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सफलता की कहानी

अब वे ट्रेनर भी हैं

भोपाल : 01 अक्टूबर, 2010

अनूपपुर जिले के जैतहरी विकासखण्ड के कई गांव बेहतर किस्म के कालीन बुनने के लिये जाने जाते हैं। उन्हीं में से एक गांव है बम्हनी। आदिवासी वर्ग की ऐसी अनेक महिलाएं हैं जो कालीन निर्माण कार्य से जुड़ी हुई हैं। माधवी, उर्मिला, नानबाई, श्यामवती की पहचान ट्रेनर के रूप में भी होती है।

इस गांव की आदिवासी वर्ग की महिलाएं अपने परिवार का खर्चा चलाने के लिये खेतों में मजदूरी का कार्य करती थीं। मजदूरी में अनिश्चितता के कारण इनकी आमदनी भी प्रभावित होती थी। जैतहरी विकासखण्ड में एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के तहत आदिवासी महिलाओं को कालीन निर्माण का प्रशिक्षण दिये जाने का निर्णय लिया गया। आदिवासी महिलाओं को प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान आमदनी होने की वजह को परिवार की दिक्कत के रूप में बताया। एकीकृत आदिवासी परियोजना के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें 500 रुपये प्रतिमाह की दर से आर्थिक सहयोग दिया जायेगा।

आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित एकीकृत आदिवासी परियोजना की पहल पर 20 महिलाओं को कालीन निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान उनके द्वारा बनाये गये कालीन हस्तशिल्प विकास निगम द्वारा वाज़िब दाम पर खरीदे गये। कालीन की बिक्री से इन महिलाओं के हौसले बुलंद हुए।

प्रशिक्षण के बाद कुछ महिलाओं ने आदिवासी वर्ग की अन्य महिलाओं को कालीन निर्माण से जुड़ने के लिये राजी किया। आज जैतहरी विकासखण्ड के अनेक गांवों में कालीनों का निर्माण किया जा रहा है। एकीकृत आदिवासी परियोजना में स्व-रोजगार के इस कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मुकेश मोदी   

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