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देवी
अहिल्या
बाई
कुशल
शासिका,
न्यायविद,
सच्ची
समाज
सेविका
और
कलाप्रिय
विदुषी
थीं।
वे
स्नेह,
दया
और
धर्म
की
प्रतिमूर्ति
थीं।
अहिल्याबाई
महिला
शक्ति
की
प्रतीक
हैं।
उनका
जीवन
और
कार्य
समस्त
स्त्री
जाति
के
लिए
एक
उदाहरण
है।
उनकी
स्मृति
में
देश
की
सृजनशील
महिलाओं
के
सम्पूर्ण
अवदान
के
लिए
देवी
अहिल्या
सम्मान
दिया
जाना
सुनिश्चित
किया
गया
है।
मध्यप्रदेश
शासन
ने
आदिवासी,
लोक
एवं
पारम्परिक
कलाओं
के
क्षेत्र
में
महिला
कलाकारों
की
सृजनात्मकता
को
सम्मानित
करने
के
लिए
वर्ष
1996-97
से
देवी
अहिल्या
सम्मान
स्थापित
किया
है।
इस
सम्मान
से
विभूषित
कलाकार
को
एक
लाख
रुपये
की
राशि
और
प्रशस्ति
पट्टिका
प्रदान
की
जाती
है।
देवी
अहिल्या
सम्मान
सृजनात्मक,
उत्कृष्टता,
दीर्घ
साधना
और
कलाकार
की
वर्तमान
में
सृजन
सक्रियता
के
मानदण्डों
के
आधार
पर
दिया
जाता
है।
सम्मान
दिये
जाने
के
समय
चुने
गये
कलाकार
का
सृजन
सक्रिय
होना
अनिवार्य
है।
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राष्ट्रीय
देवी
अहिल्या
सम्मान
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1. |
श्रीमती
तीजन
बाई |
1996-97 |
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2. |
श्रीमती
विंध्यवासिनी
देवी |
1997-98 |
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3. |
श्रीमती
भूरी
बाई |
1998-99 |
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4. |
श्रीमती
यमुनाबाई
वाईकर |
1999-00 |
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5. |
श्रीमती
सुरूज
बाई
खाण्डे |
2000-01 |
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6. |
सुश्री
सारा
इब्राहीम |
2001-02 |
|
7. |
श्रीमती
गुरमीत
बावा |
2002-03 |
|
8. |
श्रीमती
राज
बेगम |
2003-04 |
|
9. |
सुश्री
रुकमा
देवी
मांगणियार |
2004-05 |
|
10. |
श्रीमती
शारदा
सिन्हा |
2005-06 |
|
11. |
सुश्री
गौरी
देवी |
2006-07 |
|
12. |
डा.
शांति
जैन |
2007-08 |
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