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सफलता
की कहानी
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दृढ़
निश्चय से
शुरू किया
सुरेश
चन्द्र ने
अपना
कारोबार
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भोपाल
: 30 जुलाई, 2010
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आज
के समय में
नौकरी
मिलना
काफी कठिन
हो गया है।
सामान्य
वर्ग के
साथ-साथ
आरक्षित
वर्ग के
ऐसे अनेक
युवा हैं
जो
शिक्षित
होने के
बाद
प्रयास
करने के
बावजूद
नौकरी
हासिल
नहीं कर
सके।
इन्हीं
में से एक
हैं
विदिशा के
सुरेश
चन्द्र
मेवाड़ा।
सुरेश
चन्द्र ने
भी विदिशा
में रहकर
पढ़ाई की।
पहले तो
उन्होंने
नौकरी
हासिल
करने के
प्रयास
किये
लेकिन
इन्हें
नौकरी
पाने में
सफलता
नहीं मिल
सकी।
समय
बीतने के
साथ
अनुसूचित
जाति वर्ग
के सुरेश
चन्द्र
रोजगार को
लेकर
चिंतित
हुए।
परिवार के
लोगों ने
इन्हें
स्वयं का
व्यवसाय
शुरू करने
की सलाह
दी। सुरेश
चन्द्र ने
व्यवसाय
शुरू करने
के संबंध
में अपने
मित्रों
से भी सलाह-मशवरा
किया।
निर्धन
परिवार से
ताल्लुक
रखने वाले
सुरेश
चन्द्र के
लिये
व्यवसाय
शुरू करने
में
पर्याप्त
पूंजी का न
होना भी एक
समस्या
थी। सुरेश
चन्द्र को
जिला
अंत्यावसायी
कार्यालय
के बारे
में
जानकारी
मिली।
उन्होंने
मुख्य
कार्यपालन
अधिकारी
से संपर्क
किया।
सुरेश
चन्द्र ने
अंत्यावसायी
कार्यालय
में
पहुंचकर
अपनी
कॉलोनी
में
किराना
दुकान
खोलने की
इच्छा
जाहिर की।
मुख्य
कार्यपालन
अधिकारी
ने इनके
आत्मविश्वास
को देखते
हुए
किराना
दुकान
खोलने का
प्रकरण
बैंक को
प्रेषित
किया।
सुरेश
चन्द्र को
बैंक से 50
हजार
रुपये का
ऋण और
अनुदान
मिला।
इनका
अच्छा
व्यवहार
होने के
कारण
किराना
दुकान
चलने लगी।
धीरे-धीरे
इन्होंने
ऋण राशि भी
चुकता कर
दी।
अब
सुरेश
चन्द्र की
दुकान में
उनके छोटे
भाई भी हाथ
बंटा रहे
हैं। आज
परिवार के
दो
सदस्यों
को इस
दुकान के
जरिये
रोजगार
मिल रहा
है। सुरेश
चन्द्र
बताते हैं
कि यदि
व्यक्ति
दृढ़
निश्चय के
साथ कोई
कार्य करे
तो सफलता
उसे अवश्य
मिलती है।
व्यवसाय
शुरू करने
से सुरेश
चन्द्र
एवं इनके
परिवार की
प्रतिष्ठा
समाज में
बढ़ी है।
आज वे अपनी
किराना
दुकान को
और बढ़ाना
चाहते
हैं।
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