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मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
अध्यक्षता
में आज
संपन्न
मंत्रि
परिषद
की बैठक
में
राज्य
शासन के
अधिकारियों
एवं
कर्मचारियों
के लिये
वर्ष 2011-12
की
स्थानांतरण
नीति का
अनुमोदन
किया
गया।
नीति के
अनुसार
20
अप्रैल
से 7 जून
तक
स्थानांतरण
किये जा
सकेंगे।
स्थानांतरण
होने पर
कार्य
मुक्त
अधिकारी
अथवा
कर्मचारी
द्वारा
ज्वाइनिंग
टाइम का
लाभ
उठाकर
नई
पदस्थापना
पर यदि
कार्य
ग्रहण
नहीं
किया
जाता है
तो उस पर
नियमानुसार
अनुशासनात्मक
कार्रवाई
की
जायेगी।
स्थानांतरित
कर्मचारी
के
कार्य
मुक्त
होने पर
उसका
डाटा
बेस सात
दिन के
अंदर
संबंधित
कोषालय
को भेजा
जायेगा।
मंथन
2009 में की
गई
अनुशंसा
के
अनुसार
गृह
विभाग
के सभी
मैदानी
अधिकारियों
के लिये
सेवाकाल
के
दौरान
एक जिले
में
अधिकतम
पांच
वर्ष के
कार्य
काल का
प्रावधान
किया
गया है ।
इस
अनुशंसा
के
परिप्रेक्ष्य
में इस
स्थानांतरण
नीति
में
पुलिस
विभाग
के
अंतर्गत
पद एवं
संवर्ग
में
कार्यरत
संख्या
के आधार
पर जो
प्रतिशत
निर्धारित
है उससे
गृह
विभाग
को छूट
दी गई
है।
राज्य
प्रशासनिक
सेवा के
अधिकारियों
की
पदस्थापना
सामान्य
प्रशासन
विभाग
द्वारा
जिले
में की
जायेगी।
जिले के
भीतर
डिप्टी
कलेक्टर/संयुक्त
कलेक्टर
की
अनुविभाग
में
पदस्थापना
या
अनुविभाग
परिवर्तन
कलेक्टर
द्वारा
प्रभारी
मंत्री
के
परामर्श
से किया
जायेगा।
राज्य
शासन से
पत्राचार
करने की
मान्यता
प्राप्त
कर्मचारी
संगठनों
के
राज्य
एवं
जिला
स्तरीय
पदाधिकारियों
को पद पर
नियुक्ति
उपरांत
स्थानांतरण
से तीन
वर्ष तक
की
सामान्यत:
छूट
होगी।
तीन
वर्ष से
अधिक
पदस्थापना
अवधि
पूर्ण
होने पर
ऐसे
पदाधिकारियों
को भी
स्थानांतरित
किया जा
सकेगा।
ऐसे
शासकीय
अधिकारियों/कर्मचारियों
को,
जिनका
पुत्र
अथवा
पुत्री
मानसिक
नि:शक्तता
अथवा
बहुआयामी
नि:शक्तता
से
पीड़ित
है,
स्वयं
के व्यय
पर
स्वेच्छा
से अपनी
सुविधा
की ऐसी
जगह
पदस्थापना
प्राप्त
करने की
छूट दी
गई है
जहां नि:शक्तता
से
पीड़ित
उसे
पुत्र
अथवा
पुत्री
का
उपचार
एवं
शिक्षा
सुलभ हो
सके।
ऐसे
कर्मचारी
को
मान्यता
प्राप्त
संस्थान
से
समुचित
प्रमाण
पत्र
प्रस्तुत
करना
होगा।
स्थानांतरण
प्रतिबंध
की अवधि
में छूट
शैक्षणिक
विभागों
के लिये
31 मई 2011 के
स्थान
पर 15 जून 2011
तक दी गई
है। गत
वर्ष
जारी
नीति के
अनुसार
कम
लिंगानुपात
वाले 14
जिलों
में
उच्च
प्रशासनिक
पदों पर
यथा
संभव
महिला
अधिकारियों
की
पदस्थापना
किये
जाने का
प्रावधान
यथावत
रखा गया
है।
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