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मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
अध्यक्षता
में आज
संपन्न
मंत्रि
परिषद
की बैठक
में
कृषकों
को
स्थाई
विद्युत
पम्प
कनेक्शन
प्रदाय
करने के
लिये
अनुदान
योजना
में
संशोधन
किया
गया।
प्रति
कृषक
प्राक्कलन
राशि की
सीमा
प्रत्येक
हितग्राही
के लिये
एक लाख 50
हजार
रूपये
रखी गई
है।
समूह के
प्रकरणों
में भी
उपरोक्त
सीमा
प्रत्येक
हितग्राही
के मान
से लागू
रहेगी।
यदि
कृषक के
लिये
प्राक्कलन
एक लाख 50
हजार
रूपये
तक की
सीमा
में आता
है तो
शेष
राशि
राज्य
शासन
द्वारा
अनुदान
के रूप
में
संबंधित
विद्युत
वितरण
कम्पनी
को
उपलब्ध
कराई
जायेगी।
इस
योजना
में
स्थाई
पम्प
कनेक्शन
लेना
किसानों
का
अधिकार
बनाया
गया है।
इसके
फलस्वरुप
निर्धारित
राशि
जमा
करने के
बाद
किसान
को 6 माह
के भीतर
कनेक्शन
मिल
जायेंगे।
कृषकों
द्वारा
नवीन
पम्प
कनेक्शन
के लिये
पूर्व
में
विद्युत
मण्डल/वितरण
कम्पनी
कार्यालय
में कोई
भी राशि
जमा की
गई है तो
उसका
समायोजन
इस
योजना
के
अंतर्गत
किया
जायेगा।
पूर्व
में जमा
की गई
राशि पर
6
प्रतिशत
साधारण
ब्याज
लगाकर
उसे
समायोजित
किया
जायेगा।
योजना
में यदि
कोई
राशि
कृषकों
को वापस
की जानी
हो तो उस
पर भी
जमा
करने की
दिनांक
से 6
प्रतिशत
साधारण
ब्याज
लगाकर
वापस की
जायेगी।
मंत्रि
परिषद
द्वारा
इनपुट
आधारित
विद्युत
वितरण
फ्रेंचाइजी
दिये
जाने के
लिये
प्रथम
चरण में
नौ
जिलों
का
निर्धारण
किया।
इनमें
सतना,
सागर,
नरसिंहपुर,
ग्वालियर,
भिंड,
दतिया,
उज्जैन,
शाजापुर
और
देवास
शामिल
हैं। इस
परियोजना
के तहत
डिस्ट्रीब्यूशन
फ्रेंचाइजी
एग्रीमेंट
का
अनुमोदन
किया
गया। इस
एग्रीमेंट
में
विद्युत
उपभोक्ताओं
के
हितों
के
संरक्षण
के लिए
उपभोक्ताओं
को गलत
बिल
जारी
करने,
उनकी
शिकायतों
पर
त्वरित
कार्यवाही
न किये
जाने
तथा
विद्युत
प्रदाय
में आने
वाले
व्यवधान
को
शीघ्र
दूर न
किये
जाने
वाले
मामलो
पर
शास्ति
तथा
पुनरावृत्ति
होने पर
अनुबंध
निरस्त
करने के
स्पष्ट
प्रावधान
किये
गये
हैं।
प्री-बिड
मीटिंग
में
प्राप्त
सुझाव
एवं
स्वविवेक
से
विद्युत
वितरण
कंपनियों
द्वारा
दिये
गये
सुझावों
के आधार
पर
डिस्ट्रीब्यूशन
फ्रेंचाइजी
एग्रीमेंट
में
आवश्यक
संशोधन
का
अधिकार
ऊर्जा
विभाग
को दिया
गया।
इन
जिलों
में ये
फ्रेन्चायजी
प्रयोग
के तौर
पर
नियुक्त
किए
जायेंगे
जो
विद्युत
वितरण
कंपनियों
के
एजेन्ट
के रूप
में
