-
पायी
विकास
की ओर
तेजी
से
अग्रसर
राज्य
की छवि,
खोया 'बीमारू'
का
कलंक।
-
पायी
10
प्रतिशत
की
विकास
दर और
खोई 2002-03
की (-) 3.91
दर।
-
पिछले
तीन
सालों
में
मध्यप्रदेश
की
विकास
दर
राष्ट्रीय
औसत से
अधिक।
-
पायी
लाड़ली
लक्ष्मी,
मुख्यमंत्री
कन्यादान
आदि
योजनाएँ,
खोयी
सदियों
पुरानी
बेटियों
को बोझ
समझने
की
प्रवृत्ति।
-
पाया
औद्योगिक
निवेश
में
देश
में
छठा
स्थान,
ग्लोबल
इन्वेस्टर्स
समिट
के
माध्यम
से देश-विदेश
के
उद्योगपतियों
की
मध्यप्रदेश
में
निवेश
की
उत्सुकता,
खोई
निवेशकों
की
बेरुखी।
-
पायीं
मुख्यमंत्री
निवास
पर
महिला,
किसान,
आदिवासी,
कोटवार,
शिल्पी,
हम्माल,
तुलावटी,
कम्पाउण्डर
आदि की 16
पंचायतों
में
चर्चा
से
उपजी
नयी
ठोस
योजनाएँ।
खोया
एयरकंडीशंड
कमरों
में
बैठकर
योजनाएँ
बनाने
का
पुराना
रवैया।
-
पायी
27.81
प्रतिशत
वृद्धि
के साथ
22,460
रुपये
प्रति
व्यक्ति
वार्षिक
आय।
खोई 17,572
रुपये
(2007-08)
प्रति
व्यक्ति
आय।
-
खोया
सकल ऋण
का
जीएसडीपी
का
अधिक
प्रतिशत।
प्राप्त
की 31.65 से
27.32
प्रतिशत
तक की।
-
खोया
राजस्व
प्राप्ति
की 18.69
प्रतिशत
राशि
ब्याज
रूप
में
भुगतान।
पायी
मात्र 9.24
प्रतिशत
की
कमी।
-
खोया
राजस्व
आधिक्य
(-) 11.69
करोड़
रुपये
(2002-03)।
पाया 3,867
करोड़
रुपये
का
आधिक्य।
-
राजस्व
प्राप्ति
15 हजार 863
करोड़ 50
लाख से
बढ़कर
पहुँची
57 हजार 789
करोड़
रुपये।
-
कर्मचारियों
ने खोई
सरकार
से
अपने
हक न
मिलने
की
आशा।
पाया
लगातार
मंहगाई
भत्ता
और
अन्य
सुविधाएँ।
-
पायी
बजट
प्रावधान
में
सैकड़ों
प्रतिशत
की
वृद्धि।
-
खोयी
दस साल
तक
गरीबी
रेखा
के
नीचे
बढ़ते
लोगों
की
संख्या।
पायी 14वीं
से 12
रैंक।
-
खोई
खराब
सड़कों
वाले
राज्य
की
छवि।
पाया 65
हजार
किलोमीटर
से
अधिक
सड़कों
का
निर्माण
और
सुधार
तथा
बजट
में 316.42
प्रतिशत
की
वृद्धि।
-
पीपीपी
के तहत 10
हजार
किलोमीटर
सड़कें
बनाकर
पायी
राष्ट्रीय
स्तर
पर
सराहना
और खोई
उद्योगपतियों
की
खराब
सड़कों
के
कारण
मध्यप्रदेश
में
निवेश
न करने
की
बेरुखी।
-
पायी
विद्युत
उत्पादन
में 3,161
मेगावॉट
की
वृद्धि,
फीडर
विभक्तिकरण
का
महत्वाकांक्षी
कार्य,
वर्ष 2013
तक
होगी
इतिहास
घरेलू
बिजली
कटौती।
-
किसानों
ने पाई
स्वयं
का
ट्रांसफार्मर
लगाने
की
योजना
और
खोया
बिजली
की कमी
से
होने
वाला
घाटा।
-
निजी
पूँजी
निवेश
के तहत
2838 करोड़
रुपये
की
परियोजनाएँ
पूरी।
रुपये 4210
करोड़
की
प्रगति
पर और 4003
करोड़
रुपये
की
परियोजनाएँ
प्रारंभ
होने
की
कतार
में।
-
पायी
500 से कम
आबादी
वाले
गाँवों
को
मुख्य
सड़क
से
जोड़ने
के लिए
मुख्यमंत्री
सड़क
परियोजना।
-
खोया
कृषि
के
प्रति
दुर्लक्ष्य।
वर्ष 1993
से 2003 के
दशक
में
मात्र 2.3
लाख
हेक्टेयर
सिंचाई
क्षमता
निर्मित
की गई।
पायी
कृषि
को
प्राथमिकता।
बीते 8
वर्षों
में आठ
लाख
हेक्टेयर
में
सिंचाई
क्षमता
निर्मित
हुई।
-
सिंचाई
बजट
में 284.07
प्रतिशत
की
वृद्धि।
वर्ष 2003-04
का बजट
प्रावधान
123 करोड़
22 लाख से
बढ़कर 3
हजार 190
करोड़ 72
लाख
रुपये
हुआ।
-
कृषि
उत्पादन
दर में
तीन
गुना
वृद्धि।
बजट
प्रावधान
364
प्रतिशत
बढ़कर
2,58,153
करोड़
रुपये
हुआ।
खोई
कृषि
की
निगेटिव
ग्रोथ।
-
50
लाख
मीट्रिक
