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मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
अध्यक्षता
में आज
सम्पन्न
मंत्रि-परिषद्
की बैठक
में
महात्मा
गांधी
राष्ट्रीय
ग्रामीण
रोजगार
गारंटी
योजना (मनरेगा)
के तहत
किए
जाने
वाले
कार्य
को और
अधिक
व्यवहारिक
बनाने
का
निर्णय
लिया
गया
जिससे
अधिक से
अधिक
लोगों
को
रोजगार
और काम
करने
में कम
सक्षम
लोगों
को भी
अधिक
मजदूरी
मिल
सके।
योजना
के तहत
अकुशल
श्रमिक
के रूप
में किए
गए
कार्य
के आधार
पर
मजदूरी
का
भुगतान
किया
जाता
है। एक
दिन में
मजदूर
के
द्वारा
विभिन्न
निर्माण
मदों
में
न्यूनतम
कितना
कार्य
करवाया
जायेगा
इसके
लिए
दैनिक
टास्क
का
निर्धारण
राज्य
शासन
द्वारा
किया
जाता
है। यदि
दिए गए
टास्क
के
बराबर
मजदूर
काम
करता है
तो उसे
दिन की
पूरी
निर्धारित
मजदूरी
दी जाती
है।
विभिन्न
आयु
वर्ग के
महिला
एवं
पुरुष,
यहाँ तक
कि
शारीरिक
रूप से
कम
सक्षम
व्यक्ति
भी
मनरेगा
के
अंतर्गत
कार्य
पर
उपस्थित
होते
हैं और
उन्हें
कार्य
देना
वैधानिक
आवश्यकता
है। यह
महसूस
किया
गया कि
कार्य
के लिए
उपस्थित
होने
वाले
मजदूरों
को उनकी
औसत
सीमित
शारीरिक
क्षमता
के
फलस्वरूप
उनके
द्वारा
किए
तुलनात्मक
रूप से
कम
कार्य
के कारण
उन्हें
निर्धारित
दैनिक
मजदूरी
से कम
मजदूरी
प्राप्त
हो रही
है। इस
बात को
ध्यान
में
रखते
हुए
राज्य
शासन ने
टास्क
दरों की
समीक्षा
करने का
निर्णय
लिया।
प्रदेश
की
भौगोलिक
एवं
मौसमी
परिस्थितियों
तथा
योजना
के
अंतर्गत
कार्य
करने
वाले
मजदूरों
की
शारीरिक
क्षमता
को
ध्यान
में
रखते
हुए
सामान्यतः
मजदूर
द्वारा
एक दिन
में
विभिन्न
निर्माण
मदों का
कितना
कार्य
सम्पन्न
किया जा
सकता है,
इसका
वैज्ञानिक
अध्ययन
वर्ष 2009
में 9
जिलों
में
शुरू
किया
गया। यह
अध्ययन
सम्राट
अशोक
प्रौद्योगिकी
संस्थान
विदिशा,
शासकीय
अभियांत्रिकी
महाविद्यालय
उज्जैन,
राजीव
गांधी
प्रौद्योगिकी
विश्वविद्यालय
भोपाल
एवं दो
विशेषज्ञ
राज्य
गुणवत्ता
मानीटर्स
के
माध्यम
से
प्रारंभ
करवाया
गया।
इस
कार्य
में समय
एवं गति
के
अध्ययन
में समय
लगने की
संभावना
थी। अतः
श्रमिकों
के
हितों
को
ध्यान
में
रखते
हुए
शासन
द्वारा
विस्तृत
अध्ययन
के
परिणामों
की
प्रत्याशा
में
पूर्व
में
करवाये
गये
अध्ययन
के आधार
पर
मार्च 2010
में
कठोर
मिट्टी
एवं
मुरम
में
खुदाई
कार्य
के
टास्क
में
क्रमशः
20
प्रतिशत
एवं 11.76
प्रतिशत
की कमी
अंतरिम
रूप से
की गई।
टास्क
दरों की
इस
अंतरिम
वृद्धि
के 2010-11 में
अच्छे
परिणाम
सामने
आये।
जहाँ
वर्ष 2009-10
के
दौरान
प्रदेश
में 83
रुपये
औसत
मजदूरी
