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शिवपुरी
जिले के
किसानों
का तुलसी
की खेती की
ओर बढ़ता
रुझान
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शिवपुरी
: 03 मई, 2010
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जिले
के
किसानों
ने अपनी
लग्न,
मेहनत एवं
शासन की
योजनाओं
का लाभ
लेकर कृषि
एवं
उद्यानिकी
के
क्षेत्र
में जिले
को एक नई
पहचान दी
है। अब
शिवपुरी
जिले के
किसान
परम्परागत
फसलों के
साथ-साथ वन
औषधि खेती
के प्रति
रूचि ले
रहे है।
जिले
के 20
ग्रामों
के लगभग 300
किसानों
ने 60
हेक्टेयर
क्षेत्र
में वन
तुलसी के
रूप में
खेती लेना
शुरू कर दी
है।
शिवपुरी
जिले के
सिंहनिवास,
अमरपुर,
गोपालपुर,
मुढेंरी
जैसे
अनेकों
ग्रामों
के
किसानों
का रूझान
अब
परम्परागत
खेती के
साथ-साथ वन
तुलसी की
खेती की ओर,
बढ रहा है।
इन
ग्रामों
के
किसानों
ने
उद्यानिकी
विभाग के
सहयोग से
निःशुल्क
वन तुलसी
के बीज के
मिनिकिटस
लेकर अपने
खेतों में
तुलसी की
खेती करना
शुरू किया
है। जिले
में
प्रयोग के
तौर पर
प्रथम
वर्ष में
शुरू की गई
वन तुलसी
की खेती से
लगभग 12
क्विंटल
वन तुलसी
की
पैदावार
हुई है।
जिले
के ग्राम
सिंहनिवास
के
प्रगतिशील
एवं युवा
किसान
श्री भारत
सिंह ने
अपने
खेतों में
गेहॅू, चना,
सरसो,टमाटर
के अलावा
पहली बार
हल्दी के
साथ-साथ वन
तुलसी की
खेती ली।
श्री सिंह
ने बताया
कि
उघानिकी
विभाग के
सहयोग एवं
मार्गदर्शन
से उसने
पहली बार
तुलसी की
खेती की
है। तुलसी
के
उत्पादन
का सही
मार्केट
मिले तो यह
खेती
परम्परागत
खेती की
अपेक्षा
अधिक
मुनाफे की
साबित
होगी। इसी
गांव के
बलराम,
सरवन,
बादाम
सिंह,
श्याम
सिंह,
देवेन्द्र,
कैलाश,
दिनेश,
हल्के राम
जाटव,
सुरेश
आदिवासी
और हरि
जाटव जैसे
कई
किसानों
का रूझान
भी वन
तुलसी की
खेती की ओर
बढा है।
सहायक
संचालक
उद्यान
श्री आर.एस.
सेंगर ने
बताया कि
विभाग ने
पहली बार
जिले में
औषधि
विकास
कार्यक्रम
के तहत
प्रत्येक
विकासखण्ड
में 70
किसानों
को 6 हजार (सेंटीकम
ओसियम)
नामक
प्रजाति
की वन
तुलसी के
बीज के
निःशुल्क
मिनिकिटस
प्रदाय
किये गये।
वन तुलसी
के बीज
खेतों में
नबम्बर
एवं
दिसम्बर
माह में
बोये जाते
है, यह
तुलसी
फरवरी एवं
मार्च में
पक जाने पर
काट कर
इसके
बीजों को
एकत्रित
कर लिया
जाता है।
उन्होने
बताया कि
इस
कार्यक्रम
का मुख्य
उद्देश्य
किसानों
में तुलसी
एवं औषधि
खेती के
प्रति
रूझान
पैदा कर,
कृषि के
क्षेत्र
में कम
लागत में
अधिक
उत्पादन
लेना है।
उन्होने
बताया कि
जिले में
इस वर्ष वन
तुलसी के 7
हजार
मिनिकिटस
किसानों
को देने का
लक्ष्य
रखा गया
है। वन
तुलसी की
मार्केटिंग
हेतु
संबंधित
किसानों
को विभाग
के मैदानी
कर्मचारियों
के माध्यम
से प्रदेश
की मंदसौर
एवं नीमच
औषधि
फसलों की
मण्डी में
अपना
उत्पाद
बेचने की
सलाह दी गई
है।
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