|
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
अध्यक्षता
में आज
सम्पन्न
मंत्रि-परिषद
की बैठक
में
बायोमास
आधारित
विद्युत
परियोजना
क्रियान्वयन
नीति-2011
का
अनुमोदन
किया
गया।
नीति
के
अनुसार
जिले
में अति-शेष
बायोमास
की
संभावित
उपलब्धता
को
ध्यान
में
रखते
हुए एक
विकास
खण्ड
में एक
परियोजना
पंजीकृत
की जा
सकेगी ।
निवेशकों
का
पंजीकरण
मध्यप्रदेश
ऊर्जा
विकास
निगम
द्वारा
किया
जायेगा।
निश्चित
अवधि
में
परियोजना
पूरी कर
बिजली
की
पूर्ति
गाँव-गाँव
में की
जा
सकेगी।
वर्ष
2006 की
नीति
में
बायोमास
की एक
परियोजना
से
दूसरी
परियोजना
के बीच
की दूरी
25
किलोमीटर
(रेडियस)
निर्धारित
की गई थी
। इसे
परिवर्तित
कर नवीन
नीति
में
न्यूनतम
दूरी
हटा दी
गई है।
इस
प्रावधान
के तहत
बायोमास
संयंत्रों
की
संख्या
बढ़ेगी
और
बायोमास
का
बेहतर
उपयोग
किया जा
सकेगा।
नवीन
नीति
में
प्रदेश
और
प्रदेश
के बाहर
के
पंजीकरण
के लिये
प्रतीक्षा
सूची के
निवेशक
द्वारा
लगभग
सात
हजार
करोड़
रूपये
का
निवेश
किया जा
सकेगा।
इस नीति
से जहाँ
एक ओर
गाँव-गाँव
में
प्रदूषणयुक्त
बिजली
प्राप्त
होगी,
वहीं
दूसरी
ओर
संबंधित
जिले के
किसान
अपना
बायोमास
(चावल
एवं
सोया की
भूसी,
कपास और
सरसों
के डंठल
आदि) जो
वे अभी
तक
खेतों
में जला
रहे थे
या कहीं
और फेंक
रहे थे,
उसे
निवेशकों
को
बेचकर
लाभ कमा
सकते
हैं ।
उल्लेखनीय
है कि
भारत
सरकार
द्वारा
करवाये
गये
सर्वेक्षणानुसार
मध्यप्रदेश
में
बायोमास
आधारित
संयंत्रों
से 1250
मेगावाट
बिजली
उत्पादन
की
संभावना
है ।
वर्तमान
में 32
मेगावाट
(केप्टिव)
बायोमास
के
उत्पादन
आधारित
संयंत्र
स्थापित
हैं तथा
45
मेगावाट
बायोमास
आधारित
संयंत्र
कमीशनिंग
के स्तर
पर है,
जो कभी
भी चालू
हो सकते
हैं ।
नवीन
नीति के
अनुसार
एक
परियोजना
की
स्थापित
क्षमता
15
मेगावाट
तक ही
सीमित
होगी।
यदि
बायोमास
की
उपलब्धता
संयंत्र
की
आवश्यकता
से कम हो,
तो
संयंत्र
के
सुविधापूर्ण
निरंतर
संचालन
के लिये
15
प्रतिशत
पारम्परिक
ईंधन का
उपयोग
घोषित
किये
गये हीट
रेट के
आधार पर
अनुज्ञात
किया
जायेगा।
वनों के
संरक्षण
एवं
लकड़ियों
के
दुरूपयोग
को
रोकने
तथा
उनके
संरक्षण
की
दृष्टि
से
प्रस्तावित
बायोमास
आधारित
पावर
संयंत्र
के
वास्तविक
स्थल की
निकटतम
वन सीमा
से
न्यूनतम
दूरी 2
किलोमीटर
अनिवार्यतः
होगी।
परियोजना
का
पंजीकरण
’’ प्रथम
आवे
प्रथम
पावें ’’
के आधार
पर
प्रत्येक
जिले की
बायोमास
की
संभावी
उपलब्धता
के आधार
पर
होगा।
पंजीकरण
की
गतिविधियाँ
पूर्ण
होने के
बाद
प्रर्वतक
द्वारा
संपूर्ण
परियोजना
लागत का
एक
प्रतिशत
की दर से
परफार्मेंस
बैंक
गारण्टी
जमा की
जायेगी।
बैंक
गारण्टी
तीन माह
की अवधि
के लिये
ही
मान्य
होगी।
बायोमास
आधारित
पावर
संयंत्र
को
निकटतम
वन सीमा
से
न्यूनतम
दो
किलोमीटर
की दूरी
रखे
जाने
संबंधी
प्रमाण-पत्र
वन
विभाग
के
सक्षम
अधिकारी
द्वारा
जारी
किया
जायेगा।
स्वीकृति
जारी
होने के
बाद
परियोजना
का
विकासकर्ता,
प्रशासकीय
अनुमोदन
की
तारीख
से कुल 24
माह की
समय-सीमा
के भीतर
परियोजना
की
कमीशनिंग
करेगा।
|