श्री
शिवराजसिंह
चौहान 29
नवम्बर
को
मध्यप्रदेश
के
मुख्यमंत्री
के रूप
में छह
वर्ष
पूरे कर
रहे
हैं। इस
दौरान
उन्होंने
स्वयं
को एक
ऐसे
राजनेता
के रूप
में
स्थापित
किया है,
जो
प्रदेश
के
विकास
और
लोगों
के
कल्याण
के साथ-साथ
सामाजिक
सरोकारों
से भी
शिद्दत
के साथ
जुड़ा
है। वे
आज एक
दूरदृष्टि
सम्पन्न
और
प्रदेश
के
विकास
के लिए
प्रतिबद्ध
जननेता
के रूप
में
जाने
जाते
हैं।
इसके
लिए वे
किसी भी
सीमा तक
जाने को
सदा
तत्पर
रहते
हैं।
श्री
चौहान
प्रदेश
के ऐसे
पहले
मुख्यमंत्री
हैं,
जिन्होंने
उन
वर्गों
पर
ध्यान
दिया
जिन पर
कभी
किसी की
नजर
नहीं
गयी।
साथ ही
उन्होंने
कुछ ऐसी
योजनाएँ
लागू
कीं जो
अन्य
प्रदेशों
तथा
पूरे
देश में
आदर्श
मानी
गयीं।
इसी
प्रतिबद्धता
के चलते
कभी “बीमारू’’
जैसे
अपमानजनक
नाम से
पुकारे
जाने
वाले
मध्यप्रदेश
को अब
देश के
सबसे
तेजी से
विकसित
होने
वाले
राज्य
का गौरव
प्राप्त
है।
विकास
की बात
सिर्फ
शब्दों
में
पूरी
तरह
बयां
नहीं हो
सकती।
इसके
लिए
आँकड़ों
का
समर्थन
जरूरी
है।
वर्ष 2002-03
में
मध्यप्रदेश
की
आर्थिक
विकास
दर
माइनस
में थी,
वहीं आज
यह
राष्ट्रीय
औसत से
भी
ज्यादा
हो गयी
है।
ग्यारहवीं
पंचवर्षीय
योजना (2007-12)
में
लक्षित 7.6
प्रतिशत
विकास
दर की
तुलना
में
राज्य
का सकल
घरेलू
उत्पादन
(जीडीपी)
विकास 10.06
प्रतिशत
होने की
आशा है।
योजना
अवधि
में
प्रस्तावित
परिव्यय
2006 के
मूल्यों
पर 70 हजार
239 करोड़
रुपये,
जिसके
विरुद्ध
योजना
अवधि
पूरी
होने के
एक वर्ष
पहले ही
मध्यप्रदेश
प्रचलित
दरों पर 86
हजार 187
करोड़
रुपये
के स्तर
पर
पहुँच
गया है।
प्रदेश
की
प्रति
व्यक्ति
आय
स्थिर
मूल्यों
पर वर्ष
2007-08 में 17
हजार 572
से
बढ़कर 2010-11
में 22
हजार 460
हो गई
है। यह
वृद्धि
27.81
प्रतिशत
है, जबकि
इस अवधि
में
राष्ट्रीय
स्तर पर
प्रति
व्यक्ति
आय में 18.33
प्रतिशत
की
वृद्धि
हुई है।
मुख्यमंत्री
श्री
चौहान
के
कार्यकाल
में
मध्यप्रदेश
जैसे
प्राकृतिक
सम्पदाओं
को
प्रदेश
के
समग्र
विकास
में
समुचित
दोहन के
लिये
संसाधन
जुटाने
के नये
रास्ते
खोले
गये।
अधोसंरचना
के
क्षेत्र
में
पीपीपी
मोड में
परियोजनाओं
के
क्रियान्वयन
में
मध्यप्रदेश
अग्रणी
है।
श्री
चौहान
ने
अधोसंरचना
के
प्रमुख
घटक
सड़कों
के
विकास
पर
प्राथमिकता
से
ध्यान
दिया और
इस दिशा
में
किये
गये
प्रयासों
के
फलस्वरूप
प्रदेश
में
सड़कों
की
स्थिति
पहले से
कहीं
अधिक
बेहतर
है। यह
इस बात
से
सिद्ध
है कि
सड़कों
के लिये
बजट में
किये
गये
प्रावधान
में
बीते 6
सालों
की
तुलना
में 300
प्रतिशत
से अधिक
की
वृद्धि
की गई
है।
करीब 65
हजार
किलोमीटर
सड़कों
का
निर्माण
और
सुधार
कार्य
किया
गया।
लगभग 12
हजार
करोड़
रुपये
की राशि
सड़कों