का
भुगतान
हुआ था
वहीं 2010-11
में 98
रुपये
औसत
मजदूरी
का
भुगतान
हुआ।
मंत्रि-परिषद्
ने
कार्य,
समय एवं
गति
अध्ययन
के
विस्तृत
परिणाम
आने के
बाद
प्राप्त
हुए
टास्क
की
तुलना
लगभग
सामान्य
भौगोलिक
परिथितियों
वाले
राज्यों
से कर
प्रदेश
में
प्रचलित
टास्क
दरों को
समग्र
रूप से
युक्तियुक्त
करने का
निर्णय
लिया
है। इस
निर्णय
के
फलस्वरूप
मार्च 2010
में की
गई कमी
को
सम्मिलित
करते
हुए
सामान्य
मिट्टी
में की
जाने
वाली
खुदाई
के लिए 16
प्रतिशत,
कड़ी
मिट्टी
में की
जाने
वाली
खुदाई
के लिए
लगभग 20
प्रतिशत,
कड़ी
मुरम
एवं
चट्टानों
में
खुदाई
के लिए
औसतन
लगभग 33
प्रतिशत
की कमी
टास्क
दरों
में की
गई है।
इसी
प्रकार
रेत,
मिट्टी
आदि के
एकत्रीकरण
में
औसतन 20
से 30
प्रतिशत
की कमी
एवं बड़े
आकार के
पत्थर
आदि के
एकत्रीकरण
में
औसतन
लगभग 38
से 50
प्रतिशत
कमी की
गई है।
इस
निर्णय
से
योजना
में काम
करने
वाले
श्रमिकों
को अधिक
दैनिक
मजदूरी
प्राप्त
होगी।
मध्य
प्रदेश
खेल
प्राधिकरण
मध्यप्रदेश
में खेल
गतिविधियों
के
बेहतर
के
संचालन
के लिए
मंत्रि-परिषद्
ने
विधान
सभा में
पारित
संकल्प
क्रमांक
54 के
अंतर्गत
मध्यप्रदेश
खेल
प्राधिकरण
के गठन
का
निर्णय
लिया।
नव
गठित
खेल
प्राधिकरण
का
मुख्य
उद्देेश्य
नई
प्रतिभाओं
की खोज
कर
प्रतिभावान
खिलाड़ियों
की
क्षमता
में
वृद्धि
करने के
उद्देश्य
से उनके
प्रशिक्षण
के लिए
अधोसंरचना
का
निर्माण
और
विकास
करना
तथा
विभाग
द्वारा
सृजित
परि-सम्पत्तियों
को
सुरक्षित
रखना
है। यह
प्राधिकरण
राज्य
स्तरीय
एवं
राष्ट्र
स्तरीय
संघों
के साथ
समन्वय
भी
करेगा।
प्राधिकरण
की
गतिविधियों
के
संचालन
के लिए
तैयार
किए गए
प्राधिकरण
के
संविधान
में
मध्यप्रदेश
खेल
नीति 2005,
मध्यप्रदेश
क्रीड़ा
परिषद्,
स्पोर्ट्स
अथारिटी
ऑफ
इंडिया
एवं
अन्य
प्रदेशों
के
प्राधिकरणों
के
प्रावधानों
का
समावेश
प्रदेश
की
आवश्यकताओं
के
अनुरूप
किया
गया है।
खेल
प्राधिकरण
के गठन
के
परिणामस्वरूप
मध्यप्रदेश
क्रीड़ा
परिषद्
विघटित
हो
जायेगी।
माध्यमिक
शिक्षा
की
वार्षिक
कार्य-योजना
मंत्रि-परिषद्
ने
स्कूल
शिक्षा
विभाग
के
अंतर्गत
राष्ट्रीय
माध्यमिक
शिक्षा
अभियान
की
वार्षिक
कार्य-योजना
वर्ष 2011-12
का
अनुमोदन
किया।
अभियान
की
वार्षिक
कार्य-योजना
के लिए ठ
9 अरब 78
करोड़ 67
लाख,
बालिका
छात्रावास
के लिए ठ
एक अरब 65
करोड़ 48
लाख,
मॉडल
स्कूल
के लिए ठ
5 अरब 84
करोड़ 14
लाख का
प्रावधान
है। इस
प्रकार
कार्य-योजना
के लिए
मंत्रि-परिषद्
ने ठ 17
अरब 28
करोड़ 29
लाख की
कार्य-योजना
का
अनुसमर्थन
किया।
अन्य
निर्णय
मंत्रि-परिषद्
