| 4. |
औद्योगिक
अधोसंरचना
के विकास
हेतु
आने
वाली
वित्तीय
कठिनाइयों
को दूर
करने
के लिए
"इंडस्ट्रीयल
इन्फास्ट्रक्चर
डेव्हलपमेंट
फण्ड"
की स्थापना
की जाएगी
। इस
कोष
में
रुपये
10 करोड़
राशि
प्रतिवर्ष
की दर
से आगामी
पांच
वर्षों
में
उपलब्ध
कराई
जाएगी
। यह
राशि
रिवाल्विंग
फण्ड
के रूप
में
उपयोग
में
लाई
जायेगी। |
| 5. |
औद्योगिक
क्षेत्रों
व औद्योगिक
विकास
केन्द्रों
में
दोहरी
कर प्रणाली
समाप्त
कर औद्योगिक
क्षेत्रों
/ विकास
केन्द्रों
का संधारण,
रखरखाव
जनभागीदारी
एवं
स्वशासी
समितियों
द्वारा
किया
जाएगा
। इस
उद्देश्य
से मध्यप्रदेश
नगरपालिका
अधिनियम
1961, म.प्र.
नगर
पालिक
निगम
अधिनियम
1956 तथा
पंचायत
अधिनियम
1993 में
उपयुक्त
संशोधन
कर औद्योगिक
क्षेत्रों
के लिये
विनिर्दिष्ट
प्रयोजन
जैसे
- संपत्ति
कर से
संबंधित
प्रावधानों,
संपत्ति
के अंतरण
पर देय
शुल्क,
जल निकासी,
भवन
नियंत्रण,
सार्वजनिक
सुविधाओं
इत्यादि
के लिये
शक्तियों
एवं
दायित्वों
को इन
समितियों
को सौंपा
जाएगा। |
| 6. |
प्रतिस्पर्धात्मक
लाभ
के लिए
स्थानीय
कच्चे
माल,
कुशल
कर्मचारियों
एवं
बाजार
की उपलब्धता
को ध्यान
में
रखते
हुए
क्लस्टर
के रूप
में
ऐसे
प्रमुख
तथा
सहायक
उद्योगों
का विकास
किया
जाएगा।
इन क्लस्टर्स
के नाभीकीय
केन्द्र
एवं
क्लस्टर
निम्नानुसार
होंगे
:- |
|
इंदौर |
- |
फार्मास्यूटिकल,
टैक्सटाइल,
खाद्य
प्रसंस्करण,
सूचना
प्रौद्योगिकी,
ऑटो-कम्पोनेंट |
भोपाल |
- |
इंजीनियरिंग,फेब्रिकेशन,
बायोटेक्नोलॉजी,
हर्बल
उत्पाद,
सूचना
प्रौद्योगिकी,
खाद्य-प्रसंस्करण |
जबलपुर |
- |
वस्त्र
उद्योग,
खनिज
आधारित,
वन
आधारित
एवं
हर्बल
उत्पाद,
खाद्य
प्रसंस्करण |
ग्वालियर |
- |
इलेक्ट्रानिक्स,
सूचना
प्रौद्योगिकी,
फास्ट
मूविंग
कन्ज्यूमर
गुड्स
एण्ड
कमोडिटिज,
लाईट
इंजीनियरिंग,
खाद्य-प्रसंस्करण |
रीवा |
- |
रिफ्रेक्ट्रीज,
चूना
पत्थर
एवं
वनोपज |
|
| 7. |
राज्य
शासन
द्वारा
प्रदेश
में
विभिन्न
स्थानों
पर निम्नानुसार
इंडस्ट्रियल
पार्कस्
की स्थापना
के प्रारंभिक
कार्यों
को प्राथमिकता
से पूर्ण
किया
जाएगा। |
|
इंदौर/पीथमपुर |
- |
एपेरल
पार्क,
जेम
एंड
ज्वेवलरी
पार्क,
साफ्टवेयर
टेक्नालॉजी
पार्क
