कुछ
साल
पहले तक
विकास
की बाट
जोह रहे
मध्यप्रदेश
के
हजारों
गाँव अब
तरक्की
के नये
आयाम छू
रहे
हैं।
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने
गाँवों
की
तस्वीर
और
ग्रामीणों
की
तकदीर
बदलने
के मकसद
से जो
अनेक
कल्याणकारी
योजनाएँ
और
कार्यक्रम
शुरू
किए हैं,
उनसे
ग्रामीण
अंचलों
में
तरक्की
के साथ-साथ
सुखद
बदलाव
साफ नजर
आ रहा
है।
सूचना
प्रौद्योगिकी
के
इस्तेमाल
से अब
ग्रामीण
इलाकों
में
विकास
का नया
सफर
शुरू हो
रहा है
और
पंचायतों
को अब ई-पंचायत
के रूप
में देश,
प्रदेश
और
दुनिया
से
जोड़ने
की नई
पहल
शुरू हो
चुकी
है।
संपर्क
विहीन
गाँवों
की
तरक्की
के लिए
राज्य
में
चहुँ ओर
बारहमासी
सड़कों
का
निर्माण
तेज गति
से हो
रहा है।
पहुँच
विहीन
और
दुर्गम
इलाकों
के
गाँवों
के लिए
पहुँच
मार्गों
के
निर्माण
से अब वे
विकास
की
मुख्य
धारा से
जुड़
रहे
हैं।
गाँवों
में
स्वच्छता
और
पर्यावरण
सुधार
के लिए
आंतरिक
मार्ग
और
नालियों
का
निर्माण
प्राथमिकता
से हो
रहा है।
पंचायत
भवनों
की
मरम्मत,
नए
पंचायत
भवनों
का
निर्माण,
आँगनवाड़ी
भवन और
पंचायत
भवनों
में
अतिरिक्त
कमरों
के
निर्माण
से गाँव
नए
स्वरूप
में
नज़र आ
रहे
हैं।
गरीब
तबकों
के
आर्थिक
उत्थान
के मकसद
से
उन्हें
आजीविका
के नए
साधन
सुलभ
कराए जा
रहे
हैं।
ग्रामीण
श्रमिकों
और
महिलाओं
के
रोजगार
का भी
खास
ख्याल
रखा जा
रहा है।
पंच
परमेश्वर
योजना
पंच
परमेश्वर
योजना
में
ग्राम
पंचायतों
को
वित्तीय
वर्ष
में
जनसंख्या
के मान
से
एकजाई
राशि
मिलेगी।
वर्ष 2011-12
में
राज्य
की 23 हजार
12 ग्राम
पंचायतों
को करीब
1500 करोड़
और वर्ष
2012-13 में
करीब 1900
करोड़
सहित दो
वर्षों
में
लगभग 3400
करोड़
रूपये
मिलेंगे।
योजना
में दो
हजार तक
की
जनसंख्या
वाली
ग्राम
पंचायत
को 5 लाख
तक, दो
हजार एक
से पाँच
हजार तक
की
जनसंख्या
वाली
ग्राम
पंचायत
को 8 लाख
तक, पाँच
हजार एक
से दस
हजार तक
की
जनसंख्या
वाली
ग्राम
पंचायत
को 10 लाख
तक और दस
हजार एक
से अधिक
की
जनसंख्या
वाली
ग्राम
पंचायत
को 15 लाख
तक की
एकजाई
राशि
प्रदान
की
जाएगी।
अब
तक
पंचायतों
को
विभिन्न
योजनाओं
में
मिलने
वाली
राशि
टुकड़ों
में
मिलती
थी इस
वजह से
गाँवों
के
विकास
के काम
भी
टुकड़ों
में
होते
थे।
योजना
से इस
खामी को
दूर
करने
में मदद
मिलेगी
और
एकजाई
राशि से
विकास
के काम
तेजी से
पूरे
होंगें।
नई
योजना
के
जरिये
अब
प्रत्येक
पंचायत
को
तेरहवें
वित्त
आयोग और
तीसरे
राज्य
वित्त
आयोग के
अनुसार
राशि
मिलेगी।
जिन
पंचायतों
को पंच
परमेश्वर
योजना
में इन
दोनों
योजनाओं
में कम
राशि
मिलेगी
उनमें
इस कमी
को अब
स्टॉम्प
