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आलेख

बड़ा बदलाव

"उन्हें भरोसा नहीं होता"

भोपाल : गुरूवार, 15 सितम्बर, 2011


दिनेश मालवीय

भोपाल की फरदीन कुरेशी ने कल पूर्वान्ह साढ़े ग्यारह बजे मूल-निवासी प्रमाण-पत्र पाने की दरख्वास्त लगाई और दो बजे यह उनके हाथ में था।

गाँव मुगलिया हाट के मुंशीलाल नामदेव ने भी आय प्रमाण-पत्र देने के लिए कल ही आवेदन दिया था और दोपहर में यह उन्हें मिल गया।

तूमड़ा गाँव के गोपाल सिंह को खसरे की नकल और भोपाल की कुमारी तनीशा गुर्जर को जन्म प्रमाण-पत्र एक ही दिन में मिल गये।

आज से करीब साल भर पहले जो लोग ये कागजात हासिल करने कलेक्टर दफ्तर गये होंगे उन्हें इस पर विश्वास करना आसान नहीं होगा। और तो और आज जिन लोगों को ये काग़जात दो-तीन घंटे में मिल गये, उन्हें भी सहसा भरोसा नहीं हो रहा होगा।

एक तो यह काम लगभग हाथों-हाथ हो गया, दूसरे बिना किसी बिचौलिये की मदद से और बिना किसी से गुहार लगाये या सिफारिश करवाये। इस पर आश्चर्य होना स्वाभाविक है। यह नामुमकिन लगने वाला बदलाव आया है सरकार द्वारा कलेक्टर कार्यालय में खोले गये समाधान एक दिन केन्द्रों से।

ऊपर बताये गये कुछ लोग ही नहीं, बल्कि प्रदेश के हर जिले में रोज़ाना पचासों लोगों को यह सुखद अनुभूति हो रही है।

इसी तरह ग्वालियर में भी एक ऐसी बात हुयी, जिसकी करीब साल भर पहले तक कोई कल्पना तक नहीं कर सकता था। वहाँ विभिन्न विकास खंडों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के तेरह उप यंत्रियों और एक टाइमकीपर पर लोगों के काम में टालमटोल कर देरी करने पर जुर्माना ठुक गया। जुर्माने की 99 हजार 500 रुपये की रकम उन लोगों को दी जायेगी जिनकी अपने काम में अनावश्यक देरी होने से पैसे और वक्त की बर्बादी हुयी है।

यह अनहोनी-सी लगने वाली बात मुमकिन हुयी राज्य में लागू किये गये लोकसेवा प्रदाय गारंटी कानून से। फिलहाल नौ विभाग की 26 सेवाओं को इस कानून के तहत लाया गया है। अब तेरह अन्य विभागों की 25 और सेवाओं को इसमें शामिल करने के लिए चिन्हांकित किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर लागू इस कानून के साथ ही उनके निर्देश पर तयशुदा वक्त में ऑनलाइन सुविधा के जरिये लोक सेवाएँ दी जा रही हैं। कुछ ही महीनों में 60 हजार से ज्यादा लोगों को समय-सीमा में इन सेवाओं का लाभ मिल चुका है।

आज जब पूरे देश में सिटीजन्स चार्टर की माँग तेजी से जोर पकड़ रही है, वहीं मध्यप्रदेश में करीब एक साल पहले ही इस कानून को लागू कर दिया गया।

प्रदेश में इस कानून पर अमल के लिए एक अलग लोक सेवा प्रबंधन विभाग बनाया गया है। अपील की जिम्मेदारी भी सरकार ने अपने ऊपर ले ली है। पहले, समय-सीमा में काम न होने पर आवेदक को अपील करनी होती थी। अब ऐसा होने पर उसकी तरफ से सरकार द्वारा स्वत: अपील हो जाती है।

इस कानून के प्रति पूरे देश का ध्यान आकर्षित हुआ है। बिहार में इसकी तर्ज पर कानून लागू हो गया है। कई दूसरे राज्य इसका अध्ययन कर रहे हैं और इसे लागू करने का इरादा रखते हैं।

यहाँ तक कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कुछ माह पहले बीना रिफायनरी के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान से इस कानून के विषय में जिज्ञासापूर्ण पूछताछ की।

इस कानून के लागू होने से सरकारी दफ्तरों में आम लोगों को लोक सेवाएं देने वाले अमले में ज्यादा चुस्ती और सजगता आने के साथ-साथ जुर्माने का डर भी पैदा हुआ है। उनमें बदलाव आ रहा है।

साथ ही, आम लोगों में यह जागरूकता आयी है कि सरकारी दफ्तर में जाकर काम कराना उसका हक है। उसे यह हक न देने वाले को सज़ा मिलेगी।

इस तरह से देखा जाए तो प्रशासनिक लेतलाली और भर्राशाही के भंवर में फंसे आम आदमी के लिए यह दूसरी आज़ादी से कम नहीं है। इस पहल को लोक प्रशासन के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जाएगा।

 


 

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