एवं
हर्बल
पार्क |
भोपाल |
- |
लाइफ
साइंसेस
इंस्टीट्यूट |
जबलपुर/कटनी |
- |
एपेरल
पार्क
और
स्टोन
पार्क |
रीवा/सतना |
- |
हर्बल
पार्क |
टीकमगढ़/सागर/छतरपुर |
- |
ग्रेनाईट
पार्क |
|
| 8. |
बीमार
औद्योगिक
इकाईयों
को वित्तीय
एवं
अन्य
रियायतें
देने
के लिए
तथा
बीमार/
बंद
उद्योगों
को अधिग्रहण
/क्रय
कर पुनर्संचालित
करने
के लिए
सुविधाओं
का विशेष
पैकेज
एवं
बीमार
लघु
उद्योगों
के लिये
पुनर्जीवन
योजना
तैयार
की जायेगी। |
| 9. |
निम्न
आय वर्ग
के परिवारों
के शिक्षित
बेरोजगारों
के लिए
प्रधानमंत्री
रोजगार
योजना
एवं
अन्य
रोजगार
मूलक
योजनाएं
संचालित
हैं
। रुपये
1.50 लाख
तक वार्षिक
आय वाले
परिवारों
के शिक्षित
बेरोजगारों
को स्वयं
का रोजगार
स्थापित
करने
के लिए
राज्य
शासन
व्दारा
बेरोजगारी
भत्ता
की बजाय
"दीनदयाल
रोजगार
योजना"
प्रारंभ
की जाएगी
ताकि
बेरोजगार
युवकों
को अपना
रोजगर
प्रारंभ
करने
में
सहायता
मिल
सके
। शासन
व्दारा
म.प्र.
रोजगार
निर्माण
बोर्ड
की स्थापना
की गयी
है ।
यह बोर्ड
रोजगर
एवं
स्वरोजगार
की सभी
योजनाओं
का पर्यवेक्षण
करेगा
और रोजगार
बढ़ाने
की नीति
तय करेगा। |
|
औद्योगिक
नीति
में
प्रदेश
में
1.04.2004 के
बाद
उत्पादन
प्रारंभ
करने
वाले
उद्योगों
को सहायता
एवं
अनुदान
देने
की घोषणा
की गयी
है। |
| 1.
उद्योग
निवेश
संवर्धन
सहायता
:- |
|
|
|
|
क्रमांक |
जिले
की
श्रेणी |
स्थायी
पूंजी
वेष्ठन
रुपये
करोड़
में |
सहायता
की
अवधि |
1 |
अग्रणी
जिला |
25 |
3
वर्ष |
2 |
पिछड़ा
जिला
'अ' |
20 |
5
वर्ष |
3 |
पिछड़ा
जिला
'ब' |
15 |
7
वर्ष |
4 |
पिछड़ा
जिला
'स' |
10 |
10
वर्ष |
|
|
सहायता
राशि
स्थायी
पूंजी
निवेश
से
अधिक
नहीं
होगी।
|
2.
स्टाम्प
डयूटी
एवं
पंजीयन
शुल्क
में
छूट
:- |
अ. |
ऐसी
औद्योगिक
इकाइयां
जो
नवीन,
विस्तार,
डायवर्सिफिकेशन
एवं
आधुनिकीकरण
के
लिए
ऋ़णप्राप्त
करती
है,
को
ऋ़णसंबंधी
बंधक
पत्रों,
अनुबंध
निष्पादन
में
लगने
वाला
पंजीयन
शुल्क
एवं
स्टाम्प
ड्यूटी
निम्नानुसार
रहेगी:- |
जिले
की
श्रेणी
|
स्टाम्प
ड्यूटी
|
पंजीयन
शुल्क
|
|
लघु
उद्योग
|
वृहद
एवं
मध्यम
|
लघु
उद्योग |
वृहद
एवं
मध्यम
|
पिछड़ा
'ब' |
100 %
छूट |
50 % छूट |
1
रु.
