मुकेश
मोदी
मध्यप्रदेश
के
ग्रामीण
क्षेत्रों
में 76
प्रतिशत
और शहरी
क्षेत्रों
में 24
प्रतिशत
अनुसूचित
जाति की
आबादी
निवास
करती
है।
प्रदेश
की इतनी
बड़ी
अनुसूचित
जाति
आबादी
के
सर्वांगीण
विकास
के लिये
राज्य
सरकार
कृत-संकल्पित
है।
प्रदेश
सरकार
ने जो
काम
शुरू
किये
हैं
उनसे
सम्पूर्ण
अनुसूचित
जातियों
में
जागरूकता
पैदा
हुई है।
प्रदेश
में ऐसा
माहौल
निर्मित
किया
गया है
कि
अनुसूचित
जातियों
के
विद्यार्थियों
को
सामान्य
वर्ग के
विद्यार्थियों
की तरह
शिक्षा,
स्व-रोजगार
एवं
समानता
के
बेहतर
अवसर
मिलें।
इसी के
अनुरूप
राज्य
सरकार
ने दलित
वर्गों
की भलाई
के लिये
अनेक
निर्णय
लिये
हैं।
अनुसूचित
जाति
बहुल
क्षेत्रों
में
सिंचाई,
बिजली,
सड़क के
कामों
को
प्राथमिकता
के साथ
किया जा
रहा है।
आबादी
के मान
से बजट
प्रावधान
|
हमारा
लक्ष्य
है,
मध्यप्रदेश
में
अनुसूचित
जाति
वर्ग
को
समाज
में
सम्मान,
बराबरी
का हक
और
अवसर
मिले।
-
शिवराज
सिंह
चौहान
मुख्यमंत्री |
प्रदेश
में
पिछले
पाँच
वर्षों
में
अनुसूचित
जाति
उपयोजना
के
प्रावधान
में
डेढ़ सौ
प्रतिशत
से अधिक
की
वृद्धि
की गई
है।
वर्ष 2005-06
में
अनुसूचित
जाति
उपयोजना
के लिये
जहाँ 945
करोड़
का
प्रावधान
हुआ
करता था
वह वर्ष
2011-12 में
बढ़कर 3248
करोड़ 80
लाख
रुपये
हो गया।
अनुसूचित
जाति
वर्ग का
यह बजट
कुल
आयोजना
बजट का
करीब 15.25
प्रतिशत
के करीब
है और
प्रदेश
की कुल
आबादी
में
अनुसूचित
जातियों
का
प्रतिशत
भी लगभग
इतना ही
है।
छात्रवृत्ति
राशि
में
वृद्धि
प्रदेश
में
राज्य
छात्रवृत्ति
में
वृद्धि
कर
कक्षा
नवीं
एवं
दसवीं
के बालक-बालिकाओं
की
छात्रवृत्ति
को
बढ़ाकर
दोगुना
किया
गया है।
अनुसूचित
जाति
वर्ग के
बालक को
600 रुपये
एवं
बालिका
को 800
रुपये
वार्षिक
छात्रवृत्ति
दी जा
रही है।
अनुसूचित
जाति
वर्ग के
विद्यार्थियों
को
पोस्ट-मैट्रिक
छात्रवृत्ति
समय से
प्राप्त
हो और
छात्रवृत्ति
की
प्रक्रिया
में
पारदर्शिता
हो, इसके
लिये
ऑनलाइन
फार्म
जमा
किये
जाने की
व्यवस्था
की गई
है।
छात्रावासी
शिष्यवृत्ति
मूल्य
सूचकांक
से
जुड़ी
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
द्वारा
अपने
शासकीय
निवास
पर
बुलाई
गई
अनुसूचित
जाति
पंचायत
में की
गई
घोषणा
के
अनुसार
विभागीय
छात्रावासों
में
अध्ययन
करने
वाले
विद्यार्थियों
की
शिष्यवृत्ति
में
वृद्धि
की गई
है।
बालकों
को 500
रुपये
के
स्थान
पर 725
रुपये
एवं
बालिकाओं
को 525
रुपये
के
स्थान
पर 750
रुपये
की
शिष्यवृत्ति
प्रदान
की जा
रही है।
इस
शिष्यवृत्ति
