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सफलता
की कहानी
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आदिवासी
छात्र
राजाराम
अब बन
सकेंगे
एम.बी.बी.एस
डॉक्टर
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भोपाल
: 20 अगस्त, 2010
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बैतूल
जिले के
आदिवासी
बहुल
चिंचौली
ब्लॉक के
ग्राम
असाड़ी के
मन्नासिंह
धुर्वे का
अपने बेटे
राजाराम
को मेडिकल
कॉलेज में
एडमिशन
दिलाने का
सपना पूरा
हो गया है।
उनके बेटे
राजाराम
ने इस वर्ष
की पी.एम.टी.
परीक्षा
में
उत्कृष्ट
स्थान
प्राप्त
कर
बुन्देलखण्ड
मेडिकल
कॉलेज
सागर में
दाखिला
लिया है।
मन्नासिंह
जड़ी-बूटी
से लोगों
का इलाज
किया करते
हैं। उनकी
इच्छा थी
कि उनका
बेटा एम.बी.बी.एस.
डॉक्टर बन
सके। वे
चाहते थे
कि उनका
बेटा
इंदौर-भोपाल
जैसे बड़े
शहरों में
मेडिकल की
कोचिंग ले,
लेकिन
उनकी
कमजोर
आर्थिक
स्थिति
उनकी इस
इच्छा के
सामने
आड़े आ गई।
उनके बेटे
राजाराम
को आदिम
जाति
कल्याण
विभाग
द्वारा
अनुसूचित
जाति-जनजाति
के
विद्यार्थियों
को बैतूल
जिला
मुख्यालय
में नि:शुल्क
कोचिंग
दिये जाने
के बारे
में
जानकारी
मिली।
उन्होंने
इस संबंध
में सहायक
आयुक्त
आदिम जाति
कल्याण से
सम्पर्क
किया।
सहायक
आयुक्त ने
राजाराम
की लगन को
देखते
हुये नि:शुल्क
कोचिंग
में
प्रवेश
लेने की
सलाह दी।
छात्र
राजाराम
ने तीन
महीने की
कोचिंग
में लगन के
साथ पढ़ाई
कर पी.एम.टी.
की
परीक्षा
अच्छे
अंकों से
पास की।
राजाराम
को कोचिंग
के दौरान 1500
रूपये की
किताबें
एवं
स्टेशनरी
नि:शुल्क
उपलब्ध
कराई गई।
सहायक
आयुक्त
श्री आर.के.
श्रोती ने
बताया कि
आदिम जाति
कल्याण
विभाग
द्वारा
संचालित
अनुसूचित
जाति एवं
आदिवासी
वर्ग के
विद्यार्थियों
को पी.एम.टी.
एवं पी.ई.टी.
की
परीक्षा
में शामिल
होने के
लिये
प्रतिवर्ष
जिला
मुख्यालय
पर तीन
महीने की
नि:शुल्क
कोचिंग
दिये जाने
की
व्यवस्था
की जाती
है।
कोचिंग
सेन्टर
में
संबंधित
विषय के
श्रेष्ठ
व्याख्याताओं
द्वारा
विद्यार्थियों
को कोचिंग
दी जाती
है।
आदिवासी
छात्र
राजाराम
बताते हैं
कि राज्य
शासन की नि:शुल्क
कोचिंग
व्यवस्था
से ही वे
मेडिकल
कॉलेज में
प्रवेश ले
सके हैं।
वे डॉक्टर
बनने के
बाद अपने
ही गाँव
में
आदिवासी
भाईयों का
इलाज करने
की इच्छा
रखते हैं।
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