प्रति
हजार |
सामान्य
दर
का
50% |
पिछड़ा
'स' |
100 %
छूट |
100 %
छूट |
1
रु.
प्रति
हजार |
1
रु.
प्रति
हजार |
'एन.आई.बी.' |
100 %
छूट |
100 %
छूट |
1
रु.
प्रति
हजार |
1
रु.
प्रति
हजार |
|
ब. |
औद्योगिक
क्षेत्रों
एवं
विकास
केन्द्रों
की
भूमि
एवं
शेड
के
पट्टाभिलेख
पर
स्टेम्प
ड्यूटी
पंजीयन
शुल्क
उद्योग
विभाग
द्वारा
निर्धारित
प्रब्याजी
की
दर
पर
लिया
जाएगा। |
स. |
उद्योग
विभाग
द्वारा
भूमि
हस्तांतरण
के
प्रकरणों
में
केवल
हस्तांतरण
शुल्क
के
आधार
पर
स्टाम्प
ड्यूटी
एवं
पंजीयन
शुल्क
लिया
जाएगा।
स्वामित्विक/भागीदारी
इकाईयों
में
मूल
आवंटियों
के
निकटस्थ
रक्त
संबंधी
(पति/पत्नी/माता/पिता/पुत्र/पुत्री/भाई/बहन/पोत/पोती)
को
भूमि/भवन
का
अंतरण
हस्तांतरण
की
श्रेणी
में
नहीं
रखा
जाएगा
।
ऐसे
प्रकरणों
में
कोई
हस्तांतरण
शुल्क
नहीं
लिया
जाएगा।
लीज
डीड
में
तदानुसार
संशोधन
किया
जाएगा।
ऐसे
संशोधन
हेतु
मात्र
1000/-
स्टाम्प
ड्यूटी
व
रुपये
100/-
पंजीयन
शुल्क
लिया
जाएगा। |
द. |
वित्तीय
संस्थाओं
एवं
बैंकों
द्वारा
अधिग्रहित
बंद
औद्योगिक
इकाइयों
एवं
बीआईएफआर
अथवा
परिसमापक
को
संदर्भित
बीमार/बंद
इकाईयों
के
विक्रय
पर
स्टाम्प
ड्यूटी
एवं
पंजीयन
शुल्क
पूर्णत:
माफ
किया
जाएगा। |
इ. |
भारतीय
रिर्जव
बैंक
द्वारा
परिभाषित
रूग्ण
तथा
बंद
उद्योगों
के
हस्तांतरण/विक्रय
पर
स्टाम्प
ड्यूटी
एंव
पंजीयन
शुल्क
पूर्णत:
माफ
किया
जाएगा। |
फ. |
यदि
किसी
औद्योगिक
इकाई
का
वर्तमान
प्रबंधन,
विगत
पाँच
वर्षों
में
से
तीन
वर्षों
में
उक्त
इकाई
की
स्थापना
क्षमता
50
प्रतिशत
से
अधिक
पर
संचालन
करने
में
सक्षम
नहीं
रहा
है
एवं
बेहतर
क्षमता
उपयोग
हेतु "On
going Concern" के
रूप
में
अन्य
उद्यमी
को
विक्रय
कर
देता
है
अथवा
किसी
अन्य
कम्पनी
द्वारा
उक्त
इकाई
को
संविलियन (Merger) या
एकीकरण (Amalgamate) कर
लिया
जाता
है,
तो
ऐसे
प्रकरणों
में
स्टाम्प
ड्यूटी
एवं
रजिस्ट्रेशन
चार्जेस
रुपये
10
लाख
से
अधिक
नहीं
होगा। |
3 |
ब्याज
अनुदान
:- राज्य
में
स्थापित
होने
वाली
औद्योगिक
इकाईयों
को 5
से 7
वर्षों
तक
पिछड़ा
'अ'
