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सफलता की कहानी

दुग्ध सहकारी समिति ने बदली सिरोलिया गाँव की तस्वीर

भोपाल : 14 मई, 2011

दूध के उत्पादन से जुड़ी एक सहकारी समिति ने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के चलते न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई बल्कि अपने गाँव की तस्वीर भी बदल दी है। देवास से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिरोलिया गाँव में वर्ष 1976 में दुग्ध सहकारी समिति का गठन किया गया था। उस समय 630 Rs. की अंश पूँजी तथा 63 सदस्यों से दुग्ध संकलन का कार्य प्रारम्भ किया गया था। दस हजार की जनसंख्या वाले गाँव की दुग्ध सहकारी समिति की वर्तमान अंश पूँजी 44 हजार 750 Rs. हो गई है।  इसी तरह सदस्यों की संख्या भी बढ़कर 580 पहुँच गई है।

इस गाँव में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए इंदौर दुग्ध संघ द्वारा पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत गाँव के ही व्यक्ति को कृत्रिम गर्भाधान तथा पशु प्रथमोपचार का प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यक्रम से अब तक 5000 जर्सी वत्स उत्पन्न हो चुके हैं।  साथ ही दुग्ध संकलन बढ़कर 1400 लीटर प्रतिदिन हो गया है।

दुग्ध समिति ने सहकारिता के जरिए गाँव के विकास में भी अपनी भागीदारी कर अपने लाभ में से पाँच लाख रूपये की लागत से स्वयं के भवन का निर्माण किया है। समिति ने सिरोलिया में अनेक शैक्षणिक संस्थाओं की सहायता तथा जनोपयोगी कार्य किए हैं। गाँव के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय को 60न्120 फीट के दो भूखंड निःशुल्क दिये हैं। जिनकी वर्तमान लागत क्रमशः 12 व 15 लाख Rs. है। गाँव में मांगलिक भवन निर्माण के लिए दुग्ध समिति द्वारा 45x108 फीट का भूखंड उपलब्ध कराया गया है।

इस प्रकार दुग्ध उत्पादकों ने सहकारिता के माध्यम से दुग्ध उत्पादन कर स्वयं का व्यवसाय करते हुए एक ओर जहाँ बिचौलियों को बाहर का रास्ता दिखाया तथा नियमित आय का साधन बनाया है, वहीं दूसरी ओर अपने सामाजिक दायित्वों को समझते हुए गाँव के विकास में सक्रिय सहयोग दिया है।

प्रलय श्रीवास्तव

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