पाँचवीं
पास
व्यक्ति
को कहीं
नौकरी
नहीं
मिलती,
परंतु
मेहनत, लगन
और सरकार
की योजना
की मदद से
आज अपने घर
की गरीबी
दूर करने
में सफल
हूँ। यह
कहना है
डिण्डोरी
जिले के
मुकुटपुर
गाँव के
शिवकुमार
राठौर का,
जिसने
दूसरों की
दुकान में
पंचर
बनाते-बनाते
आज अपनी
खुद की
दुकान का
मालिक
बनकर अपने
साथ
दूसरों को
भी काम
दिया।
उन्हें अब
हर माह नौ
हजार
रुपये की
आमदनी भी
होती है।
छोटे
से गाँव का
पाँचवीं
पास
शिवकुमार
राठौर
दूसरे की
दुकान में
पंचर
बनाता था।
बचपन से ही
उसकी
तमन्ना थी
कि वह
स्वयं की
दुकान
खोलेगा।
उसके पास
हुनर व काम
करने का
हौसला तो
था पर
दिक्कत थी
पूँजी की।
शिवकुमार
दूसरों की
दुकान में
काम कर
धीरे-धीरे
पैसे
इकट्ठा
करता रहा
और एक दिन
लोगों से
उसे ग्राम
कोष से ऋण
के बारे
में पता
चला। बस
फिर क्या
था, लगा
दिया उसने
अपना
आवेदन और
ग्राम सभा
ने उसे 10
हजार
रुपये का
ऋण दे
दिया।
अपने काम
में तो वह
होशियार
था ही,
सरकारी
मदद ने
उसकी
रफ्तार और
बढ़ा दी। ऋण
मिलते ही
शिवकुमार
ने
कम्प्रेसर
खरीद लिया
और
समनापुर-डिण्डौरी
रोड पर
शुरू कर दी
पंचर की
अपनी
दुकान।
आज
अपनी
मेहनत और
लगन से
अपनी
दुकान में
स्वयं और
सहभागियों
के साथ
सिर्फ
साइकिल ही
नहीं
बल्कि
चौपहिया
वाहनों के
पंचर भी
बनाते हुए
वह आसपास
के युवाओं
के लिए
मिसाल बन
गया है।