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अदरक
ने बदली
किसानों
की तकदीर
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भोपाल,
शुक्रवार, 27 नवम्बर, 2009
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सागर
जिले के
ऐसे अनेक
क्षेत्र
हैं जहां
किसानों
ने
परम्परागत
फसलों के
साथ-साथ
सफलतापूर्वक
अदरक की
खेती की
है।
सागर
जिले के
केसली,
देवरी,
राहतगढ़
और
जेसीनगर
क्षेत्र
के किसान
सोयाबीन
या अन्य
मौसमी
फसलों पर
ही निर्भर
नहीं हैं।
आज वे अदरक
की
सफलतापूर्वक
खेती कर
रहे हैं।
उद्यानिकी
विभाग के
तकनीकी
अधिकारी
श्री आर.डी.
चौबे
बताते हैं
कि जिले
में पिछले
पांच
सालों में
अदरक की
खेती का
रकबा दो से
ढाई गुना
तक बढ़ गया
है। जिले
में यह
रकबा पहले
लगभग 350
हेक्टेयर
था जो
बढ़कर 800
हेक्टेयर
हो गया है।
केसली
क्षेत्र
के डोमा
जैतपुर के
किसान 200
हेक्टेयर
क्षेत्र
में अदरक
की खेती कर
रहे हैं।
कृषक
उत्तम
सिंह
कुर्मी
अपनी बंजर
जमीन पर
साल भर में
बमुश्किल
अपने
परिवार के
लिये खाने
का अनाज
पैदा कर
पाते थे।
उन्होंने
उद्यानिकी
विभाग की
सलाह के
बाद अदरक
की फसल
लगाई। इसी
तरह डोमा
जैतपुर के
किसान
मलखान
पटेल ने भी
अपने खेत
में
सफलतापूर्वक
अदरक की
खेती की।
इस
क्षेत्र
के ऐसे
अनेक
किसान हैं
जो
सफलतापूर्वक
अदरक की
खेती कर
रहे हैं और
यहां अदरक
का
उत्पादन
प्रति
हेक्टेयर 150
से 200
क्विंटल
के लगभग
है। जिले
के
ज्यादातर
किसान
सुरुचि,
सुरभि और
सुप्रभा
वेरायटी
का उपयोग
कर रहे
हैं। इस
क्षेत्र
के किसान
अदरक की
फसल को
विक्रय के
लिये
राज्य के
बाहर
रायपुर,
उत्तरप्रदेश
के नगरों
एवं
दक्षिण
भारत के
नगरों तक
भेज रहे
हैं। इन
किसानों
को अदरक के
ऊँचे दाम
मिल रहे
हैं।
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