से
प्रदेश
के 54 हजार
विद्यार्थी
लाभान्वित
हो रहे
हैं।
प्रदेश
में
पहली
बार
अनुसूचित
जाति
वर्ग के
विद्यार्थियों
को
मिलने
वाली
शिष्यवृत्ति
को
मूल्य
सूचकांक
से
जोड़ा
गया है।
अब
विद्यार्थियों
को
महंगाई
के
अनुरूप
शिष्यवृत्ति
की राशि
मिलेगी।
कन्या
साक्षरता
प्रोत्साहन
राशि
में
वृद्धि
अनुसूचित
वर्ग की
छात्राओं
को शाला
में
अधिक से
अधिक
प्रवेश
लेने
हेतु
प्रोत्साहित
करने के
उद्देश्य
से
कन्या
साक्षरता
प्रोत्साहन
योजना
संचालित
की जा
रही है।
कक्षा
छठवीं
में 500
रुपये,
कक्षा
नवीं
में 1000
रुपये
एवं
कक्षा 11
में
प्रवेश
लेने पर
3000 रुपये
की
प्रोत्साहन
राशि दी
जा रही
है। इस
योजना
में अभी
तक दो
लाख से
अधिक
छात्राओं
को
लाभान्वित
किया
गया है।
योजना
में
वर्ष 2011-12
के बजट
में 30
करोड़
रुपये
का
प्रावधान
किया
गया है।
प्राथमिक
स्तर की
कन्याओं
को
छात्रवृत्ति
देने के
लिये
वर्ष 2011-12
के बजट
में 20
करोड़ 37
लाख
रुपये
का
प्रावधान
किया
गया है।
पिछले
वर्ष
प्रदेश
में
लगभग 8
लाख 50
हजार
छात्राओं
को
लाभान्वित
किया
गया था।
विभागीय
छात्रावास-आश्रमों
में अब
बेहतर
सुविधाएँ
अनुसूचित
जाति
वर्ग के
भवनविहीन
छात्रावास-आश्रम
के भवन
निर्माण,
स्टॉफ
आवासगृह
एवं
बाउण्ड्री
वॉल
निर्माण
एवं
पूर्व
से
निर्मित
भवनों
के रख-रखाव
को
राज्य
सरकार
ने
विशेष
प्राथमिकता
दी है।
अनुसूचित
जातियों
के
विद्यार्थियों
के लिये
संचालित
386
छात्रावास-आश्रमों
में
मूलभूत
सुविधाओं
एवं
स्वच्छ
पर्यावरण
के लिये
इस वर्ष
के बजट
में 138
करोड़ 50
लाख
रुपये
का
प्रावधान
किया
गया है।
इसके
अलावा
इस वर्ष 8
नवीन
पोस्ट-मैट्रिक
छात्रावासों
की
स्थापना,
जिला
अशोकनगर
में
पूर्व
से
संचालित
एक
कन्या
एवं
बालक
छात्रावास
को जिला
स्तर के
उत्कृष्ट
छात्रावास
में
परिवर्तित
करने,
विकासखण्ड
स्तरीय 10
प्री-मैट्रिक
छात्रावासों
के
उन्नयन, 10
प्री-मेट्रिक
कन्या
छात्रावासों
की
स्थापना
एवं
इंदौर
जिला
मुख्यालय
पर 500
सीटर
पोस्ट-मैट्रिक
कन्या
छात्रावास
की
स्थापना
एवं भवन
निर्माण
करने का
लक्ष्य
तय किया
गया है।
इन
कार्यों
के लिये
भी इस
वर्ष के
बजट में
पर्याप्त
राशि का
प्रावधान
किया
गया है।
छात्रावासों
की सीट
संख्या
में
वृद्धि
|
मध्यप्रदेश
देश का
पहला
राज्य
होगा
जहाँ
सिंगरौली
में
विशेष
न्यायालय
की
स्थापना
के साथ
सभी
जिलों
में
अनुसूचित
जाति
एवं
जनजाति
समुदाय
के
विरूद्ध
ज्यादती
के
प्रकरणों
की
सुनवाई
और
दोषियों
को
दण्डित
करने
के
लिये
विशेष
न्यायालय
स्थापित
हो
जायेंगे।
