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सफलता की कहानी

उन्नत खेती से नई पहचान मिली प्रगतिशील 
महिला कृषक श्रीमती पवार को 

भोपाल : 08 अप्रैल, 2010

मन में लगन, दृढ़ इच्छा शक्ति एवं मेहनत से खेती कर अच्छा लाभ कमाया जा सकता है। यह कहना है ग्राम रोढ़ा जिला बैतूल की सफल महिला कृषक श्रीमती जयश्री पवार का।

श्रीमती पवार की परवरिश शुरू से ही ग्रामीण परिवेश में हुई। गांव की परवरिश ने उन्हें खेती-किसानी में रुचि पैदा कर दी। श्रीमती पवार ने अपनी ऊबड़-खाबड़ जमीन को खेती के लिये तैयार कर एक ट्यूबवेल लगवाया, इसके बाद उन्होंने पास में ही 10 एकड़ जमीन भी ठेके पर ली तथा उसमें गेहूँ एच.आई. 8498 तथा चना जे.जी. 311 लगाया और कृषि विभाग से सलाह-मशवरा के बाद उचित खाद व दवाईयों का उपयोग किया। श्रीमती पवार को पहले ही साल 20 क्विंटल प्रति एकड़ गेहूँ तथा 5 क्विंटल प्रति एकड़ चने का उत्पादन मिला। इस सफलता से उनमें नये उत्साह का संचार हुआ।

महिला कृषक श्रीमती पवार बताती हैं कि इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी आर्थिक स्थिति में साल दर साल सुधार आता गया। श्रीमती पवार ने उनके पास जो जमीन थी उससे लगी दो एकड़ जमीन और खरीदी और उसमें ट्यूबवेल लगाया। श्रीमती पवार बताती हैं कि कृषि विभाग की खेती संबंधी सलाह सही रूप में मानी जाये तो किसान को किसी भी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने भी परम्परागत फसलों के साथ-साथ कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के सहयोग से गन्ना की फसल लेने का मन बनाया तथा पूरे खेत में सिंचाई के लिये पाईप लाईन बिछाई। वे अब गन्ने का निरंतर उत्पादन ले रही हैं। अब उनकी 22 एकड़ जमीन में प्रतिवर्ष गन्ना लगता है। अब उन्होंने गुड़ बनाने की मशीन (घाना) भी खरीद लिया है।

आज उनकी पहचान आसपास के गांवों में प्रगतिशील महिला कृषक के रूप में होती है। उनका मानना है कि सूझबूझ से महिलाएं भी सफलतापूर्वक खेती कर सकती है।

मुकेश मोदी

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