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मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
अध्यक्षता
में आज
सम्पन्न
मंत्रिपरिषद
की बैठक
में
आगामी
विधानसभा
सत्र
में रखे
जाने
वाले
विभिन्न
संशोधन
विधेयकों
के
प्रारूप
को
अनुमोदित
किया।
मध्यप्रदेश
कृषि
उपज
मण्डी
अधिनियम
1972 में
संशोधन
प्रस्तावित
है,
जिसके
फलस्वरूप
फल-सब्जी
और फूल
की
उपजों
को
मण्डी
प्रांगण
में
विक्रय
करने की
बाध्यता
समाप्त
करने का
प्रावधान
है।
इससे
उत्पादकों
को
मण्डी
प्रांगण
के बाहर
विक्रय
की
सुविधा
उपलब्ध
हो
सकेगी।
मण्डी
प्रांगण
के बाहर
इस उपज
के
विक्रय
होने पर
यह
मण्डी
अधिनियम
के
प्रावधानों
से
मुक्त
होगी।
परंतु
यदि
उत्पादक
मण्डी
प्रांगण
में
लाकर
विक्रय
करना
चाहता
है तो
नियमानुसार
मण्डी
फीस ली
जायेगी।
उल्लेखित
कृषि
उपज पर
आधारित
प्रसंस्करण
उद्योगों
की
स्थापना
को
प्रोत्साहित
करने के
उद्देश्य
से
राज्य
सरकार
द्वारा
विनिर्माण
शब्द को
प्रसंस्करण
की
परिभाषा
में
जोड़ने
के लिये
संशोधन
किया
गया है।
मंत्रिपरिषद
ने
मध्यप्रदेश
नगर
पालिक
निगम
अधिनियम
1956 और
मध्यप्रदेश
नगर
पालिका
अधिनियम
1961 में
विभिन्न
संशोधन
प्रस्तावों
को
अनुमोदित
किया। 13वें
वित्त
आयोग ने
अपनी
रिपोर्ट
में
सिफारिश
की है कि
भारत के
नियंत्रक-महालेखा
परीक्षक
को नगर
पालिकाओं
की
संपरीक्षा
पर
तकनीकी
मार्गदर्शन
तथा
पर्यवेक्षण
प्रदान
करना
चाहिये
तथा
उसके
वार्षिक
तकनीकी
निरीक्षण
प्रतिवेदन
के साथ-साथ
नगर
पालिकाओं
का
वार्षिक
संपरीक्षा
प्रतिवेदन
विधानसभा
के पटल
पर रखा
जाना
चाहिये।
यह
संशोधन
इसी
अनुशंसा
के पालन
के लिये
किया जा
रहा है,
जिससे
राज्य
को आयोग
द्वारा
अनुशंसित
परफार्मेंस
ग्रांट
प्राप्त
करने की
पात्रता
हो
जायेगी।
राज्य
में
कॉलोनियों
के
विकास
में
आर्थिक
रूप से
कमजोर
वर्गों
तथा
निम्न
आय
वर्गों
के लिये
भू-खण्ड
या
आवासगृह
चिन्हित
करने
संबंधी
उपबंध
को
युक्तियुक्त
करने के
लिये भी
संशोधन
प्रस्तावित
हैं।
इससे
कॉलोनियों
के
निर्माण
की
प्रक्रिया
सरल हो
जायेगी।
साथ ही
उद्योगों
के लिये
भवन
अनुज्ञा
की
शक्तियाँ
जिला
उद्योग
एवं
व्यापार
केन्द्र
के
महाप्रबंधक
या
औद्योगिक
केन्द्र
विकास
निगम के
महाप्रबंधक
अथवा
औद्योगिक
अधोसंरचना
विकास
निगम के
प्रबंध
संचालक
की
अध्यक्षता
वाली
समिति
को
प्रत्यायोजित
करने का
प्रस्ताव
है।
मंत्रिपरिषद
ने
मध्यप्रदेश
लोक
सेवाओं
के
प्रदान
की
गारंटी (संशोधन)
विधेयक
2011 का भी
अनुमोदन
किया।
इसके
अनुसार
राज्य
शासन
धारा 5
के
अंतर्गत
पदाभिहित
अधिकारी
अथवा
उसके
द्वारा
नामांकित
अधीनस्थ
कर्मचारी
को भी
आवेदन
प्राप्त
करने के
