दिनेश
मालवीय
लाइटिंग
ए
बिलियन
लाइव्स -
संक्षिप्त
परिचय
पूरी
दुनिया
में 1 अरब
40 करोड़ से
अधिक
लोगों
को
बिजली
की
सुविधा
उपलब्ध
नहीं
है।
इनमे से
लगभग 25
प्रतिशत
लोग
भारत
में
हैं।
टीईआरआई
वैश्विक
सतत्
विकास
के लिये
अपनी
प्रतिबद्वता
और
दृष्टि
के
अनुरूप
काम कर
रहा है।
इसका
उद्देश्य
बेहतर
कल के
लिये
नवाचारी
समाधान
उपलब्ध
कराना
है। इस
उद्देश्य
की
पूर्ति
की दिशा
में एक
अरब
ग्रामीण
लोगों
के जीवन
में
उजाला
लाने के
लिये
लाइटिंग
ए
बिलियन
लाइव्स (एलएबीएल)
के नाम
से
अभिनव
पहल की
गयी है।
इसके
अंतर्गत
केरोसिन
और
पेराफिन
लालटेनों
की जगह
सौर
ऊर्जा
से जलने
वाली
विद्युत
लालटेने
उपलब्ध
कराकर
गांव
में
स्वच्छ
और
प्रदूषण
राहित
रोशनी
उपलब्ध
कराई
जाएगी।
इससे
जहां
बच्चों
को पढ़ने
के लिये
बेहतर
रोशनी
मिलेगी,
वही
गृहणियों
को
केरोसिन
का धुंआ
रहित
वातावरण
भी
मिलेगा
और वे
अपने
गृह
कार्य
ज्यादा
सुविधाजनक
रूप से
कर
सकेंगी।
इसके
अलावा,
व्यक्तिगत
और
ग्राम
स्तर पर
आजीविका
के अवसर
भी
निर्मित
होंगे।
एलएबीएल
शुल्क
लेकर
अथवा
किराये
के आधार
पर
सेवाएं
प्रदान
करता
है। जिन
जगहों
पर ये
सेवाएं
प्रदान
करता है,
वहां
सेंट्रलाइज्ड
सौलर
चार्जिंग
स्टेशन
बनाये
जाते
हैं
जिनके
माध्यम
से
लालटेनों
को
चार्ज
किया
जाता है
तथा
लालटेनों
को
किराये
के आधार
पर
रोजाना
घरों
तथा
उद्यमों
को
उपलब्ध
कराया
जाता
है। एक
सौलर
चार्जिंग
स्टेशन
में 50
सौलर
लालटेन
होती
हैं और 5
सौलर
पैनल्स्
तथा
जंक्शन
बाक्स
होते
हैं।
इस
अभियान
से
स्थानीय
रूप से
उद्यमिता
का
विकास
होता है
और गांव
में
रहने
वाले
लोगों
को सौर
ऊर्जा
से जलने
वाली
लालटेने
मिल
जाती
हैं।
वर्तमान
में
गांवों
में ईधन
के रूप
में
केरोसिन
ही
मुख्यतः
उपयोग
में
लाया
जाता
है। न
केवल
घरों
में
बल्कि
दुकानों,
स्थानीय
बाजारों,
ट्यूशन
और
कोचिंग
सेटरों
तथा
कुटीर
उद्योगों
जैसे
छोटे
उद्यमों
को यह
सुविधा
प्राप्त
होती
है। इस
अभियान
के
अंतर्गत
सरकार,
निजी
क्षेत्र
और
दानदाता
एजेंसियों
द्वारा
इस दिशा
में
किये जा
रहे
कार्यों
के साथ
समन्वय
रखा
जाता है
जिससे
शुद्ध
ऊर्जा
का
उपयोग
कर
सामाजिक-आर्थिक
विकास
को
तीव्र
किया जा
सकें ।
अभी
तक
प्रगति
यह
अभियान
अभी तक
भारत के 16
राज्यों
के 640
गांवों
में