उपभोक्ताओं
को
सेवाएं
देंगे।
इस
व्यवस्था
में
वितरण
लायसेंसी
का
कार्य
पूर्ववत
वितरण
कंपनियों
के पास
रहेगा,
अर्थात
विद्युत
प्रदाय
की अवधि,
इसके
घंटे
निश्चित
करने का
अधिकार
पूर्ववत
वितरण
कंपनियों
के पास
रहेगा।
उपभोक्ताओं
से लिए
जाने
वाले
शुल्क
भी
पूर्ववत
नियामक
आयोग
द्वारा
निर्धारित
अनुसार
ही
रहेगी।
फ्रेन्चायजी
15 वर्ष
के लिए
नियुक्त
होगा,
जिसे दो
सालों
में
वितरण
प्रणाली
को
सुदृढ़
करना
होगा
तथा
प्रत्येक
उपभोक्ता
को मीटर
प्रदाय
करना
होगा।
वितरण
फ्रेन्चायजी
वितरण
कंपनी
के
एजेन्ट
के रूप
में
उपभोक्ताओं
के रूप
में
नियमित
विद्युत
प्रदाय
करेगा
और उनसे
विद्युत
देयकों
के
भुगतान
के लिए
समुचित
व्यवस्था
करेगा।
वितरण
फ्रेन्चायजी
का सबसे
महत्वपूर्ण
का
वितरण
हानियों
में कमी
लाना है
जिससे
अंतिम
रूप से
लाभ
विद्युत
उपभोक्ता
को ही
मिलेगा।
फ्रेन्चायजी
के आने
से न तो
विद्युत
उपभोक्ता
पर कोई
अतिरिक्त
वित्तीय
भार
आयेगा
और न ही
शासन
द्वारा
फ्रेन्चायजी
को किसी
प्रकार
की
आर्थिक
सहायता
दी
जाएगी।
जोखिम
को कम
करने
तथा
स्वस्थ्य
प्रतिस्पर्धा
को
बढ़ावा
देने के
लिये एक
वितरण
कंपनी
के
कार्य
क्षेत्र
में
किसी एक
निविदा
काल को
एक से
अधिक
जिले के
लिये
वितरण
फ्रेंचाइजी
का
कार्य
नहीं
सौंपा
जायेगा।
मंत्रि
परिषद
ने
हरसूद (छनेरा)
में
हरसूद
के
विस्थापितों
को दिये
गये
आवासीय
पट्टे
उनकी
पात्रतानुसार
पात्रता
की सीमा
तक नि:शुल्क
फ्री
होल्ड
राइट पर
आवंटित
करने का
निर्णय
लिया।
हरसूद
नगर से
विस्थापितों
को उनके
स्वंय
के
मालिकाना
हक के
भूखंड
से
ग्रामीण
क्षेत्र
छनेरा
में
वर्ष 2004-05
में
स्थापित
किया
गया था।
इस
संबंध
में
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने 27
अगस्त 2008
को
घोषणा
की थी।
कुल
विस्थापितों
की
संख्या
6604 है।
मंत्रि
परिषद
ने
आईआईयूएस
चंदेरी
परियोजना
के लिये
गठित
डेव्हलपमेंट
सोसायटी
फार
हेंडलूम
वीवर्स
को 43.430
हेक्टेयर
भूमि
आवंटित
करने का
निर्णय
लिया।
उल्लेखनीय
है कि
भारत
सरकार
के
वाणिज्य
एवं
उद्योग
मंत्रालय
के
अंतर्गत
डिपार्टमेंट
ऑफ
इंडस्ट्रीयल
पॉलिसी
एंड
प्रमोशन
के तहत
चंदेरी
में
हाथकरघा
विकास
के लिये
27 करोड़ 80
लाख
रुपये
की
योजना
स्वीकृत
की गई
है।
जिसका
मध्यप्रदेश
शासन के
वित्त
विभाग
गठित
उच्च
स्तरीय
वित्तीय
व्यय
समिति
द्वारा
किया
गया है।
शासन के
इस
निर्णय
से
चंदेरी
के हाथ
करघा
बनुकरों
के लिये
औद्योगिक