ड्यूटी
और खनिज
से
मिलने
वाली
राशि से
पूरा
किया
जायेगा।
जिन
पंचायतों
को अब तक
ज्यादा
राशि
मिल रही
है वे
योजना
में
मिलने
वाली
राशि के
उपयोग
के बाद
अतिरिक्त
राशि ले
सकेंगी।
ग्राम
पंचायतों
को अब
आबादी
के मान
से पहले
दो वर्ष
के लिए
अतिरिक्त
एकीकृत
कार्य
योजना
बनाने
का
सुझाव
भी दिया
गया है।
कार्य
योजना
में
गाँवों
में
नाली
सहित
आंतरिक
रोड और
जिन
गाँवों
में
पहले से
आँगनवाड़ी
भवनों
की
मंजूरी
मिल
चुकी है
वहाँ
भवनों
का
निर्माण
होगा।
ग्राम
पंचायतों
के
पुराने
भवनों
में ई-पंचायत
व्यवस्था
के लिए
निर्धारित
नक्शों
के
अनुसार 200
वर्गफीट
आकार के
ई-पंचायत
कक्ष का
निर्माण
होगा।
ग्राम
पंचायत
दस
फीसदी
राशि
परिसम्पत्तियों
के रख-रखाव
और सफाई
कार्यों
पर खर्च
कर
सकेगीं।
महात्मा
गाँधी
रोजगार
गारंटी
योजना
राज्य
में
महात्मा
गाँधी
राष्ट्रीय
ग्रामीण
रोजगार
गारंटी
योजना
के
जरिये
शुरूआत
से अब तक
बुनियादी
विकास
कार्यों
और
ग्रामीणों
की
बेहतरी
के लिये 17
हजार 730
करोड़ 26
लाख की
राशि
खर्च की
गई है।
इससे 9
लाख 78
हजार से
अधिक
कार्य
हुए
हैं।
ग्रामीण
मजदूरों
को 132
करोड़
मानव
दिवसों
का
रोजगार
उपलब्ध
करवाया
गया है।
योजना
के
बेहतर
क्रियान्वयन
और सतत
पर्यवेक्षण
से जहाँ
ग्रामीण
अँचलों
के
आर्थिक
विकास
को नई
दिशा
मिली है,
वहीं
रोजगार
के अभाव
में
ग्रामीण
श्रमिकों
के
पलायन
को भी
रोकने
में
कामयाबी
मिली
है।
मनरेगा
में
मजदूर
और
सामग्री
अनुपात
में 60 और 40
का
अनुपात
सख्ती
से लागू
किया
गया है।
मनरेगा
में
ग्रामीण
क्षेत्रों
में
सामुदायिक
विकास
की कई
अनूठी
योजनाएँ
प्रदेश
में
शुरू की
गई हैं,
वहीं
हितग्राहीमूलक
योजनाओं
के
अनूठेपन
से अन्य
राज्यों
में भी
उनका
अनुसरण
किया जा
रहा है।
आंतरिक-पथ
नाम से
शुरू की
गई ऐसी
ही एक उप-योजना
में
ग्रामीण
अँचलों
में
अधोसंरचना
सुदृढ़ीकरण
कार्यों
के जरिए
ग्रामों
के
आंतरिक
मार्गों
को
बनाया
जा रहा
है। इसी
तरह
शांतिधाम
उप-योजना
में
ग्रामीण
अँचलों
में
श्मशान
घाट और
कब्रिस्तान
की भूमि
का
विकास
किया जा
रहा है।
कामधेनु
उप
योजना
में इन
गौ-शालाओं
के
पहुँच
मार्ग,
कूप, लघु
तालाब,
चारागाह
विकास
और खाद
की
आपूर्ति
के लिये
खंती का
निर्माण
कार्य
करवाया
जाता
है।
कपिलधारा
योजना
पात्र
हितग्राहियों
को निजी
स्वामित्व
की कृषि
भूमि पर
सिंचाई
सुविधाएँ
सुलभ
करवाई
जा रही
हैं।
इनमें
सिंचाई
कूप,
स्टॉप-डेम,
खेत-तालाब,
लघु
तालाब
आदि
शामिल
हैं।
प्रदेश
में इस
योजना
में अब
तक इस
तरह की 2
लाख 16
हजार
संरचनाएँ
बनाई जा
चुकी
हैं। इन
पर 2,341
करोड़ 69
लाख की
राशि
व्यय की
गई है।
नंदन
फलोद्यान
