एम.पी.एम.
मध्यप्रदेश
की
राजधानी
भोपाल
में एक
और गर्व
करने
योग्य
कला
संस्थान
जुड़ने
जा रहा
है-
मध्यप्रदेश
नाट्य
विद्यालय।
यह
राज्य
स्तर पर
स्थापित
किया
जाने
वाला
देश का
पहला
नाट्य
विद्यालय
है।
उद्देश्य
विद्यालय
उद्देश्य
के
अंतर्गत
भारत के
मध्य
में
स्थित
ऐसे
नाट्य
विद्यालय
की
परिकल्पना
है जो
स्वयं
राष्ट्रीय
मानकों
को पूरा
करे।
निश्चित
संख्या
में
राष्ट्रीय
मानक के
आधार पर
छात्रों
का
प्रवेश
और
अध्ययन-अध्यापन
की
व्यवस्था
देश के
श्रेष्ठ
रंग
गुरुओं
द्वारा
हो, साथ
ही
विद्यालय
का
उद्देश्य
रंगमंच
कला को
व्यवसाय
के रूप
में
अपनाने
के लिये
छात्रों
को
तैयार
करना
है। इस
उद्देश्य
की
पूर्ति
के लिये
विभिन्न
प्रकार
की
व्यावहारिक
निपुणताओं
का
विकास
तथा
समग्र
ज्ञान
की
प्राप्ति
आवश्यक
है। इस
उद्देश्य
की
प्राप्ति
के लिये
नाट्य
विद्यालय
की मूल
संकल्पना
में
क्रमशः
दो
वर्षीय
एवं तीन
वर्षीय
पाठ्यक्रम
का
संचालन,
सर्जनात्मक
कल्पना
का
विकास
और
सामूहिक
ढाँचे
के
अंतर्गत
रंग
अभिव्यक्ति
है।
इस
उद्देश्य
से
भारतीय
रंगमंच
को
संरक्षित
करना,
उसका
उन्नयन
करना
एवं
उसकी
अलग
पहचान
बनाना
भी है।
सभी
प्रकार
के
पारम्परिक
रंगमंच (शास्त्रीय,
संस्कृत
रंगमंच,
लोक एवं
आदिवासी
परम्पराएँ
विशेषकर
मध्यप्रदेश
के
प्रचलित
रंगमंच)
सम्बद्ध
कलाओं
के
विभिन्न
प्रकारों
के बीच
अन्तः
सम्बंधों
एवं
अन्तः
क्रियाओं
को
संरक्षित
एवं
उसका
उन्नयन
करना
है।
अन्य
कलाकारों
एवं
संस्थाओं
द्वारा
प्रशिक्षण
की नई
प्रविधियों
को
संघटित
करना।
समकालीन
नाट्य
कलाकारों
के साथ
शोध
परियोजनाओं
के
कार्यक्रम
विकसित
करना
तथा
समकालीन
कलाओं
एवं
उनके
सामाजिक
एवं
अन्य
समकालीन
मुद्दों
के बीच
अन्तः
सम्बन्ध
स्थापित
करना
तथा
पूर्व
के एवं
भविष्य
के
प्रस्तुति
योग्य
तथा गैर
प्रस्तुति
योग्य
अखाड़ा,
मार्शल
आर्ट्स
प्राचीन
देशी
खेलकूद
आदि के
प्रलेखन
केन्द्र
को
विकसित
करना भी
इसके
उद्देश्यों
में
शामिल
है।
सुविधाएँ
इस
विद्यालय
में
परम्परागत
आधुनिक
मूल पाठ
पर
पुस्तकालय
होगा।
शास्त्रीय,
कृषि
संबंधी
एवं
वनवासी (लोकधर्मी,
नाट्यधर्मी
या
मार्गी
और देशी)
प्रकार
के
नाट्यों
पर
श्रवण
एवं
दृश्य
सामग्री
विकसित
की
जायेगी।
यदा-कदा
निष्पादित
होने
वाली
कलाओं
वाद्य
यंत्र,
पाण्डुलिपियाँ,
अभिकल्पन,
मुखौटे (वेशभूषा,
प्रतिकृतियाँ,
अन्य
सम्पत्तियाँ,
समय-समय
में
कार्य
के
अनुसार
की जाने
वाली
व्यवस्थाएँ,
प्रकाशन,
प्रचार
की
परम्परागत
तकनीकें)
आदि
संबंधित
सामग्री
के लिये
अपनी एक
अलग
शाखा को
विकसित
किया
जायेगा।
देशी,
परम्परागत
एवं
समकालीन
वाद्य-यंत्रों
एवं
यंत्रों
के
कारीगरों
को
प्रोत्साहित
करने के
लिये
कार्यशालाओं
के लिये
स्थान
बनाया
जायेगा।
नाट्य
विद्यालय
में रंग
संस्थाओं
एवं
विद्यालय
की
शैक्षणिक
रूपरेखा
के बीच
संबंधों
का
निर्माण
किया
जायेगा।
शिक्षा
की
औपचारिकता
एवं
अनौपचारिक
व्यवस्था
के साथ
रंगमंच
की
मध्यस्थता
या
हस्तक्षेप
होगा।
देशी,
लोक एवं
परम्परागत
व्यवस्था
द्वारा
प्रस्तुति
योग्य
एवं
अभ्यासरत
कलाकारों
के बीच
से
