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सफलता की कहानी

डिजीटल स्टुडियो से बदली तकदीर 

भोपाल : 07 जून, 2010

मन में कुछ कर दिखाने का जज्बा ही उत्साह से भरे दिखने वाले 30 वर्षीय सुनील शर्मा की पे्ररणा का आधार है। शहडोल के एक मध्यम वर्गीय परिवार में जनमें सुनील ने कभी सपने में भी न सोचा था कि इतनी जल्दी एक दिन वे एक सफल व्यवसायी बन जाएंगे, लेकिन इस शांत, अध्ययनशील लड़के ने 6 साल पहले जब बी.ए. किया, उसने एक ही महत्वाकांक्षा पाली थी व्यवसायी बनने की।

सुनील ने अपने स्वभाव के अनुकूल शिक्षा के मूल्य को कम आंकना और अपनी सफलता का श्रेय अपनी प्रवृत्ति को देना कभी उचित नहीं समझा। लेकिन छोटे- से लेकिन महत्वपूर्ण कारोबार वाले डिजीटल स्टुडियो के संचालक सुनील ने हमेशा ऐसा रास्ता अपनाया है, जिस पर लोग बहुत कम चलते हैं। उन्होंने कैरियर के लिए नौकरी के बारे में कभी नहीं सोचा। उन्होंने कालेज की शिक्षा और फिर उसके बाद फोटोग्राफी एवं डिजीटल वर्क का प्रशिक्षण लेने के बाद तुरंत कारोबार करने का फैसला कर लिया था। मगर कैरियर शुरू करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। उन्होंने राज्य सरकार के जिला उद्योग केन्द्र के अधिकारियों से व्यवसाय हेतु अग्रिम वित्तीय मदद दिलाने का आग्रह किया, जिसके लिए वे तुरंत तैयार हो गये।

सन् 2006 में सरकार की प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत मिली 98 हजार रूपये की वित्तीय मदद से एक डिजीटल स्टुडियो की स्थापना कर उन्होंने अपने सपने को साकार करना शुरू कर दिया। उस समय जो काम छोटे पैमाने के रूप में शुरू हुआ था, उसने आज शहडोल जिले में फिल्मरोल, कैसेट, फोटो एलबम आदि की थोक विक्री की एक प्रमुख फर्म का रूप ले लिया है और उसकी संभागीय उपस्थिति बढ़ती जा रही है। सुनील के लिए उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उनके जिले के लोगों ने उनके प्रबंधन कौशल को स्वीकार करते हुए उसकी सराहना की है। सुनील के परिवार की जीवन रेखा बन चुका डिजीटल स्टुडियो हरसाल डेढ़ लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा दे रहा है। सुनील ने स्टुडियो से आमदनी होते ही अपने सभी रूके काम, भाई की शादी, स्टुडियो में दो कमरों का नव निर्माण, स्टुडियो की साज-सज्जा एवं शो रूम का निर्माण, एक स्कूटी एवं एक मोटर साइकिल की खरीद के साथ अंतिम किस्त छोड़कर बैंक का उधार भी चुका दिया है। अंतिम किस्त भी शीघ्र अदा करने जा रहे हैं। आज उनके पास तीन व्हीडियो कैमरा, दो फोटो कैमरा और दो कम्प्यूटर हैं।

सुनील का कारोबार जिले भर में फैला हुआ है। आज वे स्वयं दूसरों को रोजगार दे रहे हैं। सीजन में उन्हें आठ से दस लोग काम पर रखना पड़ते हैं। उन्होंने कारोबार में इजाफा करने के लिए स्टुडियो में प्रोफेशनल फोटोग्राफी प्रशिक्षण कोर्स की शुरूआत की है। देखा जाए, तो कारोबार को सफल बनाना कोई मामूली काम नहीं था। सुनील ने खूब मेहनत की। अंततः उनके प्रयास रंग लाए और उनके कारोबार का नेटवर्क इस कदर बढ़ गया है कि आज उनके पास बड़ी संख्या में नियमित ग्राहक हैं। बड़ी कामयाबी के चोखे स्वाद के बारे में सुनील कहते हैं, ''मैं शुरू से कारोबार में काम करना चाहता था। मुझे लगता था कि नौकरी के पीछे भागने की बजाय कारोबार का रास्ता अपनाना मुनासिब है। ''वह बताते हैं, ''विविधता कारोबार की सफलता के सूत्र हैं। कारोबार के विस्तारीकरण की भूमिका कारगर हुई है।''

सुनील आम लोगों के लिए सरकारी योजनाओं को लाभदायक बताते हुए कहते हैं,'' जो काम करना चाहते हैं, उनके लिए कोई भी योजना फायदेमंद हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने योजना के मिले पैसे को ही डुबो दिया। कोई भी काम मन लगाकर किया जाए तो सफलता हासिल करना मुश्किल नहीं होता।'' अपने काम के प्रति समर्पित सुनील सुबह से ही अपना काम शुरू कर देते हैं और उनका काम रात्रि 11 बजे तक चलता है। सुनील के मुताबिक, ''असली उद्यमी वह व्यक्ति है, जिसमें सकारात्मक उत्सुकता हो, जो बहुआयामी सोच रखता हो।''

जे.पी. धौलपुरिया

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