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सफलता की कहानी

कपिलधारा कुएं से गर्मी में ठण्डक का एहसास 

रोजगार गारंटी से मिला रामकली को कुआं

बैतूल : 17 मई, 2010

रामकली और उनके बहनोई चिरोंजी को कपिलधारा कुंआ गर्मी में ठण्डक का एहसास करा रहा है। भीषण गर्मी में कुंये की सिंचाई से उपजी ककड़ी, खरबूजे की लहलहाती फसल दो परिवारों को ठण्डक दे रही है। संयुक्त परिवार में रहने वाली रामकलीबाई और उनके बहनोई चिरांेजी की तो मानो कुंये ने सारी तमन्नाये पूरी कर दी है। जहां रामकली के खेत में भरपूर अनाज उपजा वहीं कुंये के पानी का उपयोग कर उन्होंने ईंटे भी बना ली है। और तो और उनके बहनोई की जमीन भी कुंये के पानी से हरी-भरी होकर अनाज उपजाने के बाद ककड़ी, तरबूज उपजा रही है।

अजई गांव की रामकली बाई ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके पास खुद का कुंआ होगा। उनकी जमीन भरपूर अनाज उपजायेगी, जिससे साल भर खाने की जुगाड़ के साथ-साथ उनके जीवन की रंगत बदल जायेगी। रामकलीबाई के पास ढाई एकड़ जमीन तो थी पर उनकी बेबसी थी कि उनके पास सिंचाई का कोई साधन नही था। बरसात में तो इंन्द्र देव कभी-कभार उन पर मेहरबान हो जाते पर दीवाली के बाद खेत में कोई फसल पैदा नहीं होती। रामकली बाई के जीवन में बहार लेकर आयी रोजगार गारण्टी योजना। सिंचाई का कोई साधन नही होने से रामकली बाई को वर्ष 2008-09 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना से कपिलधारा कुंआ खुदवाया गया। सरकार ने उन्हें डीजल पंप भी दिया जिससे रामकली बाई को मिल गया भरपूर सिंचाई का साधन।

इस साल रामकली बाई की जमीन में बीस क्विंटल से ज्यादा गेंहू की पैदावार हुई। उन्होंने कुंये के पानी का भरपूर लाभ लिया और बीस हजार ईंटे भी बना ली। कुंये की सिंचाई से रामकली बाई को करीब पचास हजार रूपये की आमदनी हुई है। रामकली बाई के साथ-साथ उनके बहनोई चिरोंजी ने भी कुंये का भरपूर फायदा लिया। जिससे चिरोंजी के खेत में इस साल बीस-पच्चीस क्विंटल गेंहूं की पैदावार हुई है। अब चिरांेजी ने आधा एकड़ जमीन में ककड़ी, तरबूज की फसल बोयी है, जिससे पन्द्रह से बीस हजार रूपये की फसल होने की उम्मीद है।

रामकली बाई के पति रतनलाल बताते है कि गरीबी के कारण वह आठवी तक ही पढ़ाई कर पाया। कुंये से अब उनकी आमदनी बढ़ गयी है। एक ही लड़का है जिसे वे अच्छे से पढ़ा लिखा सकते है। कुंये में इतना पानी रहता है कि हम अपनी फसल के साथ-साथ और लोगों की फसल के लिए भी पानी दे देते है। कुयें की बदौलत उनके जीवन की रंगत बदल गई है।

आर.एस. पाराशर

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