केन्द्र
सरकार
ने
मध्यप्रदेश
की इस
पहल की
विशेष
रूप से
सराहना
की है। |
प्रदेश
में
संचालित
छात्रावासों
में
पिछले
वर्ष एक
हजार
सीट की
वृद्धि
की गई
थी। यह
सीट
वृद्धि 22
जिलों
के 36
छात्रावासों
में की
गई। इस
वर्ष भी
छात्रावासों
में 1001
सीट की
वृद्धि
की गयी
है।
जिन्हें
इस
शैक्षणिक
सत्र
जुलाई
में भरा
गया है।
आवासीय
विद्यालयों
का
संचालन
सात
संभागीय
मुख्यालयों
पर
अनुसूचित
जाति के
प्रतिभाशाली
छात्र-छात्राओं
के लिये
आवासीय
विद्यालय
संचालित
किये जा
रहे
हैं।
पिछले
वर्ष इन
आवासीय
विद्यालयों
की 10वीं
एवं 12वीं
बोर्ड
परीक्षा
का
वार्षिक
परीक्षाफल
95
प्रतिशत
रहा है।
इस वर्ष
शहडोल,
होशंगाबाद
तथा
मुरैना
संभागीय
मुख्यालयों
में भी
आवासीय
विद्यालयों
की
स्थापना
की जा
रही है।
पब्लिक
स्कूलों
में
शिक्षण
सुविधा
अनुसूचित
जाति
वर्ग के
विद्यार्थी
पब्लिक
स्कूलों
में
शिक्षा
प्राप्त
कर सकें
इसके
लिये
डेली
कॉलेज
इंदौर,
देहली
पब्लिक
स्कूल
इंदौर
एवं
भोपाल
तथा
सिंधिया
पब्लिक
स्कूल
ग्वालियर
में
अध्ययन
करने
वाले
अनुसूचित
जाति के
छात्र-छात्राओं
को
शिक्षण
शुल्क
की
प्रतिपूर्ति
की जा
रही है।
पिछले
वर्ष
बजट में
साढ़े
तीन
करोड़
रुपये
का
प्रावधान
कर 228
विद्यार्थियों
को
लाभान्वित
किया
गया।
अनुसूचित
जाति
वर्ग के
शिक्षित
युवा
विभिन्न
प्रतियोगी
परीक्षाओं
में सफल
हो सकें
इसके
लिये
भोपाल,
इंदौर,
जबलपुर,
रीवा,
सागर,
ग्वालियर
तथा
मुरैना
संभागीय
मुख्यालय
में
परीक्षा
पूर्व
प्रशिक्षण
केन्द्र
पुन:
प्रारंभ
किये
गये
हैं।
योजना
में इस
वर्ष
बजट में
एक
करोड़
रुपये
का
प्रावधान
किया
गया है।
बस्तियों
में
अधोसंरचना
विकास
प्रदेश
की
अनुसूचित
जाति
बहुल
बस्तियों
में
अधोसंरचना
के
विकास
के लिये
पिछले
वर्ष
लगभग 34
करोड़
रुपये
की राशि
खर्च की
गई। इस
वर्ष
लगभग 36
करोड़
रुपये
की राशि
खर्च की
जायेगी।
इस राशि
से
आंतरिक
बस्तियों
में
सड़क
निर्माण
को
विशेष
प्राथमिकता
दी जा
रही है।
अनुसूचित
जाति
बस्तियों
में
विद्युतीकरण
की
व्यवस्था
को
सुनिश्चित
करने के
लिये
पिछले
वर्षों
में
विशेष
प्रयास
किये
गये
हैं।
पिछले
वर्ष 11
करोड़ 8
लाख
रुपये
खर्च
किये
गये। इस
वर्ष 11
करोड़ 77
लाख
रुपये
की राशि
खर्च कर
बस्तियों
में
बिजली
पहुँचाने
का
कार्य
किया
जायेगा।
युवाओं
को स्व-रोजगार
अनुसूचित
जाति
वर्ग के
युवाओं
को
आर्थिक
रूप से
आत्म-निर्भर
बनाने
के
उद्देश्य
से
विभिन्न
स्व-रोजगार
योजनाएँ
चलाई जा
रही
हैं।
अनुसूचित
जाति
वित्त
विकास
निगम
द्वारा
संचालित
इन स्व-रोजगार