लिये
अधिकृत
कर सकता
है। इसी
तरह
प्रथम
अपीलीय
अधिकारी
तथा
द्वितीय
अपीलीय
अधिकारी
को यह
अधिकार
दिया
जाना
प्रस्तावित
है कि वह
उपरोक्त
अधिकारियों
के
समक्ष
लम्बित
अथवा
निरस्त
किये
गये
आवेदनों
के
अभिलेख
बुलाकर
उनका
परीक्षण
कर
यथोचित
आदेश
पारित
कर सकता
है।
मंत्रिपरिषद
ने
मध्यप्रदेश
सहकारी
सोसायटी
अधिनियम
1960 की
धारा 3
में
संशोधन
के
प्रारूप
को
मंजूरी
दी।
वैद्यनाथन
समिति
की
अनुशंसाओं
के
क्रियान्वयन
के लिये
राज्य
शासन,
केन्द्र
सरकार,
नाबार्ड
के साथ
वर्ष 2006
में
किये
गये
एमओयू
के
प्रावधान
अंतर्गत
सहकारी
साख
संस्थाओं
के
पदाधिकारियों
द्वारा
जानकारी
उपलब्ध
नहीं
कराये
जाने की
स्थिति
में
उन्हें
हटाये
जाने के
वर्तमान
प्रावधान
के
स्थान
पर तीन
वर्ष तक
निरर्हरित
करने का
तथा
प्राथमिक
सहकारी
संस्थाओं
के
कर्मचारियों
द्वारा
धारा 56
में 50
हजार
रुपये
तक के
शास्ति
अधिरोपित
करने के
प्रावधान
में
संशोधन
कर 5
हजार
रुपये
तक
शास्ति
लगाये
जाने का
प्रावधान
किया
गया।
साख
सहकारी
समितियों
के
मामले
में
रजिस्ट्रार
द्वारा
संबंधित
संस्थाओं
के
संचालक
मण्डल
को
परामर्श
देने का
प्रावधान
भी किया
गया है।
मंत्रिपरिषद
ने
मध्यप्रदेश
नगर तथा
ग्राम
निवेश
अधिनियम
1973 की
धारा 56
में
महत्वपूर्ण
संशोधनों
को
अनुमोदित
किया।
इनसे
विकास
प्राधिकरणों
द्वारा
तैयार
की जा
रही नगर
विकास
स्कीम
प्रदेश
में
प्रभावी
ढंग से
क्रियान्वित
की जा
सकेगी।
संशोधन
के बाद
विकास
प्राधिकरण
बिना
स्टाम्प
ड्यूटी
और
रजिस्ट्रेशन
शुल्क
के भू-स्वामियों
से भूमि
ले
सकेंगे
तथा
उनकी
भूमि को
विकसित
कर
निर्धारित
अनुपात
में भू-स्वामियों
को
उपलब्ध
करायेंगे।
इसके
साथ ही
अब
चिन्हित
क्षेत्रों
में
एफएआर
को
बढ़ाने
की
अनुमति
भी दी
जायेगी।
मंत्रिपरिषद
ने
फ्रेब्रिक्स
एवं
शक्कर
को वेट
से
मुक्त
करने के
लिये
अधिसूचना
द्वारा
किये
गये
संशोधनों
को
पूर्ववर्ती
प्रभाव
से (8-4-2011)
लागू
करने के
लिये
मध्यप्रदेश
वेट
संशोधन (विधि
मान्यताकरण)
विधेयक
2011 में
प्रस्तावित
संशोधन
को
अनुमोदित
किया।
मंत्रिपरिषद
ने
टेलीफोन
के
रिचार्ज
वाउचर्स
को कर-मुक्त
करने के
लिये
जारी
अध्यादेश
को
अधिनियमित
करने के
संबंध
में
मध्यप्रदेश
वेट (तृतीय
संशोधन)
विधेयक
2011 को भी
अनुमोदित
किया।
मंत्रिपरिषद
ने
राष्ट्रीय
विधि
संस्थान
विश्वविद्यालय
(संशोधन)
विधेयक
2011 के
प्रारूप
का भी
अनुमोदन
किया।
मंत्रिपरिषद
ने
मध्यप्रदेश
भू-राजस्व
संहिता (संशोधन)
विधेयक
2011 का
प्रारूप
भी
अनुमोदित
किया।
इनसे
राजस्व
प्रकरणों
के तेजी
से
निराकरण
हो
सकेगा।
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