के लिये
राज्य
के बजट
से खर्च
की गई और
अन्य
स्रोतों
से इस
कार्य
पर 15 हजार
करोड़
रुपये
की राशि
खर्च की
जानी
है।
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
यह बात
भली-भाँति
जानते
हैं कि
औद्योगिक
और सेवा
क्षेत्र
का
भरपूर
विकास
होने के
बावजूद
मध्यप्रदेश
की
अर्थव्यवस्था
का
मुख्य
आधार आज
भी कृषि
ही है।
इसलिये
उन्होंने
कृषि को
लाभ का
धंधा
बनाने
के अन्य
उपायों
के साथ-साथ
प्रदेश
में
सिंचाई
संसाधनों
के
विकास
पर
भरपूर
ध्यान
भी
दिया।
पुराने
अधूरे
बाँधों
का काम
पूरा
किया जा
रहा है
और
बाँधों
की
स्थापित
क्षमता
के
उपयोग
के लिये
नहरों
का
नेटवर्क
स्थापित
किया
गया।
नहरों
से
पिछले
छह साल
में
सिंचित
क्षेत्र
21 लाख से
बढ़ाकर 28
लाख
हेक्टेयर
किया
गया है।
विभिन्न
योजनाओं
के तहत
विगत 7
वर्षों
में
करीब 8
लाख
हेक्टेयर
अतिरिक्त
क्षेत्र
में
सिंचाई
क्षमता
निर्मित
की गई
है।
इन्हीं
सब
प्रयासों
का
परिणाम
रहा कि
प्रदेश
में
बीते 5
वर्षों
में
कृषि
विकास
दर में
तीन
गुना से
अधिक
वृद्धि
हुई है।
वर्ष 2004-05
में यह
तीन
प्रतिशत
के
आसपास
थी, वहीं
आज यह 9
प्रतिशत
से आगे
निकल
गयी है।
इसी
वर्ष
रबी
मौसम
में 90 लाख
मीट्रिक
टन का
रिकार्ड
उत्पादन
हुआ और 50
लाख
मीट्रिक
टन का
समर्थन
मूल्य
पर
उपार्जन
हुआ, जो
एक
कीर्तिमान
है। इस
मामले
में
पंजाब
और
हरियाणा
के बाद
अब
मध्यप्रदेश
तीसरे
स्थान
पर है।
कृषि
को
लाभदायी
बनाने
की श्री
चौहान
की
मुहिम
के
अंतर्गत
प्रदेश
में
किसानों
को अनेक
सुविधाएँ
दी गई
हैं,
जिनमें
एक
प्रतिशत
ब्याज
दर पर ऋण
और
गेहूँ
उपार्जन
पर 100
रुपये
प्रति
क्विंटल
की दर से
बोनस
शामिल
है।
अनुदान
और
उपार्जन
की राशि
किसानों
के
खातों
में
सीधे
जमा
करने की
व्यवस्था
की गई है
और इस
वर्ष
किसानों
के खाते
में
लगभग एक
हजार
करोड़
रुपये
की राशि
जमा की
गई है।
कृषि और
इससे
संबंधित
विभागों
के बीच
में
बेहतर
समन्वय
के लिये
कृषि
केबिनेट
का गठन
किया
गया है।
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
के
मुख्यमंत्रित्व
में
बिजली
के
मामले
में
मध्यप्रदेश
ने बहुत
अच्छी
प्रगति
की है।
इसे
प्राथमिकता
के
क्षेत्र
में रखा
गया।
वर्ष 2011-12
के मूल
बजट में
बिजली
के लिये
1662 करोड़
रुपये
का
प्रावधान
किया
गया था,
जबकि
हाल ही
में
पारित
द्वितीय
अनुपूरक
में
बिजली
के लिये
1014 करोड़
रुपये
का
प्रावधान
किया
गया।
बिजली
की
उत्पादन
क्षमता
में 3161
मेगावॉट
से अधिक
की
वृद्धि
हुई है
और 4940
मेगावॉट
वृद्धि
का काम
प्रगति
पर है।
प्रदेश
में 4150
करोड़
रुपये
लागत से
फीडर
सेपरेशन
का
महत्वाकांक्षी
काम
शुरू
किया
गया है।
इस बड़े
काम के
पूर्ण
होने पर
जनवरी, 2013
के अंत
में
घरेलू
विद्युत
