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गोपाल
मजदूर से
बने लघु
उद्यमी
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भोपाल
: 28
मई, 2010
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सफाई
कामगार
परिवार से
तालुक
रखने वाले
गोपाल
गोडेयले
ने पढ़ाई
करने के
बाद एक
प्रायवेट
फेक्ट्री
में
कामकाज
करना
प्रारंभ
किया।
उन्हें
महीने के
अंत में
वेतन के
रूप में
इतनी भी
राशि नहीं
मिल पाती
थी कि वे
अपने
परिवार का
गुजर बसर
अच्छे से
कर सके।
उन्होंने
कुछ
वर्षों तक
प्लास्टिक
फेक्ट्री
में काम कर
तकनीकी
रूप से
दक्षता
हासिल की।
गोपाल के
मन में
हमेशा यह
आया करता
था कि वे एक
लघु
उद्योग
प्रारंभ
कर अपने
परिवार के
अन्य
सदस्यों
को भी
रोजगार
उपलब्ध
कराये। इस
संबंध में
उन्होंने
अपने ही
समाज के
अन्य
लोगों से
चर्चा की।
चर्चा में
उन्हें
पता लगा कि
जिला
अन्त्यावसायी
समिति
अनुसूचित
जाति वर्ग
के
व्यक्तियों
को स्वंय
का रोजगार
प्रारंभ
करने के
लिये
अनुदान के
साथ ऋण
उपलब्ध
कराती है।
ग्वालियर
के
अनुसूचित
जाति वर्ग
के गोपाल
ने
ग्वालियर
जिला
अन्त्यावसायी
समिति
कार्यालय
में
सम्पर्क
किया।
मुख्य
कार्यपालन
अधिकारी
ने उनके
उत्साह को
देखते
हुये
प्लास्टिक
फेक्ट्री
का ऋण
प्रकरण
तैयार
किया।
गोपाल को
सफाई
कामगारों
की मुक्ति
पुर्नवास
योजना के
अंतर्गत 2.50
लाख रूपये
का ऋण
मंजूर
हुआ। इस ऋण
राशि के
साथ
उन्हें 50
हजार
रूपये का
अनुदान भी
मिला।
अनुसूचित
जाति वर्ग
के गोपाल
बताते है
कि शुरूआत
के सालों
में तो
उन्हें
फेक्ट्री
चलाने में
दिक्कत
हुई। इसके
बाद
उन्होंने
साहस के
साथ
फेक्ट्री
के सभी काम
किये। आज
वे सफल
उद्यमी के
रूप में
प्लास्टिक
के
क्रिकेट
बेट एवं
डिब्बियां
बना रहे
हैं। आज
उनके
उत्पाद
ग्वालियर
के
ग्रामीण
क्षेत्रों
तक पहुंच
रहे हैं।
उन्होंने
फेक्ट्री
का
विस्तार
करते हुये
और मशीने
लगा ली
हैं। आज
उनकी
फेक्ट्री
में तीन
व्यक्तियों
को और
रोजगार
मिल रहा
है।
गोपाल
बताते हैं
कि साहस के
साथ
प्रयास
किये जाये
तो सफलता
जरूर
मिलती है।
आज वे अपने
समाज में
एक अलग
पहचान
रखते हैं।
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