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तथ्य - पर्यटन

मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल

  1. पर्यटन

  2. म.प्र. राज्य पर्यटन विकास निगम

  3. पर्यटन स्थल

मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों का विकास करने की दृष्टि से वर्ष 1978 में म.प्र. राज्य पर्यटन विकास निगम का गठन किया गया। निगम कार्य पर्यटन स्थलों पर आवासीय, गैर आवासीय इकाइयों का संचालन, पर्यटकों को पर्यटन स्थलों की जानकारी सुलभ कराना, पर्यटन स्थलों पर साहित्य का प्रकाशन तथा पर्यटकों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। निगम के अन्य कार्यों में शामिल हैं- आवासीय इकाइयों में आरक्षण, राज्य के बारह निगम के सेटेलाइट कार्यालयों से पर्यटकों के लिए विभिन्न रूचि, अवधि एवं दरों के पैकेज टूरों का संचालन, पर्यटन स्थलों का अखिल भारतीय स्तर पर प्रचार-प्रसार, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े ट्रेवल एजेंट्स, लेखक, फोटोग्राफर्स, विशिष्ट व्यक्तियों के लिए टूर का आयोजन, प्रदेश के पर्यटन स्थलों की व्यापक मार्केटिंग तथा प्रचार-प्रसार की दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलनों तथा ट्रेवल मार्ट आदि में भागीदारी, पर्यटन विभाग की परामर्शदात्री समिति, संभागीय समिति तथा शासन की पर्यटन संबंधी समितियों द्वारा लिए गए निर्णयों पर कार्रवाई। निगम द्वारा प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर आवास, खानपान, परिवहन सुविधा आदि उपलब्ध कराई जाती है।

निगम द्वारा वर्ष 1996 में पर्यटकों को अधिक से अधिक सुविधाएँ मुहैया कराने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। निगम द्वारा अमरकंटक में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा 30 बिस्तरों की क्षमता वाली इकाई हॉलि डे होम्स लीज पर प्राप्त की गई है। नई पर्यटन नीति के तहत निजी निवेशकों को आकर्षित करने की दृष्टि से राजस्व विभाग द्वारा खजुराहो, ओरछा, बाँधवगढ़, जबलपुर तथा मंदसौर जिले में गाँधी सागर तथा बस्तर जिले में चित्रकूट में आवंटित शासकीय भूमि का आधित्य ग्रहण कर लिया गया है। पर्यटकों को पर्यटन स्थलों तक पहुँचाने के लिए भोपाल-इंदौर-भोपाल, भोपाल-पंचमढ़ी-भोपाल, सतना-खजुराहो-सतना, पिपरिया-पंचमढी-पिपरिया, जबलपुर-कान्हा-जबलपुर, जबलपुर-भेड़ाघाट-जबलपुर, भोपाल-साँची-उदयगिरी-भोपाल, इंदौर-महेश्वर-मंडलेश्वर-इंदौर, इंदौर-उज्जैन बस सेवा निगम द्वारा शुरू की गई है।

निगम द्वारा भोपाल में संचालित जलक्रीड़ा संबंधी संबंधी सुविधाओं में व्यापक विस्तार किया गया है। भोपाल के बोट क्लब में नई स्वान बोट, शिकारा मोटर बोट, पैडल बोट बढ़ाई गई हैं। भोपाल-दर्शन, ग्वालियर-दर्शन, पचमढी-दर्शन के अलावा भोपाल से झाँसी-उदयगिरि एवं इंदौर के समीप मुख्य पर्यटन स्थलों के लिए परिचालित भ्रमण शुरू किया गया है।

नई पर्यटन नीति के तहत हेरिटेज होटल की योजना प्रदेश में लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत पुराने महल, हवेलियाँ तथा किलों को होटलों में परिवर्तित किया जाना है। इनमें छतरपुर स्थित राजगढ़ पैलेस को होटल का स्वरूप दिए जाने का निर्णय लिया जा चुका है। इसके अलावा पचमढ़ी सिथत शेखर, सुमन एवं डी.आई.बी.बंगले को हेरिटेज होटल में परिवर्तित किया जाएगा।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निजी निवेशकों की भागीदारी को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। निजी निवेशकों को राज्य शासन की ओर से सरकारी जमीन निर्धारित नियमों के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। राजस्व विभाग ने खजुराहो, छिंदवाड़ा, रायपुर, मंदसौर, ओरछा, बॉधवगढ़, चित्रकूट में सरकारी जमीन पर्यटन विकास निगम को दे दी है। इन स्थलों का भूमि आधिपत्य निगम द्वारा ग्रहण किया जा चुका है।

 

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