क्रियान्वित
किया
गया है ।
25 जून 2011 तक
इन
गांवों
में
लगभग 35
हजार
लालटेनें
उपलब्ध
कराई जा
चुकी
हैं।
इससे इन
640 गांवों
के एक
लाख 75
हजार
लोगों
के जीवन
में
बेहतर
रोशनी
आई है।
एलएबीएल
का
क्रियान्वयन
विभिन्न
राज्यों
के लगभग 50
मैदानी
सहभागियों
तथा 25
टेक्नालॉजी
पार्टनर्स
की मदद
से संभव
हो सका
है।
उनके
सहयोग
से ही
सौलर
चार्जिंग
स्टेशन
स्थापित
किये
गये
हैं। इस
अभियान
के तहत
अभी तक
चार्जिंग
स्टेशन
उद्यमियों
के रूप
में 650 से
अधिक
लोगों
को हरित
रोजगार (ग्रीन
जॉब्स)
मिला
है। इस
अभियान
से
आदिवासी
आवासीय
स्कूलों
में
पढ़ने
वाले
लगभग 1500
बच्चों
को सौर
ऊर्जा
के
माध्यम
से
प्रदूषण
रहित और
बेहतर
रोशनी
मिली
है।
मध्यप्रदेश
में
लाइटिंग
ए
बिलियन
लाइव्स
इस
अभियान
को
मध्यप्रदेश
के 10
जिलों
में
स्थित 108
गांवों
में
लागू
किया
गया है,
जिससे 27000
लोगों
को
प्रदूषण
रहित
सौर
ऊर्जा
से
निर्मित
रोशनी
मिली
है।
इनमें
से 50 से
अधिक
आदिवासी
गांव
हैं और 22
गांव
संरक्षित
क्षेत्रों
में
स्थित
हैं।
मध्यप्रदेश
में इस
अभियान
से अभी
तक 5 हजार
500 घर
रोशन
हुए
हैं।
साथ ही 100
से अधिक
हरित
रोजगर
निर्मित
हुये
हैं और 70
ग्राम
स्तरीय
समितियों
तथा
संस्थाओं
को
मज़बूत
किया
गया है।
यह
कार्य
विभिन्न
संगठनों
की
सहभागिता
से
संपन्न
हो सका
है,
जिनमें
मध्यप्रदेश
ग्रामीण
आजीविका
कार्यक्रम,
डीपीआईपी,
राज्य
शिक्षा
केन्द्र
जैसी
सरकारी
एजेंसियां
कार्बेट
फाउण्डेशन,
डब्लूडब्लूएफ
इंडिया,
टुवर्ड्स
एक्शन
एंड
लार्निंग
तथा
दीनदयाल
शोध
संस्थान
जैसे
गैर-शासकीय
संगठन
शामिल
हैं।
एलएबीएल
का
उद्देश्य
मध्यप्रदेश
के 20
सूत्री
कार्यक्रम
से
जुड़कर
हाशिये
पर रहने
वाले
समुदायों
पर अपने
प्रयासों
को
केन्द्रित
करना
है।
इससे
स्थायी
प्राकृति
के
सामाजिक
उद्यम
संचालित
हो
सकेंगे
और
आजीविका
सृजन,
शिक्षा
और
नवकरणीय
ऊर्जा
जैसे
तीन
महत्वपूर्ण
क्षेत्रों
में काम
करके
हरित
अर्थव्यवस्था
(ग्रीन
इकोनॉमी)
का
विकास
किया जा
सकेगा।
इस
उद्देश्य
को
ध्यान
में
रखकर
टीईआरआई
ने
मध्यप्रदेश
ग्रामीण
आजीविका
कार्यक्रम,
डीपीआईपी,
मध्यप्रदेश
राज्य
शिक्षा
केन्द्र
तथा
मध्यप्रदेश
ऊर्जा
विकास
निगम से
हाथ
मिलाया
है।
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