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सफलता की कहानी

मेडागास्कर पद्धति ने विश्वास पैदा किया खेती के प्रति

भोपाल : 24 जून, 2010

मध्यप्रदेश में मेडागास्कर पद्धति से धान उत्पादन में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है। इस पद्धति के परिणाम अब किसानों के खेतों में देखने को मिल रहे हैं। सतना जिले के ग्राम मतहा के किसान सुरेन्द्र सिंह पटेल ने मात्र 1800 वर्ग फीट के खेत में 1.65 क्विंटल धान का उत्पादन कर सभी को चौका दिया है।

मेडागास्कर एक ऐसी पद्धति है जिसमें धान की जाति या संकर जाति का महत्व नहीं है। इसमें केवल विशेष उत्पादन तकनीकी का महत्व है। इस पद्धति का विकास वर्ष 1983 में हुआ। इस पद्धति में उत्पादन की विभिन्न तकनीकी के मिश्रण के उपरांत नर्सरी प्रबंध से लेकर रोपण-जल प्रबंध आदि का समावेश किया गया है।

छोटे काश्तकार के रूप में पहचाने जाने वाले श्री पटेल के पास इनती भी उपजाऊ जमीन नहीं थी कि उससे वे अपने परिवार का गुजर-बसर अच्छी तरीके से कर सके। परिवार के बढ़ते दबाव के कारण श्री पटेल ने खेती का व्यवसाय बदलने का मन भी बनाया लेकिन इस बीच उनकी मुलाकात कृषि अधिकारियों से हुई। कृषि अधिकारियों ने श्री पटेल को मेडागास्कर पद्धति से धान लगाने की सलाह दी। कृषि सलाह के बाद श्री पटेल ने 60x30 के प्लॉट पर मेडागास्कर पद्धति से धान लगाने का निश्चय किया। श्री पटेल ने खेत को ठीक करने के बाद कृषि उपकरणों के माध्यम से धान के खरपतवार को नष्ट किया। इफ्को की सलाह पर फास्फो सल्फो नाइट्रेट कम्पोस्ट पिट तैयार कर खाद बनाई। कृषि उपकरण के माध्यम से चिन्ह लगाकर कतार से कतार और रोपे से रोपे की दूरी एक समान 25-25 से.मी. निश्चित करते हुये रोपा लगाया। रेन गन की मदद से निश्चित समयावधि में सिंचाई की।

किसान श्री पटेल बताते हैं वैज्ञानिक पद्धति से धान की खेती करते हुये गाँव के किसान कोतुहल के साथ मुझे देखा करते थे। मेरा दृढ़ निश्चय धान के विपुल उत्पादन के लिये कारगर साबित हुआ। मेरे खेत में पैदा हुआ पूसा सुगंधा धान की खुशबू आज आसपास के गाँव में भी महक रही है। श्री पटेल की पहचान अब एक प्रगतिशील किसान के रूप में होती है। पिछले वर्ष उनके खेत में क्षेत्र के सांसद श्री गणेश सिंह और विधायक श्री रामलखन पटेल ने भी धान की मेडागास्कर पद्धति को देखा और उसकी सराहना की।

मुकेश मोदी

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