उप-योजना
में आम,
अंगूर,
केला के
फलोद्यान
विकसित
करने के 31
हजार 987
कार्य
पूर्ण
किये जा
चुके
हैं। इन
पर 97.33
करोड़
की राशि
खर्च
हुई है।
मीनाक्षी
योजना
में
पात्र
हितग्राहियों
की निजी
भूमि पर
सिंचाई
तालाब
अथवा
पोखर
द्वारा
सिंचाई
के साथ
ही
मत्स्य-पालन
और
मत्स्य-बीज
उत्पादन
की
अतिरिक्त
गतिविधियों
से
ग्रामीणों
की
आजीविका
को
सुदृढ़
बनाया
जा रहा
है।
वनवासी
संवर्द्धन
योजना
में
वनवासियों
के
खेतों
में
कपिलधारा
कूप, खेत-तालाब,
लघु
तालाब,
भूमि-समतलीकरण,
भूमि को
सीढ़ीनुमा
विकसित
कर
उपजाऊ
बनाने,
मेढ़-बँधान,
नाडेप
पिट और
नंदन
फलोद्यान
योजनाओं
से
लाभान्वित
किया
जायेगा।
बारहमासी
सड़कों
का
निर्माण
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
में अब
प्रदेश
में 800 से 999
की
आबादी
वाले 2,494
गाँवों
को
बारहमासी
सड़कों
से
जोड़ने
का
कार्य
शीघ्र
शुरू
होगा।
योजना
में इन
गाँवों
को
सड़कों
से
जोड़ने
के लिये
8,338
किलोमीटर
लम्बी
सड़कें
बनेंगी।
उल्लेखनीय
है कि
योजना
में एक
हजार की
आबादी
वाले
सभी
गाँवों
को
सड़कों
से
जोड़ने
के
उद्देश्य
से वर्ष
2009 तक
केन्द्र
से
मंजूरी
हासिल
हो गई
थी। अब
प्रदेश
में 800 से 999
तक की
आबादी
वाले
गाँवों
को
सड़कों
से
जोड़ने
के
प्रस्ताव
भेजे
जाने के
बारे
में
केन्द्र
की
सहमति
मिल
चुकी
है।
केन्द्र
ने एक
हजार से
कम
आबादी
के
गाँवों
में 4
हजार
किलोमीटर
लम्बाई
की
सड़कें
और
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
के
बकाया
रह गये 169
पुलों
के
निर्माण
के लिये
सैद्धांतिक
सहमति
दे दी
है।
मध्यप्रदेश
देश का
प्रथम
राज्य
है जिसे
800 से 999
आबादी
वाले
गाँवों
को
सड़कों
से
जोड़ने
की
स्वीकृति
सबसे
पहले
मिली
है। इन
सड़कों
के साथ
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
की
निर्मित
सड़कों
पर छूटे
हुए 169
बड़े
पुलों
के
निर्माण
की
सैद्धांतिक
स्वीकृति
भी
प्रदेश
को दी गई
है। इन
पुलों
से
प्रदेश
के सभी
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
के
ग्रामों
को
बारहमासी
सम्पर्क
की
सुविधा
मिल
जायेगी।
योजना
में अब
तक 48 हजार
376
किलोमीटर
सड़कें
बनाकर
प्रदेश
योजना
के
क्रियान्वयन
मेंे
देश में
अग्रणी
है।
प्रदेश
में इस
योजना
में
एडीबी
की
सहायता
से 22
जिलों
में 1,187
किलोमीटर
की 234
बारहमासी
सड़कों
का भी
निर्माण
होगा।
मुख्यमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
में
वर्ष 2013
तक
राज्य
के
पहुँचविहीन
9109
गाँवों
को
बारहमासी
सड़कों
से जोड़
दिया
जायेगा।
योजना
के जरिए
तीन
चरणों
में 3296
करोड़
की लागत
से पुल-पुलियों
