बैठक
में यह
बात
सामने
आयी कि
जिन चार
राज्यों
के
वाणिज्यिक
कर
विभागों
ने अपने
कार्य
ऑनलाइन
करने
में
अच्छी
प्रगति
की है
उनमें
मध्यप्रदेश
शामिल
है। शेष
तीन
राज्य
महाराष्ट्र,
गुजरात
और केरल
हैं।
मध्यप्रदेश
में
ऑनलाइन
व्यवस्था
लागू
किये
जाने के
बाद से
वाणिज्यिक
कर
राजस्व
में 25
प्रतिशत
से
ज्यादा
वृद्धि
हुई है।
वर्ष 2010-11
में ही
वेट,
केन्द्रीय
विक्रय
कर और
प्रवेश
कर
राजस्व
में 12
हजार 108
करोड़
का
राजस्व
प्राप्त
किया
गया, जो
पिछले 35
वर्षों
में
सर्वाधिक
है।
व्यवसाई
भी इसके
लाभों
से
परिचित
होकर
आईटी-सेवी
हो गये
हैं।
कुल 2 लाख
40
पंजीकृत
व्यवसाइयों
में से 90
हजार से
अधिक ने
ऑनलाइन
सेवाओं
का लाभ
लेना
शुरू कर
दिया
है।
मध्यप्रदेश
एकमात्र
पहला
राज्य
है जहाँ 24
स्थानों
पर
इन्टीग्रेटेड
चेक-पोस्ट
स्थापित
की जा
रही
हैं। इन
चेक-पोस्टों
पर
इलेक्ट्रॉनिक
वेइंग
मशीन,
मल्टीपल
लेन,
इंटरनेट
कनेक्टिविटी
के साथ
वेब
कैमरा,
हाय
एण्ड
सर्वर
एवं
कम्प्यूटर,
पार्किंग
एरिया
एवं
विश्रामगृह
की
अत्याधुनिक
सुविधाएँ
उपलब्ध
रहेंगी।
ये सभी
जाँच
चौकियाँ
1090 करोड़
की लागत
से
पब्लिक-प्रायवेट
पार्टनरशिप
मोड में
स्थापित
की जा
रही है।
इनमें न
केवल
परिवहनकर्त्ताओं
को
निर्बाध
रूप से
परिवहन
की
सुविधा
होगी
अपितु
राज्य
सरकार
भी माल
के
अवैधानिक
परिवहन
को
रोकने
में
सक्षम
होगी।
मध्यप्रदेश
पहला
राज्य
है जहाँ
सरकार
द्वारा
व्यावसायिक
वातावरण
को
बढ़ावा
देने की
दृष्टि
से
व्यवसाई
को
आवेदन
प्रस्तुत
करने के
दिनांक
को ही
पंजीयन
जारी कर
दिया
जाता
है। ऐसे
जारी
किये
गये
पंजीयन
के
विवरण
का
सत्यापन
पंजीयन
प्रमाण-पत्र
जारी
करने के
बाद या
तो
ऑनलाइन
अथवा
व्यवसाई
से
जानकारी
प्राप्त
कर किया
जाता
है।
व्यवसाइयों
को कर
निर्धारण
में आने
वाली
कठिनाइयों
को दूर
करने की
दृष्टि
से स्व-कर
निर्धारण
की
व्यवस्था
को
बढ़ावा
दिया
गया है।
व्यवसाइयों
को
कैम्प
लगाये
जाकर
विभिन्न
प्रावधान
और स्व-कर
निर्धारण
के लाभ
की
जानकारी
दी जाकर
यह
कार्य
सम्पन्न
करवाया
गया है।
इसी का
परिणाम
है कि 90
प्रतिशत
से अधिक
व्यवसाइयों
द्वारा
स्व-कर
निर्धारण
की
सुविधा
का लाभ
लिया
गया है।
विभागीय
अधिकारियों
द्वारा
पारित
आदेशों
में
आरोपित
कर,
ब्याज
एवं
शास्ति
के कारण
होने
वाली
कठिनाइयों
को दूर
करने
तथा
बड़ी
संख्या
में
माननीय
उच्च
न्यायालय
के
समक्ष
लम्बित
प्रकरणों
में
निहित
राजस्व
का
निराकरण
करने की
दृष्टि
से
वाणिज्यिक
कर
मंत्री
की
अध्यक्षता
में
सेटलमेंट
अथॉरिटी
का गठन
किया
गया है।
सेटलमेंट
अथॉरिटी
द्वारा
सुनवाई
के बाद
प्रकरणों
में
समुचित
निर्णय
लिये
जाते
हैं।