टन का
रिकार्ड
गेहूँ
उपार्जन।
रुपये 100
प्रति
क्विंटल
की दर
से
किसानों
को
बोनस
मिला।
अकेले
वर्ष 2011
में ही
किसानों
के
खातों
में
सीधे
जमा
हुए एक
हजार
करोड़
रुपये।
-
किसानों
ने
पाया
एक
प्रतिशत
ब्याज
दर पर
ऋण।
खोया
पहले
का 16
प्रतिशत
दर का
बोझ।
-
अफलन,
फसल
नुकसान
भरपाई
के लिए
सहायता
राशि
में
वृद्धि।
-
नगरीय
निकायों
में
कार्यरत
सफाई
कामगारों
के
कल्याण
के लिए
वर्ष 2008
में
मध्यप्रदेश
सफाई
कामगार
आयोग
का
गठन।
-
भोपाल,
इंदौर,
जबलपुर
और
ग्वालियर
में 'रामरोटी'
योजना
लागू।
योजना
में
रैन-बसेरों
में
रात्रि
विश्राम
करने
वालों
को 5
रुपये
में
भोजन।
-
शहरों
में
निर्मित
होने
वाली
सभी
शासकीय
आवासीय
कॉलोनियों
में
आर्थिक
रूप से
कमजोर
लोगों
के लिए 15
प्रतिशत
विकसित
भू-खण्ड
आरक्षण,
अल्प
आय
वर्ग
के लिए 10
प्रतिशत
और भू-खण्ड
आरक्षण।
-
एक
हजार
करोड़
रुपये
के
निवेश
से
शहरी
क्षेत्रों
में
पेयजल
तथा
ठोस
अपशिष्ट
प्रबंधन
की
पीपीपी
पद्धति
से
व्यवस्था
होगी।
-
सभी
नगरों
के
सुनियोजित
विकास
के लिए 110
शहरों
के
सिटी
डेव्हलपमेंट
प्लान
तैयार।
-
विभिन्न
योजनाओं
का लाभ
लोगों
को
उनके
द्वार
तक
पहुँचाने
के लिए
प्रत्येक
जिले
में
खण्ड-स्तरीय,
नगर
निगम/नगर
पालिका
अंत्योदय
मेलों
का
आयोजन।
अब तक 8
लाख से
अधिक
हितग्राही
लाभान्वित।
-
मोबाइल
बैंकिंग
व्यवस्था
से
मनरेगा
मजदूरों
को
करीब 134
करोड़
रुपये
का
भुगतान।
मजदूरी
मिलना
हुआ
आसान।
-
अजा,
अजजा
विद्यार्थियों
की
छात्रवृत्तियों,
शिष्यवृत्तियों
में
वृद्धि
के साथ
ही
मंहगाई
सूचकांक
से
जोड़ा
गया।
-
जननी
सुरक्षा
योजना
के
उत्कृष्ट
क्रियान्वयन
से
अस्पतालों
में
प्रसव
प्रतिशत
25 से
बढ़कर 81
हुआ।
-
शिशु
मृत्यु
दर 79
प्रति
हजार
से
घटकर 67
प्रति
हजार
हुई।
मध्यप्रदेश
उन
पाँच
राज्यों
में
शामिल
हुआ
जहाँ
शिशु
मृत्यु
दर
सबसे
अधिक
घटी।
-
कुपोषण
उन्मूलन
के लिए
अटल
आरोग्य
मिशन
आरंभ।
वर्ष 2003-04
में 6,25,000
बच्चे
स्कूल
नहीं
जाते
थे अब
यह
संख्या
घटकर 57
हजार
रह गई
है।
-
विश्व
स्तर
की
उत्कृष्ट
प्रबंधन
परामर्श
कंपनी
किन्से
एण्ड
कम्पनी
ने
विश्व
की
चुनी
हुई 20
शालेय
शिक्षा
व्यवस्थाओं
में
मध्यप्रदेश
को
शामिल
किया।
-
सात
सालों
में
दूरस्थ
अँचलों
में 32
शासकीय
महाविद्यालय
खुले।
दूसरे
देशों
के
श्रेष्ठ
महाविद्यालयों
की
शाखाएँ
खुल
रही
हैं।
-
तकनीकी
शिक्षा
में
दूसरे
राज्यों
के
विद्यार्थी
भी
पढ़ने
आ रहे
हैं।
उदाहरण
स्वरूप
सिविल
इंजीनियरिंग
के 65
हजार
विद्यार्थियों
में
लगभग 20
हजार
दूसरे
राज्यों
से
हैं।
-
सबसे
पहले
मध्यप्रदेश
ने
पंचायत
राज
संस्थाओं
और
नगरीय
निकायों
में 50
प्रतिशत
आरक्षण
दिया।
इसके
अलावा 30
प्रतिशत
शासकीय
सेवाओं
में, 50
प्रतिशत
शिक्षक
पद पर
और
पुलिस
में 10
प्रतिशत
आरक्षण
है।
-
ई-टेण्डरिंग,
ठेकेदारों
के
सिंगल
इलेक्ट्रॉनिक
रजिस्ट्रेशन,
इलेक्ट्रॉनिक
भुगतान,
साइबर
ट्रेजरी
आदि
अनेक
सुविधाओं
का लाभ
आम
लोगों
को मिल
रहा
है।
-
भ्रष्टाचार
रोकने,
समय-सीमा
में
काम
करवाने
के लिए
मध्यप्रदेश
लोक
सेवा
प्रदाय
गारंटी
कानून
लागू।
अभी तक 15
विभागों
की 52
सेवाएँ
कानून
के
दायरे
में
शामिल।
-
खोई
शासकीय
भर्तियों
में
अनियमितता।
पाई
पारदर्शिता।