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मध्यप्रदेश
में
पर्यटन
गतिविधियों
को और
अधिक
सुचारू
रूप से
गति
प्रदान
करने के
उद्देश्य
से
राज्य
पर्यटन
विकास
परिषद
का गठन
किया
जायेगा।
यह
निर्णय
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
अध्यक्षता
में
गठित
मंत्रिपरिषद
की बैठक
में
लिया
गया।
उल्लेखनीय
है कि
राज्य
पर्यटन
नीति - 2010
में
राज्य
पर्यटन
विकास
परिषद
के गठन
का
प्रावधान
शामिल
है।
मुख्यमंत्री
की
अध्यक्षता
में
गठित की
जाने
वाली
परिषद
में
नगरीय
प्रशासन
एवं
विकास,
वित्त,
जल
संसाधन,
वन,
पर्यटन,
लोक
निर्माण,
संस्कृति
और
उद्योग
विभाग
के
मंत्री
एवं
प्रमुख
सचिव
सदस्य
होंगे।
पर्यटन
के
क्षेत्र
में
कार्य
करने
वाली
सात
संस्थाओं
के
अध्यक्ष
परिषद
के
स्थाई
आमंत्रित
सदस्य
होंगे।
इनमें
फेडरेशन
ऑफ होटल
एण्ड
रेस्टोंरेट
एसोसियेशन्स
ऑफ
इंडिया,
इंडियन
एसोसियेशन
ऑफ टूर
ऑपरेटर्स,
ऐसोसियेशन
ऑफ
डोमेस्टिक
टूर
ऑपरेटर्स
ऑफ
इंडिया,
ट्रेवल
एजेंट्स
एसोसियेशन
ऑफ
इंडिया,
एडवेंचर
टूर
ऑपरेटर्स
एसोसियेशन
ऑफ
इंडिया,
ईको
टूरिज्म
सोसायटी
ऑफ
इंडिया
तथा
इंडियन
नेशनल
ट्रस्ट
फॉर
आर्ट
एण्ड
कल्चरल
हेरीटेज
(इंटेक)
शामिल
हैं।
इसके
अलावा
पुरातत्व,
वन्य
प्राणी
एवं
प्रकृति
और
आतिथ्य
क्षेत्र
के
प्रख्यात
विशेषज्ञ
विशेष
आमंत्रित
सदस्य
होंगे।
साथ ही
समय-समय
पर
आवश्यकतानुसार
अन्य
विभागों
के
मंत्रीगण/
सचिव/
अधिकारी
तथा
अन्य
अशासकीय
व्यक्तियों
को भी
बैठक
में
आमंत्रित
किया जा
सकेगा।
यह
परिषद
पर्यटन
के
क्षेत्र
में
निजी
निवेश
को
प्रोत्साहित
करने के
लिये
संस्थागत
व्यवस्थाओं
को
सुदृढ़
करेगी।
यह
सम्पोषणीय
पर्यटन
के लिये
प्रभावी
नियामक
प्रक्रिया
का
निर्धारण,
पर्यटन
सुविधाओं
एवं
अधोसंरचना
विकास
के लिये
अंतर्विभागीय
समन्वय,
पर्यटन
क्षेत्र
के
हितधारियों
की
समन्वित
भागीदारी
सुनिश्चित
करने के
साथ-साथ
विशेष
पर्यटन
क्षेत्र
को
चिन्हांकित
कर
अधिसूचित
करेगी।
परिषद
विभागों
की
योजनाओं
के
पर्यटन
संबंधी
अंश तथा
गतिविधियों
का
पर्यवेक्षण
और
अनुश्रवण
करेगी।
यह
पर्यटन
नीति के
संबंध
में की
जा रही
विभिन्न
कार्यवाहियों
की
समीक्षा
भी
करेगी।
परिषद
की बैठक
वर्ष
में कम
से कम दो
बार
बुलाई
जा
सकेगी।
प्रमुख
सचिव
पर्यटन
इस
परिषद
के सचिव
होंगे
और वह
परिषद
से
संबंधित
समस्त
अभिलेख
संधारण
एवं
अनुवृत्ति
कार्यों
के लिये
उत्तरदायी
होंगे।
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