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दूध
के
व्यवसाय
से बेहतर
जीवन का
सपना पूरा
हुआ
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भोपाल
: बुधवार, 31 मार्च, 2010
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सीमान्त
किसान
तुलसीदास
लोधी की
जिंदगी आम
कृषक की
तरह जीवन-यापन
के अनथक
परिश्रम
के बावजूद
अभावों
में गुजर
रही थी।
खेती-किसानी
से इतनी
आमदनी
नहीं थी कि
वे अपने
परिवार का
भरण-पोषण
बेहतर
तरीके से
कर सकते।
उन्हें,
अपने गाँव
में ही
कृषि से
जुड़े किसी
ऐसे उद्यम
की तलाश थी
जिससे
उनको
आर्थिक
लाभ होता।
दूध का
व्यवसाय
ऐसा ही एक
तरीका था
जो उनकी
बेहतर
ज़िन्दगी
जीने के
सपने को
पूरा कर
सकता था।
लेकिन
दुधारू
पशु
खरीदने और
उन्हें
चारा
खिलाने के
लिए उनके
पास
पर्याप्त
पैसे नहीं
थे।
विश्व
बैंक की जल
संसाधन
विभाग की
परियोजना
मध्य
प्रदेश
वॉटर
सेक्टर
रिस्ट्रक्चरिंग
प्रोजेक्ट
के
अर्न्तगत
पशुपालन
विभाग की
एक योजना
से सतना
जिले के
सिजहटी
गाँव के
किसान
श्री
तुलसीदास
लोधी को एक
भैंस और दो
गायें दी
गईं।
पशुओं के
आवास के
लिए 165
वर्गफीट
का पशु शैड
बनाकर
दिया गया।
पशुओं को
खिलाने के
लिए हरे
चारे के
बीज दिए
गए।
चाराकुट्टी
मशीन भी दी
गई। अब
श्री
तुलसीदास
स्थानीय
बाजार में
प्रतिदिन 16
से 18 लीटर
दूध बेचते
हैं और
प्रतिमाह
लगभग साढ़े
सात हजार
रुपए कमा
लेते हैं।
हरा चारा
उनके खेत
में ही
पैदा होता
है, जिससे
चारे का
कोई खर्चा
नहीं
लगता।
श्री
तुलसीदास
चारे के
साथ भी
मिर्ची,
बैंगन,
गोभी,
प्याज और
अन्य
सब्जियां
भी उगा
लेते हैं।
सब्जियां
भी
स्थानीय
बाजार में
अच्छे
दामों में
बिक जाती
है, जिससे
हर माह चार
हजार रुपए
की
अतिरिक्त
आमदनी
होती है।
इस प्रकार
वे कृषि के
अतिरिक्त
साढ़े
ग्यारह
हजार रुपए
प्रतिमाह
कमाई कर
लेते हैं,
जिससे
उनके
परिवार की
जीवन शैली
में
अभूतपूर्व
परिवर्तन
आया है।
परियोजना
के
पशुपालन
विशेषज्ञ
डॉ.
शैलेन्द्र
सोनी ने
बताया कि
श्री
तुलसीदास
को 1 लाख
रुपए
मूल्य के
दुधारू
पशु और
अन्य
सहायता दी
गई है।
श्री
तुलसीदास
ने अपनी
मेहनत और
लगन से दूध
और
सब्जियों
के
व्यवसाय
का
विस्तार
किया है।
डॉ. सोनी ने
बताया कि
श्री
तुलसीदास
के घर पर
बायोगैस
संयत्र भी
लगाया गया
है। यह
पूरे गाँव
में अकेला
बायोगैस
है। जिस पर
श्री
तुलसीदास
की पत्नी
भोजन
पकाती है।
पूरे गाँव
की
स्त्रियां
धुआं रहित
बायोगैस
पर रसोई
पकते
देखने के
लिए उनके
घर आती
हैं। इससे
श्री
तुलसीदास
की पत्नी
का गाँव
में एक अलग
सम्मान हो
गया है।
श्री
तुलसीदास
को वर्मी
कम्पोस्ट
का भी
प्रशिक्षण
दिया गया
है, जिससे
उनकी
सब्जियों
का आकार
बड़ा और रंग
आकर्षक
होता है।
साथ ही
उत्पादन
भी भरपूर
होता है।
श्री
तुलसीदास
अभावों के
अँधेरे से
निकलकर नए
जीवन के
उजाले की
आशाओं से
भर गए हैं।
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