ने
राज्य
शासन के
विभिन्न
विभागों,
विश्व
विद्यालयों,
सार्वजनिक
उपक्रमों
एवं
अन्य
संस्थाओं
में
वित्त
से
संबंधित
अन्य
कार्यों
के लिए
स्वीकृत
पदों पर
मध्यप्रदेश
वित्त
सेवा
संवर्ग
के
अधिकारियों
की
निरंतर
मांग को
देखते
हुए इन
संस्थाओं
में
पूर्व
से
स्वीकृत
ऐसे
पदों को
मध्यप्रदेश
वित्त
सेवा
संवर्ग
में
सम्मिलित
करने का
निर्णय
लिया।
ऐसा
करने से
संवर्ग
की
वर्तमान
प्रभावशाली
संख्या
408 से
बढ़कर 690
हो
जायेगी।
इससे
राज्य
शासन पर
अतिरिक्त
व्यय
भार
नहीं
आयेगा।
मंत्रि-परिषद्
ने
दिवंगत
शासकीय
सेवकों
के
आश्रितों
को
सहायक
ग्रेड-3
के पद पर
अनुकंपा
नियुक्ति
के लिए
हिन्दी
मुद्रलेखन
परीक्षा
एवं
कम्प्यूटर
डिप्लोमा/
परीक्षा
मान्यता
प्राप्त
संस्था
से
उत्तीर्ण
करने के
लिए 3
वर्ष का
समय
देने का
निर्णय
लिया।
तीन
वर्ष
में
उक्त
परीक्षाएँ
उत्तीर्ण
न करने
पर
नियोक्ता
अधिकारी
संबंधित
कर्मचारी
द्वारा
परीक्षाएँ
उत्तीर्ण
करने के
प्रयासों
और
अर्जित
की गई
टाइपिंग
क्षमता
को
देखते
हुए एक
वर्ष की
अवधि और
बढ़ा
सकता
है। इस
अवधि के
व्यतीत
होने के
बाद भी
कर्मचारी
द्वारा
परीक्षा
उत्तीर्ण
न करने
पर उसकी
सेवाएँ
समाप्त
की जा
सकेंगी।
दिवंगत
शासकीय
सेवक के
पुत्र/पुत्री
द्वारा
अनुकंपा
नियुक्ति
के
पश्चात्
एक वर्ष
की
वर्तमान
अवधि
में
हिन्दी
मुद्रलेखन
परीक्षा
उत्तीर्ण
नहीं
करने के
कारण
उनकी
सेवाएँ
समाप्त
किए
जाने के
संबंध
में
मार्गदर्शन
के लिए
प्रकरण
सामान्य
प्रशासन
विभागा
को
प्राप्त
हो रहे
हैं।
वर्तमान
में
दिवंगत
शासकीय
सेवक की
धर्मपत्नी
के लिए
सहायक
ग्रेड -3
के पद पर
अनुकंपा
नियुक्ति
के लिए
हिन्दी
मुद्रलेखन
परीक्षा
उत्तीर्ण
करने
एवं
कम्प्यूटर
संचालन
के
ज्ञान
के लिए 3
वर्ष का
समय
दिया
जाता
है।
अन्य
आश्रितों
के लिए
एक वर्ष
की
समयावधि
निर्धारित
है। इस
निर्णय
के
फलस्वरुप
अब अन्य
आश्रितों
को भी इन
परीक्षाओं
को
उत्तीर्ण
करने के
लिए 3
वर्ष का
समय
मिलेगा।
मंत्रि-परिषद्
ने जन-संकल्प
10 की
पूर्ति
के
परिप्रेक्ष्य
में
असंगठित
क्षेत्र
के
मजदूरों
के
कल्याण
के लिए
अपर
श्रमायुक्त
के नवीन
पद का
सृजन
किए
जाने का
निर्णय
लिया।
उनका
मुख्यालय
भोपाल
रहेगा।
मंत्रि-परिषद्
ने अखिल
भारतीय
दयानंद
सेवाश्रम
संघ नई
दिल्ली,
शाखा
थांदला
जिला
झाबुआ
द्वारा
मध्यप्रदेश
में
आदिवासियों
के
शैक्षणिक
विकास
संबंधी
श्रेष्ठ
कार्य
को
देखते
हुए
अनुदान
नियम
एवं
मध्यप्रदेश
में
पंजीयन
करवाने
के
प्रावधान
से 10
वर्ष की
छूट
प्रदान
करने का
निर्णय
लिया।
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