जिले
में
3
प्रतिशत
अधिक
रुपये
10
लाख,
पिछड़ा
'ब'
जिले
में
4
प्रतिशत
अधिकतम
रुपये
15
लाख
तथा
पिछड़ा
'स'
जिले
में
5
प्रतिशत
अधिकतम
रुपये
20
लाख
ब्याज
अनुदान
के
रूप
में
उपलब्ध
कराया
जाएगा। |
4. |
निवेश
पर
अनुदान
:- लघु
उद्योगों
को
निम्नानुसार
निवेश
पर
अनुदान
दिया
जाएगा। |
जिले
की
श्रेणी
|
अनुदान
का
प्रतिशत
|
अधिकतम
राशि
|
पिछड़ा
'अ' |
15 % |
5.00
लाख |
पिछड़ा
'ब' |
15
% |
10.00
लाख |
पिछड़ा
'स' |
15
% |
15.00
लाख |
|
5. |
अनुसूचित
जाति
/
जनजाति
के
उद्यमियों
एवं
महिला
उद्यमियों
के
लिए
विशेष
प्रावधान
:- |
|
-
अनुसूचित
जाति/जनजाति
के
उद्यमियों
एवं
महिला
उद्यमियों
को
ब्याज
अनुदान
बिना
किसी
अधिकतम
सीमा
एवं
जिलों
की
श्रेणी
के 5
प्रतिशत
की
दर
से 5
वर्ष
की
अवधि
के
लिए
उपलब्ध
कराई
जाएगी।
-
अग्रणी
जिलों
में
अनुसूचित
जाति/जनजाति
के
उद्यमी
एवं
महिला
उद्यमियों
के
लिए
पूंजी
वैष्ठन
का
15
प्रतिशत
अधिकतम
रुपये
5
लाख
निवेश
अनुदान
दिया
जाएगा।
-
अनुसूचित
जाति/जनजाति
एवं
महिला
उद्यमियों
हेतु
निवेश
पर
अनुदान
की
अधिकतम
सीमा
अ, ब,
स
श्रेणी
के
जिलों
में
क्रमश:
6
लाख,
12.00
एवं
17.50
लाख
होगी।
|
6. |
मेगा
प्रोजेक्ट्स
को
भूमि
में
रियायतें
:- मेगा
प्रोजेक्ट्स
से
तात्पर्य
ऐसे
उद्योग
से
होगा
जिनमें
स्थायी
पूंजी
निवेश
(कार्यशील
पूंजी
को
छोड़कर)
रुपये
25
करोड़
से
अधिक
प्रस्तावित
हो।
ऐसी
परियोजनाओं
को
निर्धारित
प्रीमियम
दर
के 25
प्रतिशत
दर
पर 5
से 20
एकड़
तक
भूमि
रियायती
दर
पर
उपलब्ध
करायी
जायेगी। |
7. |
मेगा
तथा
विशेष
महत्व
के
प्रोजेक्ट
हेतु
रियायती
पैकेट
:- 25
करोड़
या
उससे
अधिक
स्थाई
पूंजी
वेष्ठन
वाले
मेगा
प्रोजेक्ट
अथवा
विशेष
महत्व
की
परियोजनाएं
जिनमें
आधुनिक
तकनीक
प्रौद्योगिकी
प्रबंधन
आदि
निहित
हो,
को
उनकी
आवश्यकताओं
के
अनुसार
तथा
राज्य
के
संसाधनों
की
उपलब्धता
को
दृष्टिगत
रखते
हुए
मुख्यमंत्री
की
अध्यक्षता
में
गठित
शीर्ष
स्तरीय
निवेश
संवर्धन
साधिकार
समिति
द्वार
प्रकरणवार
विशेष
आर्थिक
तथा
अन्य
पैकेज
स्वीकृत
किया
जायेगा। |
|
इन
परियोजनाओं
में
फूड