संरचना
उन्नयन
लागू
करने
में
आसानी
होगी।
मंत्रि
परिषद
ने
इंदिरा
गांधी
राष्ट्रीय
जनजाति
विश्वविद्यालय,
अमरकंटक
जिला
अनूपपुर
को
ग्राम
लालपुर
में 1.50
एकड़
भूमि
द्वितीय
परिसर
में
जाने के
लिये
मार्ग
निर्माण
के लिये
नि:शुल्क
आवंटित
करने का
निर्णय
लिया।
मंत्रि
परिषद
ने
सीआरपीएफ
की
कोबरा
बटालियन
की
स्थापना
के लिये
बालाघाट
जिले के
ग्राम
बड़गांव
में 32.802
हेक्टेयर
भूमि
आवंटित
करने का
निर्णय
लिया
है।
मंत्रि
परिषद
ने
स्पाईसेस
बोर्ड
भारत
सरकार
वाणिज्य
एवं
उद्योग
मंत्रालय
को गुना
जिले के
ग्राम
मावन
में 40.500
हेक्टेयर
जमीन
आवंटित
करने का
निर्णय
लिया।
इस भूमि
को सब-लीज
करने की
इजाज़त
नहीं दी
जायेगी।
यह
बोर्ड
भारत
सरकार
की
स्वशासी
संस्था
है।
जिसमें
मसाले
एवं
मसालों
से
संबंधित
उत्पाद
के
निर्यात
को
बढ़ावा
देने के
लिये
भूमि की
मांग की
गई थी।
मंत्रि
परिषद
ने
मध्यप्रदेश
मध्य
क्षेत्र
विद्युत
वितरण
कंपनी,
भोपाल
एवं
मध्यप्रदेश
पूर्व
क्षेत्र
विद्युत
वितरण
कंपनी,
जबलपुर
द्वारा
ऊर्जा
वित्त
निगम, नई
दिल्ली
से 250-250
करोड़
के
अल्पकालिक
ऋण
प्राप्त
करने के
लिये
राज्य
शासन से
गारंटी
प्रदान
करने का
निर्णय
लिया।
मंत्रि
परिषद
ने
आरबीसी
6-4 में
किये
गये
संशोधन
से के
संबंध
में
मुख्यमंत्री
द्वारा
15 जनवरी 2011
को दिये
गये
आदेश का
अनुसमर्थन
किया।
इसमें
पान-बरेजे
और
सब्जी
को आपदा
राहत
में
सम्मिलित
किया
गया है।
इसके
पूर्व
इन
फसलों
को
प्राकृतिक
आपदा से
होने
वाली
हानि पर
राहत
राशि
नहीं
मिलती
थी। इस
संशोधन
के
अनुसार
सब्जी
की खेती
करने
वाले
लघु एवं
सीमांत
कृषकों
को 25 से 50
प्रतिशत
हानि
होने पर
8500 रुपये
प्रति
हेक्टेयर
और 50
प्रतिशत
से अधिक
हानि
होने पर
11000 रुपये
प्रति
हेक्टेयर
के मान
से
सहायता
राशि
देने का
प्रावधान
है। इसी
तरह पान-बरेजे
की
फसलों
को
नुकसान
पहुंचने
पर 25 से 50
प्रतिशत
हानि पर
16000 रुपये
प्रति
हेक्टेयर
या 400
रुपये
प्रति
पारी और
50
प्रतिशत
से अधिक
मामलों
में 25000
रुपये
प्रति
हेक्टेयर
या 625
रुपये
प्रति
पारी के
मान से
सहायता
देने का
प्रावधान
किया
गया है।
मंत्रि
परिषद
ने
न्यायमूर्ति
श्री ए.के.जैन
की
अध्यक्षता
में
गठित
सामाजिक
सुरक्षा
पेंशन
तथा
राष्ट्रीय
वृद्वावस्था
पेंशन
योजना
अनियमितता
जांच
आयोग के
कार्यकाल
को 7 मई 2011
से एक
वर्ष और
बढ़ाने
का
निर्णय
लिया।
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