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मध्यप्रदेश
शासन,
संस्कृति
विभाग
द्वारा
विभिन्न
कलाओं
और
साहित्य
के
क्षेत्र
में
प्रतिवर्ष
15
राष्ट्रीय
और
3
राज्यस्तरीय
सम्मान
दिये
जाते
हैं।
लता
मंगेशकर
सम्मान
सुगम
संगीत
के
लिए
दिया
जाने
वाला
राष्ट्रीय
अलंकरण
है।
इसके
अंतर्गत
सम्मानित
कलाकार
को
दो
लाख
रुपये
की
राशि
और
प्रशस्ति
पट्टिका
भेंट
की
जाती
है।
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राष्ट्रीय
लता
मंगेशकर
सम्मान |
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1. |
श्री
नौशाद |
1984-85 |
|
2. |
श्री
किशोर
कुमार |
1985-86 |
|
3. |
श्री
जयदेव |
1986-87 |
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4. |
श्री
मन्ना
डे |
1987-88 |
|
5. |
श्री
खय्याम |
1988-89 |
|
6. |
सुश्री
आशा
भोसले |
1989-90 |
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7. |
श्री
लक्ष्मीकांत
-
श्री
प्यारेलाल |
1990-91 |
|
8. |
श्री
येसुदास |
1991-92 |
|
9. |
श्री
राहुलदेव
बर्मन |
1992-93 |
|
10. |
श्रीमती
संध्या
मुखर्जी |
1993-94 |
|
11. |
श्री
अनिल
विश्वास |
1994-95 |
|
12. |
श्री
तलत
महमूद |
1995-96 |
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13. |
श्री
कल्याण
जी
-
श्री
आनन्द
जी |
1996-97 |
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14. |
श्री
जगजीत
सिंह |
1997-98 |
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15. |
श्री
इलिया
राजा |
1998-99 |
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16. |
श्री
एस.पी.
बालसुब्रमण्यम् |
1999-00 |
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17. |
श्री
भूपेन
हजारिका |
2000-01 |
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18. |
श्री
महेन्द्र
कपूर |
2001-02 |
|
19. |
श्री
रवीन्द्र
जैन |
2002-03 |
|
20. |
श्री
सुरेश
वाडकर |
2003-04 |
|
21. |
श्री
ए.आर.
रहमान |
2004-05 |
|
22. |
सुश्री
कविता
कृष्णमूर्ति |
2005-06 |
|
23. |
श्री
हृदयनाथ
मंगेशकर |
2006-07 |
|
24. |
श्री
नितिन
मुकेश |
2007-08 |
|
25. |
श्री
रवि |
2008-09 |
|
26. |
श्री
अनुराधा
पौडवाल |
2009-10 |
|
सुगम
संगीत
के
क्षेत्र
में
कलात्मक
श्रेष्ठता
को
प्रोत्साहित
करने
की
दृष्टि
से
1984
में
लता
मंगेशकर
सम्मान
स्थापित
किया
गया।
यह
सम्मान
बारी-बारी
से
संगीत
रचना
और
गायन
के
लिए
दिया
जाता
है।
सम्मान
उत्कृष्टता,
दीर्घसाधाना
और
श्रेष्ठ
उपलब्धि
के
भरसक
निविर्वाद
मानदंडों
के
आधार
पर
सुगम
संगीत
के
क्षेत्र
में
देश
की
किसी
भी
भाषा
के
गायक
अथवा
संगीत
रचनाकार
को
उसके
सम्पूर्ण
कृतित्व
पर
दिया
जाता
है,
न
कि
किसी
एक
कृति
के
आधार
पर।
सम्मान
केवल
सृजनात्मक
कार्य
के
लिए
है,
शोधा
अथवा
अकादेमिक
कार्य
के
लिए
नहीं।
सम्मान
के
लिये
चुने
जाने
के
समय
कलाकार
का
सृजन-सक्रिय
होना
आवश्यक
है।
संस्कृति
विभाग
देश
भर
के
सुगम
संगीत
के
क्षेत्र
में
संबंधित
कलाकारों,
विशेषज्ञों,
संस्थाओं
तथा
समाचार
पत्रों
में
प्रकाशित
विज्ञापनों
के
माध्यम
से
पाठकों
एवं
कला
रसिकों
को
नामांकन
एवं
अनुशंसा
के
लिए
निर्धारित
प्रपत्र
जारी
करता
है।
प्राप्त
नामांकन
संस्कृति
विभाग
द्वारा
गठित
निर्णायक
समिति
के
समक्ष
अंतिम
निर्णय
के
लिए
प्रस्तुत
किए
जाते
हैं।
इस
समिति
में
राष्ट्रीय
ख्याति
के
कलाकार,
विद्वान
और
कला-मर्मज्ञ
होते
हैं।
यह
समिति,
प्राप्त
नामांकनों/अनुशंसाओं
पर
विचार
करती
है।
समिति
को
स्वतंत्रता
होती
है
कि
यदि
आवश्यक
समझे
तो
वे
नाम
भी
इसमें
जोड़
ले
जो
समिति
की
दृष्टि
में
विचारयोग्य
हों।
निर्णायक
समिति
की
अनुशंसा
को
शासन
ने
अपने
लिए
बंधनकारी
माना
है
और
सदैव
निरपवाद
रूप
से
इसका
पालन
किया
है।
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