सहित 19
हजार 386
किलोमीटर
लम्बी 7575
ग्रेवल
रोड का
निर्माण
होगा।
राज्य
में
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
के लाभ
से
वंचित
सामान्य
क्षेत्र
के 500 तक
के
आबादी
वाले
गाँव और
आदिवासी
बहुल
अंचलों
के 250 से
कम
आबादी
वाले
गाँव इस
योजना
में
शामिल
किये
गये
हैं।
प्रदेश
में अब
तक 16
जिलों
में 106
किलोमीटर
लम्बी 59
बारहमासी
सड़कों
और 2883
पुलियों
का
निर्माण
पूरा हो
चुका
है। साथ
ही 3326
किलोमीटर
इम्बैकमेंट
कार्य
तथा 1719
किलोमीटर
सबग्रेड
कार्य
पूरा कर
लिया
गया है ।
मौजूदा
वर्ष के
अंत तक
प्रदेश
के 77 गाँव
पक्की
सड़कों
से जुड़
जायेंेगे।
राज्य
के जो
ग्राम
अब तक
पक्की
सड़कों
से जुड़
चुके
हैं
उन्हें
शीघ्र
ही सीसी
रोड के
रूप में
मुख्य
सड़कों
से
जोड़ा
जायेगा।
नक्सल
प्रभावित
गाँवों
के
विकास
की
एकीकृत
कार्ययोजना
नक्सल
प्रभावित
अँचलों
में
जनहित
से
जुड़े
विकास
कार्यों
को
प्राथमिकता
से पूरा
करने
में
मध्यप्रदेश
देश के
आठ अन्य
राज्यों
से
अग्रणी
बना हुआ
है।
प्रदेश
में
एकीकृत
कार्ययोजना
(आईएपी)
के
जरिये
बड़े
पैमाने
पर
बारहमासी
पक्की
सड़कों,
बिजली,
पेयजल,
आँगनवाड़ी
भवन
जैसे
निर्माण
तेजी से
पूरे हो
रहे
हैं।
योजना
के सतत
पर्यवेक्षण
से
निर्माण
कार्यों
की
गुणवत्ता
सुनिश्चित
हुई है।
इस
केन्द्रीय
योजना
में
मध्यप्रदेश
के
अनूपपुर,
मण्डला,
बालाघाट,
डिण्डोरी,
सिवनी,
शहडोल,
उमरिया
तथा
सीधी और
सिंगरौली
जिले
शामिल
किये
गये
हैं।
योजना
में
प्रदेश
को अब तक
सवा 290
करोड़
रुपये
की राशि
हासिल
हुई है।
अब तक
सवा 419
करोड़
लागत के
पाँच
हजार से
ज्यादा
विकास
कार्य
इन
जिलों
में चल
रहे
हैं। अब
तक 1429 काम
पूरे हो
चुके
हैं।
नक्सल
प्रभावित
अंचलों
में
खासकर
ग्रामीण
सड़कों,
पेयजल,
बिजली,
आँगनवाड़ी
भवन
निर्माण
जैसे
कार्य
प्रमुखता
से
करवाये
जा रहे
हैं।
समग्र
स्वच्छता
अभियान
समग्र
स्वच्छता
अभियान
में
राज्य
में
पाँच
हजार की
आबादी
वाले
सभी
गाँव के
शत-प्रतिशत
घरों
में
शौचालयों
का
निर्माण
सुनिश्चित
किया जा
रहा है।
बड़ी
तादाद
में
ग्राम
पर्यावरण
सुधार
और
स्वच्छता
के
कार्यक्रमों
को लागू
कर
निर्मल
ग्राम
बन रहे
हैं।
बेेघरों
को मकान
केन्द्र
द्वारा
इंदिरा
आवास
योजना
में
मध्यप्रदेश
को
बिहार,
आन्ध्रप्रदेश
और केरल
जैसे
राज्यों
की
तुलना
में
बहुत कम
इंदिरा
आवास
आवंटित
किए जा
रहे
हैं।
मध्यप्रदेश
जैसे
विशाल
राज्य
में
रहने
वाले
बेघर
ग्रामीणों
के
स्वयं
के घर का
सपना
पूरा
करने के
मकसद से
प्रदेश
में
मुख्यमंत्री
अंत्योदय
आवास
योजना
और
मुख्यमंत्री
आवास
मिशन का
क्रियान्वयन
किया जा