रंगमंच
में
शिक्षण
के लिये
विद्वानों
की
व्यवस्था
की
जायेगी।
बाल
रंगमंच
शिक्षा
का
अभिन्न
अंग
होगा।
विद्यालय
द्वारा
आंचलिक,
सांस्कृतिक
एवं
भाषिक
आधार पर
राज्य
में
वयस्कों
एवं
बच्चों
के लिये
प्रस्तुतियों
को
प्रोत्साहन
दिया
जायेगा।
निष्पादन
योग्य
एवं गैर
निष्पादन
योग्य
पूर्व
एवं
वर्तमान
कलाओं
का
प्रलेखन
करना
एवं
उन्हें
विस्तारित
करने के
साथ ही
क्षेत्र
में
उनके
शोध के
लिये
शोध
केन्द्र
स्थापित
किया
जायेगा।
परम्परागत,
तकनीकी
एवं
आधुनिक
समकालीन
रंगमंच
की
शैलियों
एवं
तकनीकों
की
शिक्षा
दी
जायेगी।
सभी
प्रकार
की
प्रस्तुतियोग्य
कलाओं
के बीच
अन्तः
संबंध
बनाया
जायेगा।
रंगमंच
की
विभिन्न
विधाओं
जैसे
नाट्य
लेखन,
निर्देशन,
चित्रण,
अभिनय,
रंगमंच,
संगीत,
बाल
रंगमंच
आदि के
लिये
छात्रवृत्तियों
की
स्थापना
की
जायेगी।
चयन
प्रक्रिया
दो
वर्ष
पहले
देश के
सभी
महत्वपूर्ण
रंगकर्मियों
को
आमंत्रित
कर उनके
सान्निध्य
में
नाट्य
विद्यालय
के
स्वरूप
पर दो
दिवसीय
विमर्श
का
आयोजन
किया
गया। इस
विमर्श
में देश
के रंग-मनीषियों
द्वारा
प्राप्त
अवधारणा,
सुझाव
एवं
सलाह के
आधार पर
मार्गदर्शन
समिति,
सलाहकार
समिति
एवं
पाठ्यक्रम
समिति
का गठन
किया
गया। इन
समितियों
में देश
के
वरिष्ठतम
रंग
निदेशक
एवं
रंगकर्मी
लगातार
पूरी
सक्रियता
के साथ
हमें
सहयोग
देते
रहे
हैं।
इसी
जुलाई
से
प्रारंभ
होने
वाले
मध्यप्रदेश
नाट्य
विद्यालय
में
दाखिला
के लिये
पूरे
देश के
इच्छुक
विद्यार्थियों
को
समाचार-पत्रों
के
माध्यम
से
विज्ञापन
द्वारा
आमंत्रित
किया
गया।
मध्यप्रदेश
में
पाँच
स्थानों-
भोपाल,
उज्जैन,
जबलपुर,
ग्वालियर
एवं
मैहर
में
प्रारंभिक
चयन
कार्यशाला
का
आयोजन
किया
गया। इन
प्रारंभिक
चयन
कार्यशालाओं
में
विशेषज्ञ
के रूप
में
श्री
चेतन
पंडित,
श्री
आसिफ,
श्री
टीकम
जोशी,
श्री
अजय
कुमार,
श्री
संजय
मेहता,
श्री
पंकज
दुबे,
श्री
अमिताभ
श्रीवास्तव,
श्री एन.के.
शर्मा,
श्री
उदय
शहाणे
और श्री
कन्हैयालाल
कैथवास
शामिल
हुए।
नाट्य
विद्यालय
की
प्रारंभिक
चयन
कार्यशाला
के लिये
मध्यप्रदेश,
उत्तरप्रदेश,
दिल्ली,
राजस्थान,
गुजरात,
हरियाणा,
महाराष्ट्र,
मुम्बई,
बिहार,
झारखण्ड
एवं
छत्तीसगढ़
राज्यों
के लगभग
250
विद्यार्थियों
ने
आवेदन
किया।
इनमें
से
विशेषज्ञों
द्वारा
लगभग 72
विद्यार्थियों
का चयन
भोपाल
में
आयोजित
अंतिम
चयन
कार्यशाला
के लिये
किया
गया।
अंतिम
चयन
कार्यशाला
के
विशेषज्ञ
श्री
अवतार
साहनी,
श्री
आलोक
चटर्जी,
सुश्री
उषा
गांगुली,
श्री
स्वानंद
किरकिरे
एवं
श्री
पीयूष
मिश्रा
द्वारा
मध्यप्रदेश
नाट्य
विद्यालय
के
प्रथम
सत्र
में
प्रवेश
के लिये
25
विद्यार्थियों
का चयन
किया
गया है।
मध्यप्रदेश
नाट्य
विद्यालय
रंगमंच
को
व्यवसाय
के रूप
में
अपनाने
का
इरादा
रखने
वाले
प्रशिक्षणार्थियों
को
नाट्य-कला
में एक
वर्षीय
डिप्लोमा
का
पूर्णकालिक
पाठ्यक्रम
उपलब्ध
करायेगा।
शैक्षणिक
पाठ्यक्रम
क्रमशः
दो
वर्षीय
एवं तीन
वर्षीय
पाठ्यक्रम
के रूप
में
लागू
किया
जायेगा।
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