श्योपुर
के
आदिवासी
बहुल गाँव
हीरापुर
मारकासहराना
के किसान
रामसिंह
अपनी 6 बीघा
जमीन पर
खेती करने
के लिये
दूसरों पर
निर्भर
थे। इसके
लिये
उन्हें
अपने खेत
की आधी
जमीन बटाई
पर दूसरों
को देना
पड़ती थी।
सीमांत
किसान
रामसिंह
का परिवार
खेती से
आजीविका
चलाने में
अनेकों
दिक्कतों
का सामना
कर रहा था।
इन्हीं
दिक्कतों
के कारण कई
मौकों पर
रामसिंह
को दूसरों
के खेतों
में खेती
करना
पड़ती थी।
रुपयों
का अभाव
रामसिंह
के खेती
में
आत्मनिर्भरता
के मामले
में आड़े
आता था।
गाँव की
चौपाल में
चर्चा के
दौरान यह
बात
प्रशासन
के
अधिकारियों
के सामने
आई। इसी
दौरान
ग्रामसभा
की बैठक
में जिला
कलेक्टर
भी
पहुँचे।
रामसिंह
की समस्या
को देखते
हुए
उन्हें
ग्रामकोष
से बैल
जोड़ी
खरीदने के
लिये 5 हजार
की अनुदान
राशि देने
का निर्णय
हुआ। यह
संभव हुआ
आजीविका
परियोजना
सहायता दल
के
सदस्यों
की पहल पर।
आज
रामसिंह
बैल जोड़ी
से अपने
खेत में
पूरी फसल
ले रहे
हैं। अब
उन्हें
फसलों की
पैदावार
से 40 हजार
रुपये की
आय
प्राप्त
हो रही है।
वे अपने
खेत में दो
फसल भी ले
रहे हैं।