|
सफलता
की कहानी
|
|
हिम्मत
के
मुकाबले
गरीबी हार
गई
|
|
|
|
|
भोपाल
: 12 जुलाई, 2010
|
|
|
आज
जब परिवार
की सीमित
आमदनी
होने के
कारण
परिवार का
भरण-पोषण
करना कठिन
हो रहा है
और ऐसे समय
में
परिवार के
सामने समय-समय
पर अनेक
दिक्कते
खड़ी होती
जा रही
हैं। ऐसी
दिक्कतों
का सामना
सिवनी
जिले की
लखनादौन
तहसील के
ग्राम
मकरझिर
सनाई
डोंगरी की
श्रीमती
भारती
डेहरिया
भी कर रही
थीं।
लेकिन
उनकी
हिम्मत के
आगे गरीबी
ने घुटने
टेक दिये।
उनके
परिवार
में आमदनी
करने वाले
केवल उनके
पति थे।
उनके पति
द्वारा
साइकिल से
आस-पास के
गाँवों
में फेरी
लगाने के
बाद भी
इनती
आमदनी
नहीं हो
पाती थी कि
जिससे
उनके
परिवार की
अच्छे
तरीके से
गुजर-बसर
हो सके।
भारती
डेहरिया
परिवार की
आमदनी
बढ़ाने के
लिये कुछ
करना
चाहती थी।
इस संबंध
में
उन्होंने
गाँव के
जनप्रतिनिधियों
से चर्चा
की। चर्चा
के बाद
उन्हें
जिला
अन्त्यावसायी
समिति
द्वारा
संचालित
योजनाओं
की
जानकारी
मिली।
अनुसूचित
जाति वर्ग
की भारती
ने इस
संबंध में
मुख्य
कार्यपालन
अधिकारी
जिला
अन्त्यावसायी
समिति से
चर्चा की।
भारती
डेहरिया
का मकान
सिवनी से
गुजरने
वाले
राष्ट्रीय
राजमार्ग
क्रमांक
सात पर था।
चर्चा के
बाद
उन्हें
राजमार्ग
के करीब
मनिहारी
की दुकान
चलाने की
सलाह दी
गई। भारती
ने घर में
चर्चा
करने के
बाद दुकान
खोलने का
निर्णय
लिया।
उन्हें
राष्ट्रीय
अनुसूचित
जाति
वित्त एवं
विकास
निगम की
महिला
समृद्धि
योजना में 25
हजार
रूपये के
ऋण की
मंजूरी
मिल गई। ऋण
के साथ
उन्हें 10
हजार
रूपये का
अनुदान भी
मिला।
आज
भारती
दुकान का
संचालन
कुशलतापूर्वक
कर रही
हैं।
उन्होंने
अपनी ऋण
राशि का
भुगतान भी
कर दिया
है। अब वे
अपनी
दुकान को
और बढ़ाना
चाहती
हैं।
भारती का
सोचना है
कि हिम्मत
से काम
करने के
बाद सफलता
अवश्य
मिलती है।
वे अपने
गाँव की
अन्य
महिलाओं
को भी
स्वरोजगार
शुरू करने
की समझाईश
भी देती
हैं।
|