व्यवसाइयों
को
पंजीयन,
रिटर्न,
कर के
भुगतान
एवं
वैधानिक
घोषणा-पत्र
को
प्राप्त
करने
एवं
प्रस्तुत
करने की
ऑनलाइन
सुविधा
देने के
लिये
राज्य
सरकार
कृत-संकल्प
है।
अधिसूचित
वस्तुओं
के आयात
एवं
निर्यात
हेतु
प्रस्तुत
किए
जाने
वाले
फार्म-49
एवं
रेलवे
के
माध्यम
से
आयातित
माल के
लिये
उपयोग
किये
जाने
वाले
फार्म-80
की नि:शुल्क
ऑनलाइन
सुविधा
का
व्यवसाइयों
द्वारा
भरपूर
उपयोग
किया जा
रहा है,
जिससे
उनके
समय एवं
धन की
बचत हुई
है।
व्यवसाई
हेल्प
डेस्क
के
माध्यम
से अपनी
समस्याओं
का
ऑनलाइन
समाधान
कर सकते
हैं।
व्यवसाइयों
को
ऑनलाइन
आवेदन
प्रस्तुत
करने पर
डाक
द्वारा
सी
फार्म
प्रेषित
कर दिए
जाते
हैं।
शीघ्र
ही सी
फार्म
वेब
पोर्टल
से सीधे
ही
डाउनलोडिंग
किये
जाने की
व्यवस्था
की जा
रही है।
अन्य
सुविधाएँ
कपास
उत्पादक
प्रदेश
होने से
मध्यप्रदेश
में
कपास
आधारित
उद्योग
स्थापित
हैं।
भोपाल
एवं
इंदौर
के
औद्योगिक
क्षेत्रों
में
जीनिंग
प्रेसिंग,
यार्न
निर्माण
तथा
टेक्सटाइल
इण्डस्ट्रीज
स्थापित
हैं। इन
उद्योगों
को
प्रोत्साहित
करने
एवं
उत्पादकता
में
वृद्धि
को
ध्यान
में
रखते
हुए
राज्य
सरकार
द्वारा
ऐसे
उद्योगों
को कर
में
विभिन्न
प्रकार
की
रियायतें
दी गई
हैं।
प्रदेश
में
ऑटोमोबाइल
उद्योग
के
विकास
के लिए
वातावरण
तैयार
करने की
दृष्टि
से
राज्य
सरकार
ने इस
उद्योग
को भी कर
रियायतें
दी हैं।
औद्योगिक
क्षेत्र
पीथमपुर,
मण्डीदीप
एवं
मालनपुर
में
विशेष
रूप से
ऐसी
इकाइयाँ
स्थापित
हैं।
औद्योगिक
विकास
को
प्रोत्साहित
करने की
दृष्टि
से
राज्य
सरकार
ने
निर्माता
इकाइयों
के लिये
आगत कर
की नगद
वापसी
की
व्यवस्था
की है।
इकाइयों
को
निर्यात,
कैपिटल
गुड्स,
कच्चे
माल के
साथ ही
नेचुरल
गैस पर
नगद
वापसी
की
व्यवस्था
की गई
है।
राज्य
शासन
द्वारा
एक ही
औद्योगिक
क्षेत्र
के
अंतर्गत
एक
स्थानीय
क्षेत्र
से
दूसरे
स्थानीय
क्षेत्र
में माल
के
प्रवेश
कराने
पर तथा
अर्द्ध
निर्मित
उत्पादों
को
प्रोसेसिंग
के लिये
भिन्न
स्थानीय
क्षेत्र
में
प्रवेश
कराने
पर देय
प्रवेश
कर से
छूट की
व्यवस्था
भी की गई
है।
मध्यप्रदेश
संभवत:
पहला
ऐसा
प्रदेश
है जहाँ
जिले
एवं
राज्य
स्तर पर
कर-दाताओं
को
सम्मानित
किया
जाता
है।
राज्य
स्तर पर 3
बड़े कर-दाताओं
को
मुख्यमंत्री
द्वारा
कार्यक्रम
आयोजित
कर,
प्रत्येक
को 5 लाख
की
सम्मान-निधि
से
सम्मानित
किया
जाता
है।
राज्य
सरकार
द्वारा
व्यवसाइयों
के हित
में
आर्थिक
सहायता
योजना
प्रारंभ
की गयी
है
जिसमें
गंभीर
दुर्घटना
की
स्थिति
में 50
हजार
रुपये
तक एवं
मृत्यु
होने पर
उनके
आश्रितों
को एक
लाख
रुपये
की
आर्थिक
सहायता
प्रदान
की जाती
है।
…………