कटौती
इतिहास
की बात
हो
जायेगी।
आगामी 3
वर्षों
में
प्रदेश
में
लगभग 4900
मेगावॉट
क्षमता
वृद्धि
का
कार्यक्रम
है।
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
ग्रामीण
और
माटीपुत्र
होने की
पृष्ठभूमि
उन्हें
मुख्यमंत्री
के रूप
में सफल
बनाने
में
प्लस
प्वाइंट
रही है।
उन्हें
पता है
कि
मध्यप्रदेश
की लगभग 70
प्रतिशत
आबादी
गाँवों
में
बसती
है।
उन्होंने
ग्रामीण
विकास
कार्यक्रमों
को इतनी
कुशलता
से लागू
किया है
कि इस
मामले
में
मध्यप्रदेश
कई
वर्षों
से
अव्वल
बना
रहा।
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
में एक
हजार और
उससे
अधिक
आबादी
वाले
गाँवों
को
मुख्य
सड़क से
जोड़ा
जा चुका
है। इस
योजना
के
मापदण्ड
में न
आने
वाले
गाँवों
को
सड़कों
से
जोड़ने
के लिये
उन्होंने
प्रदेश
की अपनी
मुख्यमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
शुरू की
है। इस
योजना
में आने
वाले 3
वर्षों
में 20
हजार
किलोमीटर
लम्बाई
की
सड़कें
और 12 हजार
पुल-पुलियों
का
निर्माण
किया
जायेगा।
ग्रामीण
विकास
की अनेक
योजनाओं
में
मध्यप्रदेश
को
राष्ट्रीय
स्तर के
पुरस्कार
प्राप्त
हुए
हैं।
प्रदेश
के
संतुलित
विकास
के हामी
श्री
चौहान
के
नेतृत्व
में
राज्य
सरकार
ने
गाँवों
के साथ-साथ
नगरों
की भी
पूरी
चिंता
की।
शहरों
की
बढ़ती
आबादी
को
समुचित
नागरिक
सुविधाएँ
उपलब्ध
कराने
की
योजनाओं
का
कुशलता
से
क्रियान्वयन
किया
गया है।
नगरीय
निकायों
को
वित्तीय
सहायता
जारी
करने की
प्रक्रिया
में
पारदर्शिता
और गति
लाने के
लिये
ऑनलाइन
मनी
ट्रांसफर
की
व्यवस्था
लागू की
गई है,
जिसके
तहत
नगरीय
निकायों
के बैंक
खातों
में
धनराशि
सीधी
जमा की
जाती
है।
नगरों
को
स्वच्छ
और
सुंदर
बनाने
के लिये
एकीकृत
नगरीय
सुरक्षा
कार्यक्रम
लागू
किया
गया है।
इसके
प्रथम
चरण में 41
नगरों
के सिटी
सेनीटेशन
प्लॉन
तैयार
कराये
जा रहे
हैं।
अवैध
कॉलोनी
निर्माण
का
अपराध
संज्ञेय
बनाया
गया है।
शहरी
क्षेत्रों
में
पेयजल
तथा ठोस
अपशिष्ट
प्रबंधन
की
व्यवस्था
पीपीपी
पद्धति
से की
जायेगी,
जिस पर
लगभग एक
हजार
करोड़
रुपये
का
निवेश
होगा।
सौ
नगरों
के सिटी
डेव्हलपमेंट
प्लॉन
बनकर
तैयार
हैं।
अग्निशमन
सेवाओं
का
विस्तार
भी जारी
है।
सबसे
कमजोर
पर
ध्यान
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की एक
बड़ी
विशेषता
यह रही
है कि
उन्होंने
समाज के
ऐसे
वर्गों
की
बेहतरी
पर
ध्यान
दिया,
जिनके
लिये
पहले
किसी
सरकार
ने पहल
नहीं
की।
मण्डी
में काम
करने
वाले
हम्माल,
तुलावटिये
हों या
घरों
में साफ-सफाई
करने
वाली
महिलाएँ;
हाथ
ठेला या
रिक्शा
चलाने
वाले
श्रमिक
या फिर
गली-गली
फेरी
लगाकर
सामान
बेचकर
जीवन-यापन
करने
वाले
गरीब
लोग;
कोटवार
हों या
