मध्यप्रदेश योग नीति (दिनांक 25.01.2007)
योग मनुष्य के शारीरिक, मानसिक तथा बौद्धिक विकास की उस पद्धति का नाम है, जो सदियों के अनुसंधान के बाद विकसित हुई। यह सर्वविदित है कि योग का अनुकूल प्रभाव मनुष्य के शरीर तथा मन पर पड़ता है, जो उसके मानसिक तथा शारीरिक दोषों को दूर करने में सहायक होता हे। योग का लाभ जनसमान्य तक पहुंचे इसके लिए उसके व्यापक प्रचार-प्रसार, शिक्षण तथा प्रशिक्षण की आवष्यकता है। मध्यप्रदेश शासन योग के संबंध में जनसामान्य में जागृति तथा सक्रियता बढ़ाने के लिए कटिबद्ध है। इस उद्देश्य की पूतिर् के लिए निम्नलिखित कार्यवाही की जावेगी :-
1. प्रदेश में योग परिषद का गठन किया जायेगा। 2. योग को शिक्षण संस्थाओं के शारीरिक शिक्षा के पाठ्यक्रम मे सम्मिलित किया जायेगा। 3. योग के प्रभावी प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षकों का चयन एवं उनके प्रशिक्षण की समयबद्ध व्यवस्था की जायेगी। 4. योग को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रदेश में नियमित रूप से वृहद आयोजन किये जायेंगे। 5. योग प्रचार-प्रसार एवं प्रशिक्षण कार्य में लगी ख्यातिलब्ध संस्थाओं को प्रदेश में योग केन्द्र स्थापित करने के लिए आवश्यक सुविधाएं दी जाएंगी। इन संस्थाओं का शासन के योग प्रचार-प्रसार के प्रयासों में योगदान लिया जावेगा। 6. राज्य स्तर पर योग को लोक प्रिय बनाने तथा उसके व्यापक प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए राज्यस्तर पर एक लाख रूपये के पुरूस्कार की स्थापना की जायेगी।
1. प्रदेश में योग परिषद का गठन किया जायेगा।
2. योग को शिक्षण संस्थाओं के शारीरिक शिक्षा के पाठ्यक्रम मे सम्मिलित किया जायेगा।
3. योग के प्रभावी प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षकों का चयन एवं उनके प्रशिक्षण की समयबद्ध व्यवस्था की जायेगी।
4. योग को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रदेश में नियमित रूप से वृहद आयोजन किये जायेंगे।
5. योग प्रचार-प्रसार एवं प्रशिक्षण कार्य में लगी ख्यातिलब्ध संस्थाओं को प्रदेश में योग केन्द्र स्थापित करने के लिए आवश्यक सुविधाएं दी जाएंगी। इन संस्थाओं का शासन के योग प्रचार-प्रसार के प्रयासों में योगदान लिया जावेगा।
6. राज्य स्तर पर योग को लोक प्रिय बनाने तथा उसके व्यापक प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए राज्यस्तर पर एक लाख रूपये के पुरूस्कार की स्थापना की जायेगी।