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जागरूक
कृषक
भेरूसिंह -
वैज्ञानिक
तकनीकी से
हुआ
मालामाल
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झाबुआ,
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2009
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झाबुआ
जिले की
तहसील
पेटलावाद
निवासी
जागरूक
कृषक श्री
भेरूसिंह
ने खेती
में
आधुनिक
वैज्ञानिक
तकनीकी को
अपनाकर
जिले में
अपनी अलग
पहचान बना
ली है।
उन्हें आज
वैज्ञानिक
तकनीकी से
परंपरागत
फसलें एवं
सब्जियों
के
उत्पादन
से 20.2
हेक्टेयर
कृषि भूमि
से
प्रतिवर्ष
औसत 20 से 25
लाख रूपये
की आय होने
लगी है।
जिसके
कारण उनका
परिवार
खुशहाल
एवं
सम्पन्न
हो गया है।
ग्राम
पालेड़ी
के इस कृषक
श्री
भेरूसिंह
ने सन् 1972
में अपनी
चार
हेक्टेयर
भूमि में
अपने चार
बेटों की
मदद से
आधुनिक
वैज्ञानिक
तकनीक को
अपनाकर
अनाज की
फसलों एवं
सब्जियों
की खेती
करना शुरू
किया था।
आधुनिक
खेती में
उन्होंने
परंपरागत
फसलों के
स्थान पर
संकर
फसलें एवं
सब्जियों
की खेती को
उन्नत
कृषि
उपकरणों
के साथ
अपनाया।
खेती के
साथ
उन्होंने
पशुपालन
कार्य भी
किया।
जिसके
माध्यम से
बायोगैस
संयंत्र
की
स्थापना
कर उससे
प्राप्त
ईंधन से
खाना
पकाने के
साथ
सिंचाई
पम्प भी
चलानें
लगे हैं और
बायोगैस
से
प्राप्त
गोबर का
जैविक खाद
के रूप में
उपयोग
अपने
खेतों में
करके
ज्यादा
फसल
उत्पादित
कर रहे
हैं।
आधुनिक
वैज्ञानिक
तकनीकी से
खेती करने
के कारण आज
भेरूसिंह
के पास
स्वयं की 20.2
हेक्टेयर
कृषि भूमि
होने के
साथ स्वयं
का एक
फार्म
हाउस,
गोदाम, दो
ट्रेक्टर-ट्राली
के साथ
अनेक
उन्नत
कृषि
उपकरण,
डीजल एवं
सबमर्सीसेनिल
पम्पों के
अलावा 20
किलोवाट
का जनरेटर
सेट भी
उपलब्ध
है।
चर्चा
के दौरान
श्री
भेरूसिंह
ने बताया
कि वे अपने
खेतों में
परंपरागत
सोयाबीन,
मक्का,
मूंग-उड़द,
मूंगफली,
कपास,
गेहूँ, चना
की फसलें
लेने के
साथ ही
सब्जियों
की आधुनिक
ढंग से
खेती करते
है।
सब्जियों
में मुख्य
रूप से वे
टमाटर,
बैगन,
प्याज,
अदरक, अरबी,
कद्दू
वर्गीय
सब्जियां,
धनियां
आदि की
संकर
किस्में
लगाते है।
उनके
द्वारा
उत्पादित
सब्जियां
दिल्ली,
भोपाल,
अहमदाबाद,
बड़ोदरा,
गोधरा,
भीलवाड़ा
आदि
स्थानों
की
मण्डियों
में
विक्रय के
लिये जाती
हैं।
उन्होंने
पशुपालन
के
अंतर्गत 10
भैंसे एवं 8
गायें
पाली हैं
जिनसे
प्रतिदिन
औसत 40 से 50
लीटर दूध
का
उत्पादन
होता है,
जिससे वे
अपनी
स्वयं की
डेयरी
चलाते
हैं।
वैज्ञानिक
रूप से
खेती करने
के कारण
भेरूसिंह
के परिवार
को
प्रतिवर्ष
लगभग 20 से 25
लाख रूपये
की आय हो
जाती है।
जिसके
कारण उनका
परिवार अब
जागरूक
समृद्ध
परिवारों
की श्रेणी
में गिना
जानें लगा
हैं।
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