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सफलता
की कहानी
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विकलांग
रामप्रसाद
को मिली
अपनी
व्यवसाय
में सफलता
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भोपाल
: 05 अगस्त, 2010
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मन
में हौसला
हो तो कठिन
से कठिन
काम और
बड़े से
बड़े काम
हो जाते
हैं। ऐसा
ही कुछ कर
दिखाया है
विदिशा
जिले के
ग्राम
जीरापुर
के
रामप्रसाद
चिढ़ार
ने।
अनुसूचित
जाति वर्ग
के
विकलांग
रामप्रसाद
काफी समय
तक मजदूरी
कर अपना
जीवन यापन
कर रहे थे।
कभी-कभी तो
उनकी
विकलांगता
मजदूरी
दिलाने
में आड़े आ
जाया करती
थीं।
परिवार के
सदस्यों
की इच्छा
थी कि
रामप्रसाद
अपना
स्वयं का
छोटा
व्यवसाय
प्रारंभ
करें।
निर्धन
परिवार से
संबंध
रखने वाले
रामप्रसाद
के सामने
पूँजी का
होना भी एक
समस्या
थी।
उन्होंने
अपने
व्यवसाय
प्रारंभ
करने के
संबंध में
अपने
परिचितों
से बातचीत
की।
बातचीत के
दौरान ही
उन्हें
अंत्यावसायी
कार्यालय
की
स्वरोजगार
योजना के
संबंध में
जानकारी
मिली।
रामप्रसाद
ने स्वयं
का रोजगार
प्रारंभ
करने के
संबंध में
विदिशा
जिला
अंत्यावसायी
कार्यालय
के मुख्य
कार्यपालन
अधिकारी
से किराना
दुकान
खोले जाने
के बारे
में चर्चा
की। मुख्य
कार्यपालन
अधिकारी
ने
रामप्रसाद
की लगन एवं
विश्वास
को देखकर
योजना की
विस्तृत
जानकारी
दी।
रामप्रसाद
को
प्रारंभ
में केवल 10
हजार
रूपये का
ऋण और
अनुदान
राशि
प्राप्त
हुई।
रामप्रसाद
ने छोटी
पूँजी से
अपने घर की
करीब में
ही किराना
दुकान
शुरू की।
उनके
अच्छे
व्यवहार
के कारण
धीरे-धीरे
किराना
दुकान
चलने लगी।
अंत्यावसायी
कार्यालय
के
अधिकारियों
ने
रामप्रसाद
की सफलता
को देखा तो
उन्हें 50
हजार
रूपये का
ऋण बैंके
से ओर
दिलाया
गया।
रामप्रसाद
को पहले
जहां
मजदूरी के
लिये
दिनभर
भटकना
पड़ता था
आज वे
सम्मान के
साथ अपनी
किराना
दुकान चला
रहे हैं।
रामप्रसाद
नियमित
रूप से
बैंक ऋण की
किस्त को
अदा करना
नहीं
भूलते
हैं।
रामप्रसाद
आज अपने
गाँव में
अन्य
लोगों के
लिये भी
प्रेरणा
स्त्रोत
बन गये
हैं।
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