अंशकालीन
कम्पाण्डर,
सभी पर
श्री
चौहान
ने पूरा
ध्यान
दिया
है। इन
लोगों
के हक
में
सार्थक
योजनाएँ
शुरू की
गई हैं।
सबसे
बड़ी
बात यह
है कि इन
लोगों
के लिये
योजनाएँ
शुरू
करने से
पहले
मुख्यमंत्री
ने इन
लोगों
की
पंचायत
बुलाकर
उनसे
राय-मश्विरा
किया।
अनुकरणीय
योजनाएँ
मुख्यमंत्री
श्री
चौहान
ने अभी
तक के
अपने
कार्यकाल
में आम
लोगों
को
सुविधाएँ
दिलाने
तथा
कमजोर
वर्गों
के
हितों
का
संरक्षण
करने के
साथ-साथ
सामाजिक
मुद्दों
के
समाधान
की दिशा
में ऐसी
अनेक
योजनाएँ
शुरू
कीं, जो
पूरे
देश में
न केवल
विख्यात
हुईं
बल्कि
अनेक
राज्यों
ने
उन्हें
अपने
यहाँ
लागू भी
किया।
इनमें
मुख्य
रूप से
लाड़ली
लक्ष्मी
योजना,
मुख्यमंत्री
कन्यादान
योजना,
लोक
सेवा
गारंटी
कानून
आदि का
उल्लेख
किया जा
सकता
है।
जनसंख्या
में
कन्याओं
के
लगातार
चिंताजनक
रूप से
कम होते
अनुपात
को
संतुलित
करने की
दिशा
में हाल
ही में
मुख्यमंत्री
ने बेटी
बचाओ
अभियान
छेड़ा
है,
जिसका
उद्देश्य
कन्याओं
का
संरक्षण
करने के
साथ-साथ
उनकी
उचित
परवरिश
और
विकास
भी है।
मुख्यमंत्री
ने "आओ
बनाएँ
अपना
मध्यप्रदेश"
अभियान
के
जरिये
मध्यप्रदेश
में
सांस्कृतिक
और
क्षेत्रीय
एकता को
बढ़ाने
का
अभूतपूर्व
कार्य
भी किया
है।
इसी
प्रकार
महिला
सशक्तिकरण
की दिशा
में
श्री
चौहान
ने
मध्यप्रदेश
में
पंचायत
राज
संस्थाओं
तथा
नगरीय
निकायों
में 50
प्रतिशत
आरक्षण
महिलाओं
को देने
का
अनुकरणीय
कार्य
किया,
जिसे
बाद में
पूरे
देश में
लागू कर
दिया
गया।
इसके
अलावा
शिक्षकों
के 50
प्रतिशत
पद
महिलाओं
के लिये
आरक्षित
किये
गये
हैं।
पुलिस
बल में
उन्हें 10
प्रतिशत
आरक्षण
दिया
गया है।
कन्याओं
को
शिक्षा
की
बेहतर
सुविधाएँ
प्रदान
की गई
हैं,
जिससे
वे अपने
व्यक्तित्व
का
पूर्ण
विकास
कर समाज
और
राष्ट्र
के
निर्माण
में
समान
रूप से
सक्रिय
भागीदार
बन
सकें।
शासन-प्रशासन
में
पारदर्शिता
लाने के
लिये
श्री
चौहान
ने
सूचना
प्रौद्योगिकी
का
श्रेष्ठतम
उपयोग
किया
है।
उनके
द्वारा
शुरू
किये
गये
समाधान
ऑनलाइन
जैसे
कार्यक्रम
से बड़ी
संख्या
में
लोगों
की
समस्याओं
का
समाधान
हुआ है।
ई-टेण्डरिंग,
ठेकेदारों
का
सिंगल
इलेक्ट्रॉनिक
रजिस्ट्रेशन,
इलेक्ट्रॉनिक
भुगतान
आदि भी
प्रशासकीय
कार्य
में
सूचना
प्रौद्योगिकी
के
श्रेष्ठतम
प्रयोग
के
अच्छे
उदाहरण
हैं।
श्री
चौहान
द्वारा
छह
वर्षों
में
किये
गये
सारे
कार्यों
को एक
लेख में
समेटना
असंभव
है। फिर
भी इस
बात पर
सभी
राजी
होंगे
कि
उन्होंने
पूरी
लगन,
निष्ठा
और
शक्ति
के साथ
प्रदेश
को
विकसित
राज्यों
की
पंक्ति
में ले
जाने की
कोई कसर
बाकी
नहीं
रखी है।
अभी तो
बस यही
कि-
जिस
दिन से
चला हूँ
मेरी
मंजिल
पर नज़र
है,
आँखों
ने कभी
मील का
पत्थर
नहीं
देखा।