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सफलता की कहानी

सुलेखा बाई को पहचान मिली एक सफल डेयरी व्यवसायी के रूप में

भोपाल : 03 मई, 2010

देवनगर, गोटेगांव जिला नरसिंहपुर की श्रीमती सुलेखा बाई अब सफलतापूर्वक डेयरी चला रही हैं। सुलेखा बाई अब गर्व के साथ बताती हैं कि उन्होंने कभी भी नहीं सोचा था कि वे एक दिन स्वयं के व्यवसाय के रूप में डेयरी का संचालन करेंगी।

सुलेखा बाई और उनके पति द्वारका प्रसाद गांव में ही कृषि मजदूरी कर अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहे थे। कभी-कभी तो उनके सामने मजदूरी न मिलने के कारण परिवार चलाने का संकट सामने खड़ा हो जाता था। दिन पर दिन बढ़ते आर्थिक संकट को देखते हुए वे अपना छोटा-मोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते थे। इस संबंध में उन्होंने अपने परिचितों से भी चर्चा की।

अनुसूचित जाति वर्ग के द्वारका को एक दिन राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम द्वारा संचालित योजना की जानकारी मिली। इस संबंध में उन्होंने नरसिंहपुर में जिला अंत्यावसायी कार्यालय में सम्पर्क किया। सारी औपचारिकताओं के बाद उन्हें डेयरी व्यवसाय के लिये डेढ़ लाख रुपये के ऋण की मंजूरी मिली। इस राशि से उन्होंने चार अच्छी नस्ल की भैंस खरीदीं। इसके बाद सुलेखा बाई ने भी कंधे से कंधा मिलाकर भैंसों की देखभाल शुरू की। आज वे अपने घर में ही सफलतापूर्वक डेयरी चला रही हैं। उनके पति द्वारका प्रसाद दूध बेचने नजदीक के ही शहर गोटेगांव नियमित रूप से जाते हैं। आजकल उन्हें सब खर्च हटाकर 300 रुपये प्रतिदिन की आमदनी प्राप्त हो रही है।

सुलेखा बाई बताती हैं कि वे अपने डेयरी व्यवसाय को और बढ़ाना चाहती हैं। इस संबंध में उन्होंने नजदीक के बैंक से दोबारा सम्पर्क किया है।

मुकेश मोदी

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