योजनाओं
में
अनुदान
एवं
मार्जिन
मनी
स्वीकृत
करने के
लिये इस
वर्ष
साढ़े
तेरह
करोड़
रुपये
का
प्रावधान
किया
गया है।
अत्याचार
निवारण
की दिशा
में
विशेष
पहल
मध्यप्रदेश
देश का
पहला
राज्य
होगा
जहाँ
सिंगरौली
में
विशेष
न्यायालय
की
स्थापना
के साथ
सभी
जिलों
में
अनुसूचित
जाति
एवं
जनजाति
समुदाय
के
विरूद्ध
ज्यादती
के
प्रकरणों
की
सुनवाई
और
दोषियों
को
दण्डित
करने के
लिये
विशेष
न्यायालय
स्थापित
हो
जायेंगे।
केन्द्र
सरकार
ने
मध्यप्रदेश
की इस
पहल की
विशेष
रूप से
सराहना
की है।
प्रदेश
में
राज्य
स्तरीय
अनुसूचित
जाति
एवं
जनजाति
अत्याचार
निवारण
अधिनियम
के
अंतर्गत
गठित
जिला
स्तरीय
सदस्यता
एवं
निगरानी
समिति
की
बैठकें
भी
नियमित
रूप से
आयोजित
की जा
रही है।
अनुसूचित
जाति
एवं
जनजाति
परिवारों
के
विरूद्ध
अत्याचार
एवं
अपराध
के
मामलों
में
दोषियों
को सजा
दिलवाने
की
कानूनी
प्रक्रिया
को समय-सीमा
में
पूरा
करने और
लंबित
प्रकरणों
के
निराकरण
में भी
तेजी
लायी
गयी है।
पिछले
चार
वर्षों
में
अनुसूचित
वर्गों
के
विरूद्ध
हुए
अपराध
में कमी
आयी है।
अत्याचार
निवारण
के
प्रकरणों
में
तेजी
लाने के
लिये
लोक
अभियोजकों
के
कार्यों
की
लगातार
समीक्षा
की जा
रही है।
अपराधों
के
अन्वेषण
के लिये 45
जिलों
में
पुलिस
अधीक्षक
नियुक्त
किये
गये
हैं।
जिला
स्तरीय
सतर्कता
एवं
मानीटरिंग
समिति
की
प्रत्येक
वर्ष 4
बैठकें
आयोजित
करना
अनिवार्य
किया
गया है।
ज्यादती
के
प्रकरणों
में
जाँच की
प्रक्रिया
में
तेजी
लाने के
लिये
दतिया,
राजगढ़,
नरसिंहपुर,
छतरपुर,
टीकमगढ़,
सीधी,
उमरिया,
शहडोल,
सतना,
मुरैना
और
बालाघाट
में
अन्वेषण
अधिकारियों
की
पदस्थापना
की
प्रक्रिया
चल रही
है।
अनुसूचित
जाति
वर्ग के
लोगों
में
सामाजिक
समरसता
एवं
अत्याचार
निवारण
की
दृष्टि
से
प्रदेश
के 50
जिलों
में
अनुसूचित
जाति
कल्याण
थानों
की
स्थापना
की गई
है।
विमुक्त
जातियों
का
सर्वांगीण
विकास
प्रदेश
में
विमुक्त
जातियों
के
सर्वांगीण
विकास
के लिये
राज्य
सरकार
प्रतिबद्ध
है।
प्रदेश
की
विमुक्त,
घुमक्कड़
एवं
अर्द्ध-घुमक्कड़
जातियों
के
सामाजिक
एवं
आर्थिक
स्तर को
सुधारने
के लिये
प्रदेश
में
पहली
बार
विमुक्त
जाति
विकास
अधिकरण
स्थापित
किया
गया है।
इसी
दिशा
में एक
कदम और
आगे
बढ़ाते
हुए इन
वर्गों
के
विकास
के लिये
प्रदेश
में
पहली
बार
पृथक
विमुक्त
जाति
विभाग
का गठन
किया
गया है।
इन
वर्गों
के
रोजगारोन्मुखी
कार्यक्रम
एवं
शिक्षण
कार्यों
के लिये
इस वर्ष
बजट में 5
करोड़ 36
लाख
रुपये
का
प्रावधान
किया
गया है।
|