मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
अध्यक्षता
में आज
सम्पन्न
मंत्रिपरिषद
की बैठक
में
सर्वशिक्षा
अभियान
की वर्ष
2010-11 की
कार्ययोजना
और बजट
का
अनुमोदन
किया
गया।
प्रदेश
में
शिक्षा
के
लोकव्यापीकरण
के
लक्ष्यों
को
प्राप्त
करने के
लिये
सर्वशिक्षा
अभियान
का
क्रियान्वयन
किया जा
रहा है।
इस
कार्यक्रम
का
मुख्य
उद्देश्य
समुदाय
के
सहयोग
से
गुणवत्तायुक्त
शिक्षा
प्रदान
करना
है।
शिक्षा
का
अधिकार
अधिनियम
के
क्रियान्वयन
के लिये
केन्द्र
सरकार
द्वारा
वार्षिक
कार्ययोजना
एवं बजट
वर्ष 2010-11
की
मंजूरी
देने के
उपरांत
राज्य
मंत्रिपरिषद
ने भी आज
इसका
अनुमोदन
किया।
वार्षिक
कार्ययोजना
2010-11 के
अंतर्गत
सर्वशिक्षा
अभियान
के लिये
कुल
राशि 386584.975
लाख
रुपये,
एन.पी.ई.जी.ई.एल.
के लिये
कुल
राशि 5963.173
लाख
रुपये
और
कस्तूरबा
गाँधी
विद्यालयों
के लिये
6892.242 लाख
रुपये
के
वार्षिक
बजट का
अनुमोदन
किया
गया है।
स्वीकृत
वार्षिक
योजना 2010-11
के
अंतर्गत
प्रदेश
में
शिक्षा
सुविधाओं
के
विस्तार
के
उद्दैश्य
से 378
नवीन
प्राथमिक
शाला
खोले
जाने का
लक्ष्य
निर्धारित
किया
गया है।
ऐसी
प्रत्येक
प्राथमिक
शाला
में दो
संविदा
शिक्षकों
के
अनुसार
संविदा
शिक्षकों
के कुल 756
पदों की
मंजूरी
दी गई
है।
प्रदेश
में
खोले
जाने
वाली 378
इन नवीन
प्राथमिक
शालाओं
में
शैक्षणिक
सामग्री,
उपकरण
के लिये
20 हजार
रुपये
प्रत्येक
शाला
अनुसार
राशि
उपलब्ध
कराई
जायेगी।
इसके
साथ ही
प्रदेश
की 920
प्राथमिक
शालाओं
को
माध्यमिक
शाला
में
उन्नयन
करने का
लक्ष्य
है।
प्रत्येक
ऐसी
माध्यमिक
शाला
में तीन
संविदा
शिक्षकों
के पदों
की
व्यवस्था
के
अनुसार
संविदा
शिक्षकों
के कुल
दो हजार
760 पद
स्वीकृत
किये
गये
हैं।
उन्नयन
की जाने
वाली
सभी 920
माध्यमिक
शालाओं
में से
प्रत्येक
माध्यमिक
शाला को
शैक्षिक
सामग्री
उपकरण
के लिये
50 हजार
रुपये
प्रति
शाला
अनुसार
राशि
मिलेगी।
वार्षिक
कार्ययोजना
2010-11 में
प्रदेश
की 86
हजार 653
प्राथमिक
शालाओं
को शाला
निधि के
रूप में
प्रति
शाला
पांच
हजार
रुपये
और
प्रदेश
की 28
हजार 14
माध्यमिक
शालाओं
को
प्रति
शाला 7
हजार
रुपये
शाला
निधि
प्रदान
की
जायेगी।
राज्य
की
प्राथमिक
एवं
माध्यमिक
शाला के
प्रत्येक
शिक्षक
को
शिक्षक
निधि के
रूप में
500 रुपये
दिये
जायेंगे।
यह राशि
प्राथमिक
शाला के
दो लाख
चार
हजार 458
शिक्षकों
को और
माध्यमिक
शाला के
86 हजार 216
शिक्षकों
को दी
जायेगी।
इसी
प्रकार
प्रदेश
की ऐसी 74
हजार 378
शालाएं
जहां
तीन
कक्ष तक
स्थान
उपलब्ध
है, वहां
पांच
हजार
रुपये
प्रति
शाला और
तीन
कक्ष से
अधिक
वाली 29
हजार 979
शालाओं
को
प्रति
शाला 10
हजार
रुपये
अनुसार
शाला
मेंटेनेंस
निधि
सुलभ
होगी।