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प्रत्येक
ग्राम में,
पंचायत को
कम से कम खो-खो,
कबड्डी,
कुश्ती
एवं
व्हॉलीवाल
आदि
ग्रामीण
खेलों के
लिए एक खेल
मैदान
चरणबद्ध
तरीके से
आगामी 5
वर्षों
में तैयार
करना।
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आगामी
5 वर्षों
में 3 लाख से
अधिक
आवादी
वाले जिला
मुख्यालय
पर कम से कम
एक
परिपूर्ण
खेल परिसर
का
निर्माण
करना। इस
हेतु ऐसे
जिले भी
चिन्हित
कर लिये
गये है।
-
प्रत्येक
5000 से अधिक
आबादी
वाले
गांवों
में आगामी
पाँच
वर्षों
में
चरणबद्ध
तरीके से
खेल
मैदानों
पर
व्यायाम
शिक्षक की
व्यवस्था
की
जावेगी।
इस हेतु 38
गांवों को
चिन्हित
किया गया
है। तथा इन
गांवों
में मैदान
निर्माण
करवाने
संबंधी
आवश्यक
निर्देश
भी जारी कर
दिये गये
है।
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राष्ट्रीय
खेलों में
किए गए
प्रदर्शन,
प्राप्त
पदकों तथा
खेल
सुविधाओं
की
वर्तमान
में
उपलब्धता
को ध्यान
में रखते
हुए
जीतनेज
खेलों पर
ध्यान
केन्द्रित
किया
जाएगा।
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आदिवासी
क्षेत्रों
में
कबड्डी,
रस्साकसी,
तेज दौड़
तथा
उँचीकूद,
कुश्ती,
व्हॉलीवाल
तथा
धनुविर्द्या
जैसे
खेलों में
अन्तरग्राम
पंचायत
प्रतियोगिताएं
आयोजित की
जावेगी।
इसके लिए
आदिम जाति
कल्याण
विभाग
राशि देने
को तैयार
है।
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प्रदेश
के समस्त
जिलों में
वहां
प्रचलित
खेलों को
चयनित कर
कम से कम एक
प्रशिक्षक
की
व्यवस्था
संविदा
आधार पर की
जावे।
-
ऐसे
खिलाड़ी
जो
महत्वपूर्ण
राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय
प्रतियोगिता
में
प्रतिनिधित्व
करने के
कारण उन
तिथियों
में
वार्षिक
परीक्षा
में बैठने
से चूक गए
हो, उनके
लिए विशेष
परीक्षा
आयोजित की
जाएगी।
-
स्कूल
शिक्षा
एवं आदिम
जाति
कल्याण
विभाग के
स्कूलों
में
संविदा
शिक्षकों
की भर्ती
में खेलों
में
प्रावीण्यता
रखने वाले
खिलाड़ियों
को 5 से 10
प्रतिशत
तक का
प्राप्तांकों
में
अधिभार
देने हेतु
विभागीय
भर्ती
नियमों
में
आवश्यक
संशोधन
किए
जावेंगे।
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खेल
प्रोत्साहन
मद में
स्थापना
की जाएगी
तथा इस
हेतु
राज्य
शासन
द्वारा 4
किश्तों
में रू. 50.00
लाख प्रति
वर्ष के
मान से रू. 2.00
करोड़ का
अतिरिक्त
प्रावधान
किया
जाएगा। इस
हेतु
वित्त
विभाग को
अनुपूरक
अनुमान
में राशि
देने हेतु
अनुरोध
किया जा
रहा है।
-
व्यावसायिक
पाठ्यक्रमों
में
प्रवेश :
व्यवसायिक
महाविद्यालय
जैसे
चिकित्सा,
इन्लीनियरिंग
आदि में
ऐसे
खिलाड़ियों
के लिए
जिन्होंने
अधिकृत
राष्ट्रीय
जूनियर/सीनियर
स्तर पर
राज्य का
प्रतिनिधित्व
करते हुए
विगत तीन
वर्षो में
स्वर्ण,
रजत अथवा
कांस्य
पदक
प्राप्त
किया हो,
उनकों
प्राप्तांकों
पर क्रमश: 10, 6
एवं 4
प्रतिशत
का अधिभार
दिया
जावेगा।
यह लाभ
खिलाड़ी
को सिर्फ
एक ही बार
प्रदान
किया
जावेगा।
इस संबंध
में भी
कार्यवाही
प्रारंभ
कर दी गई
है।
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जिला
खेल एवं
युवक
कल्याण
अधिकारियों
को
पर्याप्त
बुनियादी
सुविधाएं
मुहैया
कराने का
प्रयास
किया
जावेगा।
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क्रीडा
परिषद को
परिवर्तित
कर
मध्यप्रदेश
खेल
प्राधिकरण
गठित किया
जाएगा।
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भोपाल
की बड़ी
एवं छोटी
झीलों को
जलक्रीड़ा
का मुख्य
केन्द्र
बनाया
जावेगा।
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ट्रेकिंग
रॉक
क्लाइम्बिंग
पैरासेलिंग
आदि
साहसिक
गतिविधियों
का जिला
स्तर पर
विकास
किया
जावेगा।