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मध्यप्रदेश
में
स्कूल न
जाने
वाले
शेष 72
हजार
बच्चों
को
स्कूल
में
दाखिला
दिलाने
के लिये
17 जून से
स्कूल
चले
अभियान
शुरू
किया
जायेगा।
16 जून से
पहले
अतिथि
शिक्षकों
की
भर्ती
कर ली
जायेगी
और
मुफ्त
पाठ्यपुस्तकों
का पहले
वितरण
हो
जायेगा।
नये
बच्चों
को 16 जून
से 23 जून
के बीच
पुस्तकें
मिल
जायेंगी।
इसके
अलावा
जलाभिषेक
अभियान
और कृषि
उत्पादन
वृद्धि
अभियान
भी एक
साथ
चलाये
जायेंगे।
स्वास्थ्य
एवं
आवास
मंत्री
तथा
मध्यप्रदेश
शासन के
प्रवक्ता
डॉ.
नरोत्तम
मिश्रा
ने
बताया
कि
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
अध्यक्षता
में आज
सम्पन्न
मंत्रिपरिषद
के बैठक
में इन
तीनों
अभियानों
के
संबंध
में
प्रस्तुतिकरण
दिया
गया और
इनके
संचालन
के
संबंध
में
चर्चा
की गई।
जलाभिषेक
अभियान
के
अंतर्गत
नदियों
को
पुनर्जीवित
करने, जल
स्वावलम्बी
गाँव के
विकास,
भागीरथ
कृषकों
को
प्रोत्साहित
करने,
पुरानी
जल
संग्रह
संरचनाओं
की
मरम्मत
और उनके
नवीनीकरण
के
संबंध
में
तैयार
नीति को
तत्परता
से
क्रियान्वित
किया
जायेगा।
मंत्रिपरिषद
ने इस
संबंध
में
तैयार
की गई
कार्ययोजना
पर भी
विचार
किया।
कार्ययोजना
के तहत
जिला जल
संसद का
आयोजन
होगा।
साथ ही
जनपद जल
सम्मेलनों,
जल
यात्राओं
तथा नदी
संवादों
के
आयोजन
भी किये
जायेंगे।
हर गाँव
में
नौजवानों
और
बुर्जुगों
के बीच
जल
संरक्षण
के
संबंध
में
खुले
संवाद
का
आयोजन
किया
जायेगा।
इससे
नौजवानों
को
बुर्जुगों
के पास
जो
पारम्परिक
ज्ञान
है उसका
लाभ मिल
सकेगा।
जलाभिषेक
अभियान
के
दौरान 5
हजार 678
कार्य
भागीरथ
कृषकों
द्वारा
सम्पादित
किये
गये
हैं। इन
कृषकों
को
सम्मानित
किया
जायेगा।
इन
किसानों
ने अपनी
जमीन पर
जल
संरचनाएं
बनाई
हैं। इन
कार्यों
पर 68
करोड़
रूपये
की राशि
खर्च
हुई।
कृषि
उत्पादन
वृद्धि
के
संबंध
में
संचालित
किये
जाने
वाले
अभियान
के तहत
खरीफ
उत्पादन
को चार
प्रतिशत
से
बढ़ाकर
दस
प्रतिशत
किये
जाने के
प्रयास
किये
जायेंगे।
साथ ही
दलहन
क्षेत्र
को 10 लाख 87
हजार
हेक्टेयर
से
बढ़ाकर
12 लाख
हेक्टेयर
किया
जायेगा।
यह
सुनिश्चित
किया
जायेगा
कि
किसानों
को
उपचारित
बीज
प्राप्त
हों।
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने सख्त
निर्देश
दिये कि
नकली
खाद बीज
बेचने
वालों
के
खिलाफ
सख्त
कार्यवाही
की
जाये।
बैठक
में
खरीफ
अभियान
में
फसलोन्मुखी,
किसानोन्मुखी
और
ग्रामोन्मुखी
नीति
अपनाये
जाने पर
चर्चा
हुई और
निर्णय
लिया
गया कि
जल
स्वावलम्बी
गाँव के
साथ ही 40
हेक्टेयर
से कम
क्षमता
के
तालाबों
और
चेकडेमों
का
निर्माण
किया
जाये।
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