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सफलता
की कहानी
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मदद
मिली तो,
चरवाहा भी
बन गया
लखपति
काश्तकार
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भोपाल
: 24 अगस्त, 2010
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कभी
बदहाली के
दिन देख
चुके
बुढ़ार
जनपदीय
अंचल के
ग्राम
पड़खुरी
के तीस
बषीर्य
लक्ष्मण
प्रसाद
यादव अब
अपनी
लाखों की
कमाई के
साथ जिले
के
समृद्धशाली
काश्तकारों
में शुमार
हो गये
हैं।
चरवाहे
से जीवन का
सफर शुरू
करने वाले
लक्ष्मण
के पास
काफी जमीन
होने के
वाबजूद वह
पानी की
कमी के
कारण उसका
उपयोग
नहीं कर पा
रहे थे। वह
पारंपरिक
रूप से
बारिश के
पानी के
भरोसे
मुश्किल
से थोड़ी-बहुत
धान ही
पैदा कर
पाते थे,
जिससे
मामूली
आमदनी
होने के
साथ-साथ वह
घर में
खाने के
काम ही आ
पाती थी।
इसलिए
उन्होंने
अपनी
आजीविका
चलाने के
लिए ढोर (जानवर)
चराने की
ओर रूख
किया।
इस
तरह काफी
जमीन का
स्वामी
होने के
वाबजूद
लक्ष्मण
ने चरवाहे
में अपना
भविष्य
तलाशने का
फैसला
किया।
उन्होंने
बड़े जतन
से अपनी
राह बनाई,
क्योंकि
इसमें
अधिक कमाई
की गंजाइश
कम थी।
वास्तव
में आगे
चलकर इस
काम में वे
आथिर्क
तंगी का
शिकार
होने लगे।
अब वे अपनी
खाली पड़ी
जमीन से
खेती करके
अच्छी
खासी कमाई
करने के
सपनें
देखने
लगे।
लेकिन
खेती के
लिए
सिंचाई की
जरूरत थी,
और साधन
उनके पास
था नहीं।
लेकिन
कृषि
विभाग ने
इस काम में
लक्ष्मण
की मदद की
और उनके
खेतों में
अनुदान पर
एक
ट्यूबवेल
लगवाया।
सिंचाई के
लिए
उन्हें
स्प्रिंकलर
भी
दिलवाया।
अनुदान पर
ही पंप एवं
अन्य कृषि
उपकरण भी
दिलवाए और
नाडेप वमी
टांका भी
बनवाया।
शासकीय
मदद से
प्राप्त
संसाधने
की बदौलत
जब
उन्होंने
नये सिरे
से खेती
शुरू की, तो
मानो
चमत्कार
हो गया। आज
वे अपने 50
एकड़ खेत
में धान,
गेहू, अलसी
एवं सब्जी
की
जबरदस्त
पैदावार
ले रहे हैं
और सालाना
कम से कम
साढ़े तीन
लाख रूपये
का शुद्ध
मुनाफा
कमा रहे
हैं। यही
नहीं, वे
औसत 100
मजदूरों
को साल भर
रोजगार भी
देते हैं।
वे साल में
तीन फसलें
ले रहे
हैं।
लक्ष्मण
ने खेती से
हुए
मुनाफे से
टैक्टर
एवं मोटर
साइकिल
खरीदी है
तथा
पंपहाउस
बनवाया
है।
वाकई
सरकारी
मदद के
सिंचाई
संसाधनों
ने
लक्ष्मण
की जिंदगी
बदल दी।
इसे
लक्ष्मण
से अधिक
भला कौन
जानता है।
वह बताते
है, 'पहले
हमारी
इच्छायें
पूरी नहीं
हो पाती
थीं, आज
हमारी
सारी
इच्छाऐं
पूरी हो
रही हैं।
पहले घर
चलाने को
दूसरों से
उधार लेना
पड़ता था,
पर आज हम
दूसरों को
उधार दे
रहे हैं'।
लक्ष्मण
को
संसाधनों
और मेहनत
ने एक
चरवाहे से
लखपति
काश्तकार
बना दिया
है। गांठ
में पैसा
आने से
गांव में
उनका
दबदवा भी
बढ़ गया
है। कृषि
विभाग के
वरिष्ठ
कृषि
विस्तार
अधिकारी
श्री एस.बी.
सिंह कहते
हैं, 'खेती-किसानी
और फसल
उत्पादन
बढ़ाने के
लिए
संसाधन
एवं
तकनीकी
मार्गदर्शन
सुलभ
कराकर
सरकार
काश्तकारों
को लगातार
प्रोत्साहित
कर रही है।
ये संसाधन
भरपूर फसल
लेने के
लिए काफी
कारगर हैं'।
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