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सफलता की कहानी

दूध व्यवसाय से बरूड़ गांव की महिलाएं हुई आत्मनिर्भर

भोपाल : 16 मार्च, 2011

एम.पी. स्टेट को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन प्रदेश में सहकारिता के जरिये दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिये दुग्ध सहकारी समितियों के गठन की तरफ विशेष ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इंदौर सहकारी दुग्ध संघ के अंतर्गत गठित बरूड़ महिला दुग्ध सहकारी समिति ने पिछले वर्षों में उल्लेखनीय कार्य किया है। खरगौन जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर लगभग 11 हजार की आबादी वाले ग्राम बरूड़ में वर्तमान में 240 गाय एवं 400 भैंस हैं। बरूड़ महिला समिति में वर्तमान में 43 महिला सदस्यों में से 32 महिला सदस्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

बरूड़ दुग्ध समिति ने पिछले वर्ष 55 लाख रूपये से अधिक का व्यापार कर गांव की महिलाओं की आथिर्क स्थिति को मजबूत किया है। बरुड़ में गठित महिला दुग्ध समिति ने पिछले वर्ष लगभग डेढ़ लाख रूपये का लाभांश एवं बोनस अपने सदस्यों को वितरित किया है। यह दुग्ध समिति अपने सदस्यों को पशुपालन की आधुनिक तकनीकों की भी जानकारी दे रही है। गांव के दुधारु पशुओं से दूध उत्पादन बढ़ सके इसके लिये समिति ने पिछले वर्ष डेढ़ लाख रुपये का पशु आहार अपने सदस्यों को उपलब्ध कराया। दुग्ध समिति के कामकाज में पारदर्शिता आ सके इसके लिये दुग्ध भुगतान प्रणाली के लिये स्वचलित कम्प्यूटर की खरीदी की गई, एक लाख रूपये की लागत से खरीदे गये इस कम्प्यूटर से दूध संकलन एवं सदस्यों को भुगतान की जा रही राशि का उचित तरीके से हिसाब रखा जा रहा है।

बरूड़ दुग्ध समिति की अध्यक्ष श्रीमती रत्नाबाई परसाई बताती हैं कि गाँव में महिला दुग्ध सहकारी समिति के गठन के बाद से महिला सदस्यों में सामाजिक जागरुकता के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति में लगातार बदलाव आ रहा है। आज इस समिति की सफलता को देखते हुये आस-पास के गाँवों में भी महिला दुग्ध सहकारी समिति के गठन की पहल की जा रही है।

मुकेश मोदी

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