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सफलता
की कहानी
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सावित्री
की वापसी
हुई यम के
घर से
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भोपाल:
11 अगस्त, 2011
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सतयुग
में सती
सावित्री
अपने पति
के प्राण
यमराज से
वापस ले आई
थीं।
कलयुग में
नन्हीं
बालिका
सावित्री
पोषण-पुनर्वास
केन्द्र
की मदद से
अपने आप को
यमराज के
यहाँ से
वापस लाई।
कटनी जिले
के
विजयराघवगढ़
के परखुड़ी
ग्राम की
नन्ही
बालिका
सावित्री
कोल
कुपोषण को
मात दे अब
अपने घर-आँगन
में खेल
रही है।
गरीब
आदिवासी
परिवार
में जन्मी
सावित्री
कुपोषण की
चपेट में आ
गयी थी।
माता-पिता
ने
सावित्री
को मृत
समझकर एक
कोने में
पटक दिया।
पौने दो
साल की
सावित्री
को
संक्रमण
के कारण
सिर में
गहरे जख्म
हो गये।
कमजोरी से
चलना-फिरना
तो दूर खड़ा
होना और
हाथ
हिलाना भी
दूभर हो
गया।
लोक
कल्याण
शिविर में
बालिका की
पीड़ा
देखकर उसे
तत्कालीन
कलेक्टर
ने पोषण-पुनर्वास
केन्द्र
कटनी में
भर्ती
करवाया।
फरवरी, 2009 की
प्रारंभिक
जाँच में
सावित्री
का वजन
मात्र 5
किलो 960
ग्राम था
और वह
कुपोषण के
ग्रेड-4 में
थी।
केन्द्र
में भर्ती
के दौरान
उसे
प्रतिदिन
पौष्टिक
आहार दिया
गया। एक
पखवाड़े
बाद
बालिका का
वजन 7 किलो 200
ग्राम हो
गया और
केन्द्र
से छुट्टी
के समय वह
ग्रेड-2 में
आ गयी।
केन्द्र
से विदाई
के समय
उसके माता-पिता
को
पौष्टिक
आहार
बनाना
सिखाने के
साथ ही उसे
नियमित
पौष्टिक
आहार देने
की समझाइश
भी दी गई।
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