रहा है।
आवास
योजना
में
अनुसूचित
जाति/जनजाति
के
प्रत्येक
हितग्राही
को 45 हजार
रूपये
का
अनुदान
दिया जा
रहा है।
आवास
मिशन
में
आवासहीन
ग्रामीणों
को 30 हजार
रूपये
का बैंक
ऋण तथा 30
हजार
रुपये
अनुदान
एवं 10
हजार
रूपये
हितग्राही
अंशदान
के रूप
में रखा
गया है।
बैंकिंग
सुविधाओं
का
विकास
राज्य
के सभी 52
हजार
गाँवों
तक बैंक
सुविधाएँ
सुलभ
कराने
का
कार्यक्रम
शुरू
किया
गया है।
प्रदेश
के
ग्रामीण
इलाकों
में अब
हर पाँच
किलोमीटर
के
दायरे
में
बैंकिंग
सुविधाएँ
उपलब्ध
होंगी।
ग्रामीणों
को
विभिन्न
शासकीय
योजनाओं
का लाभ
आसानी
से मिल
सके, इस
मकसद से
अब एक ही
बैंक
खाते
में
विभिन्न
योजनाओं
की राशि
जमा
कराने
की
व्यवस्था
सुनिश्चित
होगी।
आजीविका
और
रोजगार
प्रदेश
के
चुनिंदा
जिलों
में
जिला
गरीबी
उन्मूलन
परियोजना
पर
सफलता
से अमल
किया जा
रहा है।
परियोजना
वर्ष 2014
तक जारी
रहेगी।
परियोजना
का
द्वितीय
चरण
चुनिंदा
14 जिलों
में
अक्टूबर
2009 से
शुरू
हुआ है।
पाँच
वर्षीय
इस चरण
की लागत
लगभग
रूपये 540
करोड़
है।
परियोजना
से
ग्रामीण
गरीब
परिवारों
विशेषकर
महिलाओं
के
सशक्तिकरण
और उनकी
आय
वृद्धि
में
बड़ी
सफलता
मिली
है। अब
तक करीब
दो लाख
गरीब
महिलाओं
को लगभग 16
हजार 466
स्व-सहायता
समूहों
के रूप
में
संगठित
कर उनका
क्षमतावर्धन
कर
विभिन्न
आजीविका
गतिविधियों
में 72
करोड़
का
निवेश
किया जा
चुका
है।
वर्ष 2014
तक
ग्रामीण
गरीब
महिलाओं
के तीस
हजार से
अधिक
स्व-सहायता
समूहों
का गठन
किया
जायेगाा
तथा बीस
हजार से
अधिक
ग्रामीण
युवाओं
को
नियोजन
के अवसर
उपलब्ध
करवाए
जायेंगे।
रोजगार
मेले
इस
परियोजना
के
माध्यम
से
प्रदेश
में 122
रोजगार
मेले
लगाए गए
हैं।
मेलों
के जरिए
बीस
हजार
सदस्यों
को
रोजगार
देने के
लक्ष्य
के बदले
करीब 62
हजार
सदस्यों
को लाभ
दिया
गया है।
ग्रामीण
आजीविका
परियोजना
प्रदेश
के 9
आदिवासी
बहुल
जिलों
में
ग्रामीण
आजीविका
परियोजना
का
क्रियान्वयन
किया जा
रहा है।
परियोजना
मार्च 2012
तक
चलेगी।
परियोजना
के
माध्यम
से
गरीबों
को
आजीविका
के नए
संसाधन
सुलभ
कराने
में
सफलता
मिल रही
है।
प्रथम
चरण में
जून 2007 की
अवधि
में 815
गाँवों
के
हितग्राहियों
को
आजीविका
के अवसर
उपलब्ध
करवाने
के लिए
करीब 115
करोड़
की राशि
व्यय
हुई।
दूसरे
चरण में
अब तक
प्रथम
चरण के 815
गाँवों
सहित
कुल 2901
गाँवों
के
हितग्राहियों
को
आजीविका
के
संसाधन
उपलब्ध
करवाने
पर 360
करोड़
रूपये
खर्च
होंगे।
महिला
किसान
सशक्तिकरण
परियोजना
प्रदेश
में एक
अप्रैल
2012 से
आरम्भ
हो रहे
राष्ट्रीय
ग्रामीण
आजीविका
मिशन के
उप घटक
के रूप
में
महिला
किसान
