत
बीज (1
हैक्टर
सीमा
तक)
प्रदाय।
अन्य
फसल
का
बीज
चाहने
पर,
प्रमाणित
बीज
के
वास्तविक
कीमत
के 25
प्रतिशत
मूल्य
का
बीज
अथवा
नगद
राशि
कृषक
को
देनी
होगी।
बीज
स्वावलम्बन-
कृषक
की
धारित
कृषि
भूमि
के 1/10
क्षेत्र
के
लिए
आधार/प्रमाणित
बीज 75
प्रतिशत
अनुदान
पर
प्रदाय।
बीज
उत्पादन-
तिलहनी/दलहनी
फसलों
के
उन्नत
किस्मों
के
बीज
उत्पादन
के
लिए
चुने
गए 43
शासकीय
प्रक्षेत्रों
की 10
किलोमीटर
परिधि
के
अनुसूचित
जाति/जनजाति
के
लघु
एवं
सीमांत
कृषकों
के
खेतों
पर (कम
से कम
आधा
एकड़
क्षेत्र)
बीज
कार्यक्रम
लिया
जायेगा।
कृषक
को
आधार/प्रमाणित-
प्रथम
श्रेणी
का
बीज 75
प्रतिशत
अनुदान
पर
प्रदाय
किया
जायेगा।
बीज
प्रमाणीकरण
के
लिए
लगने
वाला
व्यय
शासकीय
अनुदान
के
रूप
में
देय
होगा।
सम्पर्क-
स्थानीय
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी।
खेत
तालाब
योजना
उद्देश्य-
कृषि
के
समग्र
विकास
के
लिये
सतही
तथा
भूमिगत
जल की
उपलब्धता
को
बढ़ाना।
योजना
का
कार्यक्षेत्र-
संपूर्ण
मध्यप्रदेश
में।
पात्र
हितग्राही-
समस्त
वर्ग
के
कृषक (मात्र
एक
खेत
तालाब
के
लिये
अनुदान।)
योजना
का
स्वरूप-
योजना
में
खेत
तालाब
निर्माण
के
तीन
मॉडल
तैयार
किये
गये
हैं :-
1.
आकार-15
मी.X15
मी.X3
मी. (साइड
स्लोप
1. 5:1)
अनुमानित
लागत
13400/-
2.
आकार-21मी.X18
मी. 3Xमी.
(साइड
स्लोप
1. 5:1)
अनुमानित
लागत
25200/-
3.
आकार-23
मी.X21
मी.X3
मी. (साइड
स्लोप
1. 5:1)
अनुमानित
लागत
32700/-
कृषक
स्वेच्छा
से
कोई
मॉडल
का
चयन
कर
सकता
है।
कृषक
स्वयं
के
वित्तीय
साधन
से
अथवा
बैंक
ऋण के
माध्यम
से
खेत
तालाब
निर्माण
करा
सकेगें।
सभी
वर्गों
के
कृषकों
को
लागत
का 50
प्रतिशत
अनुदान
देय
होगा।
किन्तु
इसकी
अधिकतम
सीमा
रुपये
16,350
होगी।
सम्पर्क-
क्षेत्रीय
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी।
बायोगैस
परियोजना
उद्देश्य
व
कार्यक्षेत्र-
ऊर्जा
के
वैकल्पिक
स्त्रोत
उपलब्ध
करवाना
तथा
कृषि
के
लिए
उत्तम
खाद
उपलब्ध
कराना।
संपूर्ण
मध्यप्रदेश
में
योजना
लागू
है।
पात्र
हितग्राही-
अनुसूचित
जाति/जनजाति,
लघु
सीमांत,
भूमिहीन
मजदूर
तथा
सामान्य
श्रेणी
के
कृषक।
योजना
क्रियान्वयन-
1 से 10
घन
मीटर
क्षमता
के
संयंत्र
के
निर्माण
पर
अनुसूचित
जाति/जनजाति/लघु/सीमांत
कृषकों
तथा/भूमिहीन
श्रमिकों
को रु.
3500 व
अन्य
कृषकों
को रु.
2700
प्रति
संयंत्र
की दर
से
अनुदान
देय।
शौचालय
से
जोड़े
गये
संयंत्रों
पर रु.
500
प्रति
संयंत्र
के
मान
से
अतिरिक्त
अनुदान
की
व्यवस्था।
संपर्क-
क्षेत्रीय
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी।
राष्ट्रीय
कृषि
बीमा
योजना
उद्देश्य-
कृषकों
की
फसल
को
प्राकृतिक
आपदाओं
जैसे
सूखा,
ओले
और
कीट
व्याधि
से
होने
वाली
क्षति
की
प्रतिपूर्ति
के
लिए
सहायता
देना।
पात्र
हितग्राही-
ऐसे
कृषक
जिनकी
फसलों
को
क्षति
पहुंची
है,
अधिसूचित
क्षेत्र
के है
और
जिन्होंने
अधिसूचित
फसलों
के
लिये
बैंक
से ऋण
लिया
हो
तथा
गैर
ऋण
किसान
जिन्होंने
स्वेच्छा
से
बीमा
कराया
हो।
लघु
एवं
सीमांत
कृषकों
को
बीमा
प्रीमियम
में
अनुदान
दिया
जाता
है।
योजना
क्रियान्वयन
की
प्रक्रिया-
जिस
क्षेत्र
में
प्राकृतिक
आपदाओं
से
क्षति
होती
है उस
क्षेत्र
की
क्षति
का
आंकलन
राजस्व
विभाग
द्वारा
प्रदत्त
जानकारी
पर
बीमा
कम्पनी
द्वारा
किया
जाता
है।
इस
क्षति
के
आधार
पर
पात्र
कृषकों
को
क्षति
की
प्रतिपूर्ति
की
जाती
है।
सम्पर्क-
स्थानीय
ग्रामीण
कृषि
विस्तार
अधिकारी/राजस्व
अधिकारी।
मिट्टी
परीक्षण
कार्यक्रम
मिट्टी
में
विद्यमान
प्रमुख
एवं
सूक्ष्म
तत्वों
की
जांच
की
सुविधा
प्रदेश
की 24
मिट्टी
परीक्षण
प्रयोग
शालाओं
में
उपलब्ध
है।
शुल्क
- निम्नानुसार
है।
|
मद |
सामान्य कृषक |
अ.जा./अ.ज.जा. कृषक |
| (1) |
मुख्य
तत्व
विश्लेषण |
रु.
5
प्रति
नमूना |
रु.
3
प्रति
नमूना |
| (2) |
सूक्ष्म
तत्व
विश्लेषण |
रु.
40
प्रति
नमूना |
रु.
30
प्रति
नमूना |
संपर्क-
क्षेत्रीय
ग्रामीण
विस्तार
अधिकारी।
बलराम
ताल
योजना
उद्देश्य-
वर्षा
के बह
जाने
वाले
जल की
अधिकतम
मात्रा
खेतों
में
रोककर
उससे
सिंचाई
करने
के
लिये
बलराम
ताल
योजना
प्रारंभ
की
गई।
योजना
का
स्वरूप-
खेतों
में
बलराम
ताल
निर्माण
के
लिये
25
प्रतिशत
अनुदान
देय
होगा
जिसकी
अधिकतम
सीमा
50
हजार
रुपये
होगी।
पात्र
हितग्राही-
25 मई 2007
के
बाद
पंजीकृत
प्रकरणों
पर
योजना
का
लाभ
दिया
जायेगा।
सम्पर्क-
कृषि
विभाग
का
स्थानीय
कार्यालय।
|