एंड
एग्रो
प्रोसेसिंग,
दुग्ध
उत्पादन,
हर्बल
एवं
वन
आधारित
उद्योगों
को
जिनमें
रुपये
10
करोड़
से
अधिक
स्थायी
पूंजी
निवेश
हुआ
हो,
उन्हें
भी
इस
हेतु
मेगा
प्रोजेक्ट
माना
जायेगा। |
8. |
खाद्य
प्रसंस्करण
उद्योगों
द्वारा
प्रदेश
के
बाहर
से
कच्चे
माल
के
रूप
में
लाये
जाने
वाले
कृषि
उत्पादों
पर
मंडी
शुल्क
नहीं
लिया
जायेगा। |
9. |
मध्यप्रदेश
में
स्थापित
होने
वाली
केप्टिव
पावर
परियोजनाओं
को
विद्युत
ड्यूटी
में
छूट
प्रदान
की
जायेगी। |
10. |
खाद्य
प्रसंस्करण
उद्योगों
को
प्रोत्साहित
करने
हेतु
गुणवत्ता
प्रमाणीकरण
में
हुए
व्यय
की
प्रतिपूर्ति
एवं
अनुसंधान,
शोध
कार्यों
को
बढ़ावा
देने
के
लिए
वास्तवित
व्यय
के 10
प्रतिशत
की
दर
से
अधिकतम
रुपये
1.00
लाख
तक
की
प्रतिपूर्ति
की
जायेगी।
खाद्य
प्रसंस्करण
उद्योगों
की
लघु
उद्योगों
की
श्रेणी
में
विपणन
सहायता
हेतु
अनुदान:
खाद्य
प्रसंस्करण
उद्योगों
की
लघु
उद्योग
श्रेणी
में
उत्पादन
को
लोक
प्रिय
बनाने
के
लिए,
अपने
ब्रान्ड
की
प्रसिद्धि
के
लिए
प्रयासों
को
प्रोत्साहित
दिया
जाएगा।
इस
हेतु
राष्ट्रीय
स्तर,
राज्य
स्तरीय
प्रदर्शनी/सेमिनार
में
स्टॉल
लगाने
हेतु
अथवा
इस
स्तर
पर
किये
गये
विज्ञापन
की
प्रतिपूर्ति,
वास्तविक
व्यय
करने
के
उपरांत
की
जाएगी:- |
|
|
(राशि
रुपये
हजार
में) |
प्रथम
वर्ष |
75 |
द्वितीय
वर्ष |
50 |
तृतीय
वर्ष |
25 |
|
11. |
फूड
पार्क
में
स्थापित
होने
वाले
उद्योगों
को
कच्चे
माल
के
रूप
में
क्रय
किये
जाने
वाले
कृषि
उत्पादों
पर
मंडी
शुल्क
से
मुक्ति
दी
जायेगी। |
12. |
औद्योगिक
नीति
एवं
कार्ययोजना
में
टेक्सटाईल
उद्योगों,
औषधी
एवं
हर्बल
उद्योगों,
आटोमोबाईल
कंपोनेंट
उद्योगों
को
विशेष
पैकेज
की
घोषणा
की
गयी
है। |
13. |
बीमार
बंद
उद्योगों
को
अधिग्रहण/क्रय
कर
पुर्नसंचालित
करने
पर
विशेष
पैकेज
दिया
गया
है
साथ
ही
राज्य
में
स्थापित
बीमार
औद्योगिक
इकाईयों
को
पॉलिसी
पैकेज
2004
दिया
गया
है।
यह
सुविधा
वृहद
एवं
मध्यम
उद्योगों
के
लिए
दी
गयी
है।
बीमार
लघु
श्रेणी
के
उद्योगों
के
लिए
पुनर्जीवन
योजना
भी
स्वीकृत
की
गयी
है। |