आर्थिक
तंगी की
मार झेल
रहे शहडोल
जिले के
बुढ़ार
ब्लाक के
एक छोटे-से
गांव
बलवहरा के
काश्तकार
रामाअवतार
कुशवाह के
जीवन की
खोई चमक को
राज्य
सरकार के
कृषि
विभाग की
खेत तालाब
एवं बोर
योजना
काफी हद तक
लौटाने
में
कामयाब
रही है।
वर्षा पर
निर्भर
रहने के
कारण
सिर्फ धान
और सब्जी
की आधी-अधूरी
फसल का
उत्पादन
लेकर
परिवार का
पेट पालने
वाले
रामाअवतार
को इन खेत
तालाब और
बोर ने
लखपति बना
दिया है।
दो
साल पहले
पांच एकड़
भूमि में
राज्य
सरकार के
कृषि
विभाग के
अनुदान से
बने खेत-तालाब
और बोर की
मदद से
सब्जी की
खेती का
सफर शुरू
करने वाले
रामाअवतार
सब्जी की
जबरदस्त
पैदावार
लेकर अब
सालाना
अकेले
सब्जी से
ही तीन लाख
रूपये का
शुद्ध
मुनाफा
कमा रहे
हैं। धान,
गेहूं
मूंग, अरहर
की
पैदावार
से अलग
आमदनी हो
रही है।
रामाअवतार
सब्जी के
सीजन में
कड़ी मेहनत
करते हैं।
पहले
पुश्तैनी
जमीन पर
धान और
गोभी, लौकी
एवं टमाटर
की
पारंपरिक
खेती होती
थी। बारिश
के पानी के
भरोसे की
खेती से
होने वाली
आय से
परिवार की
जिम्मेदारी
का
निर्वाह
नहीं हो
पाता था।
लेकिन
कृषि
विभाग के
मैदानी
अधिकारियों
की
प्रेरणा
और राज्य
सरकार की
मदद के खेत
तालाब और
बोर की
सिंचाई से
भिण्डी,
लौकी,
करेला,
रैरूआ,
खीरा, ककड़ी,
बरबटी,
कुम्हड़ा,
टमाटर, भटा,
आलू, प्याज,
मिर्च,
तरबूज,
खरबूजे की
खेती की ओर
कदम
बढ़ाया।
चन्द
महीनों की
खेती में
यह सफर
इतना
कामयाब
हुआ कि
लागत के
अलावा
भारी
मुनाफा भी
निकाला।
यही नहीं
कृषि
विभाग से
उन्हें
वर्मीकम्पोस्ट,
बायोगैस
संयंत्र,
स्प्रिंकलर,
विद्युत
पंप,
कीटनाशक
दवा
छिड़कने
वाला पंप
अलग से मिल
गये। धान
एवं गेहूं
के बीज भी
प्राप्त
हो गये।
रामाअवतार
का उत्साह
कुलांचे
भरने लगा।
उन्होंने
अपनी कमाई
से एक और
बोर करा
लिया। फिर
धीरे-धीरे
खेती का
आकार
बढ़ाते
गये। चार
परिवारों
को भी अधाई-बंटाई
पर सब्जी
की खेती के
लिए जमीन
दे दी। अब
साल में 200
क्विंटल
से अधिक
सब्जी की
पैदावार
करते हैं।
धान, गेहूं,
अरहर, मूंग
की फसल अलग
से लेते
हैं।
सिंचाई
एवं जैविक
खाद के
इस्तेमाल
से वे
भरपूर
पैदावार
ले रहे
हैं।
रामाअवतार
का बैंक
खाता अब
सब्जी की
कमाई के
बाद भर रहा
है।
सिंचाई के
कारण उनके
रूके सारे
काम एक ही
झटके में
पूरे हो
गये। अब
उनके पास
कहीं कोई
तंगी नहीं
है। खेती
की कमाई से
उन्होंने
मकान बनवा
लिया, बोर
करा लिया
और मोटर
साइकिल
एवं जीप
खरीद ली
है। खेत
में पानी
की टंकी का
निर्माण
भी कर दिया
है।
रामाअवतार
अपनी
सब्जी की
पैदावार
को सीधे
बुढ़ार की
सबसे बड़ी
सब्जी
मंडी में
भेजते
हैं। यहां
मंडी के
मुख्य
आढ़तिया
उसे
खरीदते
हैं।
रामाअवतार
ने अपने दो
बेटों को
भी खेती
बाड़ी के
काम में
लगा दिया
है।
उन्हें
अपने
बेटों के
लिए नौकरी
की जरूरत
नहीं है।
सब्जी
उत्पादन
के नतीजों
से
उत्साहित
रामाअवतार
बताते हैं,''
अब सब्जी
का
उत्पादन
इतना हो
रहा हैं,
जिससे सब
इच्छाएं
पूरी हो
रही हैं।
आज आर्थिक
स्थिति
में जमीन-आसमान
का अन्तर
है। सरकार
के संसाधन
वरदान बन
गये गये।
बुढ़ार के
वरिष्ठ
कृषि
विस्तार
अधिकारी
श्री एस. वी
सिंह
बताते हैं,
'' वर्षा पर
निर्भर
खेती एक
चुनौती
है। इसलिए
काश्तकारों
के लिए
खेती को
लाभ का
धंधा
बनाने के
लिए
उन्हें
खेत तालाब,
बोर जैसे
सिंचाई
संसाधन
उपलब्ध
कराने के
साथ-साथ
अन्य
संसाधन भी
उपलब्ध
कराने के
प्रयास
किये जा
रहे हैं।
जिसके
अच्छे
नतीजे
सामने आ
रहे हैं।''