सशक्तिकरण
परियोजना
का
क्रियान्वयन
साथ-साथ
शुरू
होगा।
कृषि
क्षेत्र
में
महिलाओं
की
स्थिति
में
बदलाव
और
सुधार
के मकसद
से उनके
सशक्तिकरण
के
अवसरों
को
बढ़ावा
देने के
लिए यह
परियोजना
16 जिलों,
मण्डला,
बालाघाट,
डिण्डोरी,
झाबुआ,
बड़वानी,
टीकमगढ़,
छतरपुर,
सीहोर,
धार,
सागर,
बैतूल,
दमोह,
छिन्दवाड़ा,
सिवनी,
देवास
और
उमरिया
में
शुरू
किया
जाना
प्रस्तावित
है।
एकीकृत
जलग्रहण
क्षेत्र
प्रबंधन
इस
कार्यक्रम
में
पिछले
दो वर्ष
में
प्रदेश
के 49
जिलों
में 1462
करोड़
रूपये
लागत की
215
परियोजनाएँ
मंजूर
हो चुकी
हैं।
इनसे 12
लाख
हेक्टेयर
से
ज्यादा
भूमि
में
जलग्रहण
क्षेत्र
प्रबंधन
का लाभ
मिलेगा।
जल
अभिषेक
अभियान
जन-सहभागिता
से जल
संरक्षण
और
संवर्धन
कार्यक्रमों
के
क्रियान्वयन
के
उद्देश्य
से
राज्य
में
वर्ष 2006
से जल
अभिषेक
अभियान
सफलता
से
चलाया
जा रहा
है।
इसमें
जन-सहभागिता
से नदी
पुनर्जीवन
के साथ
ही
मौजूदा
जल
संग्रहण
संरचनाओं
की
मरम्मत,
नवीनीकरण
और
पुर्नरूद्धार
के
कार्य
हो रहे
हैं। इस
अभियान
में
सार्मथ्यवान
किसानों
(भागीरथ
कृषक) को
सहभागी
बनाने
के लिए
विशेष
पहल की
गई है।
सामाजिक
जुड़ाव
के लिए
ग्राम
स्तर पर
पीढ़ी
जल
संवाद
के
आयोजन
होते
हैं।
अभियान
के
अंतर्गत
राज्य
में
वर्ष 2006-07
से वर्ष
2009-10 तक 5186
करोड़
की लागत
के जल
संरक्षण
और
संवर्धन
कार्य
हो चुके
हैं।
भागीरथ
कृषकों
द्वारा
भी 10 हजार
जल
संरक्षण
संरचनाओं
का
निर्माण
किया
गया है।
नदी
पुर्नजीवन
के 123
करोड़
के
कार्य
हुए हैं
वहीं 1,346
करोड़
की लागत
के अन्य
जल
संवर्धन
कार्य
हुए
हैं।
इनमें 61
करोड़
जन
सहयोग
राशि
शामिल
है।
स्पर्श
अभियान
अभियान
में अब
तक 8 लाख
नि:शक्तजनों
की
पहचान
की गई
है।
इन्हें
आवश्यकतानुसार
शिक्षा
और
रोजगार
के अवसर
सुलभ
कराने
का
कार्यक्रम
चलाया
जा रहा
है।
शासकीय
विभागों
में नि:शक्तजनों
के लिए
करीब
डेढ़
लाख
पदों को
चिन्हित
किया
गया है।
राज्यव्यापी
अभियान
चलाकर
इन पदों
पर
शीघ्र
ही नि:शक्त
लोगों
को
नियुक्ति
दी
जायेगी।
प्रदेश
में 36
वर्षों
में
पहली
बार इस
तरह की
पहल हुई
है।
विधवा
एवं
निराश्रित
पेंशन
प्रदेश
में 60
वर्ष तक
के
निर्धन
वृद्धजनों
को
प्रतिमाह
पेंशन
दी जा
रही है,
जबकि
केन्द्र
द्वारा 65
वर्ष या
अधिक
आयु
वर्ग के
लोगों
को यह
सहायता
दी जाती
है।
केन्द्र
द्वारा
मध्यप्रदेश
का
अनुसरण
करते
हुए अब 60
वर्ष तक
के
निर्धन
वृद्धजनों
को
पेंशन
कार्यक्रम
लागू
किया जा
रहा है।
इसी तरह
केन्द्र
द्वारा 45
वर्ष से
अधिक
आयु की
विधवाओं
को और
मध्यप्रदेश
में 18
वर्ष से
अधिक
आयु की
विधवाओं
को
पेंशन
दी जा
रही है।