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मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
अध्यक्षता
में आज
सम्पन्न
मंत्रि-परिषद
की बैठक
में
प्रदेश
के सभी
जिलों
में
त्वरित
परिवहन
आकस्मिक
चिकित्सा
सेवा 108
शुरू
करने का
महत्वपूर्ण
निर्णय
लिया
गया।
वर्तमान
में
प्रदेश
के 9
जिलों
में यह
सुविधा
उपलब्ध
है। शेष
जिलों
में इसी
साल यह
उपलब्ध
हो
जायेगी।
इसके
लिये 150
एम्बुलेंस
क्रय की
जायेंगी।
फिलहाल
108
सुविधा
भोपाल,
इंदौर,
ग्वालियर,
रीवा,
सागर और
जबलपुर
में
उपलब्ध
है। इसी
माह से
दतिया,
दमोह
एवं
सीहोर
में यह
सुविधा
शुरू की
गई है,
जिसका
मंत्रि-परिषद
ने
अनुसमर्थन
किया।
उल्लेखनीय
है कि
सभी
आवश्यक
चिकित्सा
उपकरणों,
चिकित्सक
और
आवश्यक
अमले से
सुसज्जित
108
त्वरित
परिवहन
आकस्मिक
चिकित्सा
सेवा
वाहन
कहीं भी
दुर्घटना
अथवा
आकस्मिकता
की
स्थिति
में
शीघ्र
से
शीघ्र
वहाँ
पहुँचकर
पीड़ितों
को
तत्काल
चिकित्सा
सहायता
उपलब्ध
कराते
हैं।
मंत्रिपरिषद
ने लीगल
मेट्रोलॉजी
एक्ट 2009
के अधीन
बनाये
गये
मध्यप्रदेश
लीगल
मेट्रोलॉजी
नियम 2011
को
अनुमोदित
करते
हुए इसे
मध्यप्रदेश
में
लागू
करने का
निर्णय
लिया।
लीगल
मेट्रोलॉजी
एक्ट 2009
के अर्थ-दण्ड
संबंधी
प्रावधान
के
अनुसार
ही इन
नियमों
में
राजीनामा
शुल्क
का
निर्धारण
किया
गया है।
इसके
अंतर्गत
मानक से
भिन्न
नाप-तौल
उपकरण
के
निर्माण
पर 5
हजार
रुपये,
कम नाप-तौल
करने पर
5 हजार
रुपये,
असत्यापित
नाप-तौल
उपकरणों
के
उपयोग
पर 2
हजार
रुपये
तथा
अमानक
नाप-तौल
उपकरणों
के
उपयोग
पर 2
हजार
रुपये
का
न्यूनतम
राजीनामा
शुल्क
निर्धारित
किया
गया है।
इसका
उद्देश्य
नाप-तौल
संबंधी
नियमों
के
उल्लंघन
में कमी
लाना और
उपभोक्ताओं
के
हितों
का
संरक्षण
करना
है।
मंत्रि-परिषद
ने
पिछड़ा
वर्ग
एवं
अल्पसंख्यक
कल्याण
विभाग
द्वारा
संचालित
पिछड़े
वर्ग के
शिक्षित
बेरोजगार
युवक-युवतियों
को
रोजगार
उपलब्ध
करवाने
की
प्रशिक्षण
योजना
में
संशोधन
का
अनुमोदन
किया।
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
घोषणा
के
अनुसार
योजना
के
प्रावधानों
को और
अधिक
स्पष्ट,
व्यापक
और
व्यावहारिक
बनाया
गया है।
संशोधन
के
अनुसार,
प्रशिक्षण
के लिये
मेपसेट
के
स्थान
पर
पिछड़ा
वर्ग
तथा
अल्पसंख्यक
वित्त
एवं
विकास
निगम को
नोडल
एजेंसी
बनाया
गया है।
प्रशिक्षण
में
गुणवत्ता
एवं
रोजगार
गारंटी
की
दृष्टि
से
तकनीकी
शिक्षा
विभाग
द्वारा
संचालित
नेशनल
काउंसिल
फॉर
वोकेशनल
ट्रेनिंग
की
माड्यूलर
एम्पलायमेंट
स्कीम
के
अंतर्गत
वोकेशनल
ट्रेनिंग
प्रोवाइडर
के रूप
में
पंजीबद्ध
गैर-शासकीय
संगठनों
को इस
योजना
से जोड़ा
गया है।
इसके
माध्यम
से
पिछड़ा
वर्ग के
असंगठित
क्षेत्रों
में
कार्यरत
एवं
शाला
त्यागी
युवक-युवतियों
को
प्रशिक्षण
द्वारा
कौशल
उन्नयन
का लाभ
दिया
जायेगा।
बी.टी.पी.
के रूप
में
पंजीबद्ध
गैर-शासकीय
संगठन
को चयन
के बाद
तीन माह
की अवधि
में
पंजीयन
करवाना
अनिवार्य
होगा।
इसी
प्रकार
प्रशिक्षण
के लिये
अभ्यर्थियों
की
न्यूनतम
आयु
सीमा 18
वर्ष के
स्थान
पर 16
वर्ष की
गई है।
प्रशिक्षण
के बाद
अभ्यर्थियों
की
सफलता/प्लेसमेंट
की दर 20
प्रतिशत
के
स्थान
पर 40
प्रतिशत
की गई
है।
संशोधन
में
प्रशिक्षण
संस्थाओं
के चयन
की
प्रक्रिया
एवं
प्रशिक्षण
की
शर्तों
एवं
मापदण्डों
को और
अधिक
स्पष्ट
एवं
व्यावहारिक
बनाने
के लिये
कुछ
नवीन
प्रावधान
शामिल
किये
गये
हैं।
अभ्यर्थियों
की
न्यूनतम
योग्यता
10वीं के
स्थान
पर 8वीं
पास तय
की गई
है।
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