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न्यूज क्लिपिंग्स



आलेख

मुख्यमंत्री श्री चौहान के छह वर्ष-12 दिसम्बर पर विशेष

क्या खोया क्या पाया

भोपाल : रविवार, 10 दिसम्बर, 2011


सुनीता दुबे

  • पायी विकास की ओर तेजी से अग्रसर राज्य की छवि, खोया 'बीमारू' का कलंक।

  • पायी 10 प्रतिशत की विकास दर और खोई 2002-03 की (-) 3.91 दर।

  • पिछले तीन सालों में मध्यप्रदेश की विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक।

  • पायी लाड़ली लक्ष्मी, मुख्यमंत्री कन्यादान आदि योजनाएँ, खोयी सदियों पुरानी बेटियों को बोझ समझने की प्रवृत्ति।

  • पाया औद्योगिक निवेश में देश में छठा स्थान, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से देश-विदेश के उद्योगपतियों की मध्यप्रदेश में निवेश की उत्सुकता, खोई निवेशकों की बेरुखी।

  • पायीं मुख्यमंत्री निवास पर महिला, किसान, आदिवासी, कोटवार, शिल्पी, हम्माल, तुलावटी, कम्पाउण्डर आदि की 16 पंचायतों में चर्चा से उपजी नयी ठोस योजनाएँ। खोया एयरकंडीशंड कमरों में बैठकर योजनाएँ बनाने का पुराना रवैया।

  • पायी 27.81 प्रतिशत वृद्धि के साथ 22,460 रुपये प्रति व्यक्ति वार्षिक आय। खोई 17,572 रुपये (2007-08) प्रति व्यक्ति आय।

  • खोया सकल ऋण का जीएसडीपी का अधिक प्रतिशत। प्राप्त की 31.65 से 27.32 प्रतिशत तक की।

  • खोया राजस्व प्राप्ति की 18.69 प्रतिशत राशि ब्याज रूप में भुगतान। पायी मात्र 9.24 प्रतिशत की कमी।

  • खोया राजस्व आधिक्य (-) 11.69 करोड़ रुपये (2002-03)। पाया 3,867 करोड़ रुपये का आधिक्य।

  • राजस्व प्राप्ति 15 हजार 863 करोड़ 50 लाख से बढ़कर पहुँची 57 हजार 789 करोड़ रुपये।

  • कर्मचारियों ने खोई सरकार से अपने हक न मिलने की आशा। पाया लगातार मंहगाई भत्ता और अन्य सुविधाएँ।

  • पायी बजट प्रावधान में सैकड़ों प्रतिशत की वृद्धि।

  • खोयी दस साल तक गरीबी रेखा के नीचे बढ़ते लोगों की संख्या। पायी 14वीं से 12 रैंक।

  • खोई खराब सड़कों वाले राज्य की छवि। पाया 65 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण और सुधार तथा बजट में 316.42 प्रतिशत की वृद्धि।

  • पीपीपी के तहत 10 हजार किलोमीटर सड़कें बनाकर पायी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और खोई उद्योगपतियों की खराब सड़कों के कारण मध्यप्रदेश में निवेश न करने की बेरुखी।

  • पायी विद्युत उत्पादन में 3,161 मेगावॉट की वृद्धि, फीडर विभक्तिकरण का महत्वाकांक्षी कार्य, वर्ष 2013 तक होगी इतिहास घरेलू बिजली कटौती।

  • किसानों ने पाई स्वयं का ट्रांसफार्मर लगाने की योजना और खोया बिजली की कमी से होने वाला घाटा।

  • निजी पूँजी निवेश के तहत 2838 करोड़ रुपये की परियोजनाएँ पूरी। रुपये 4210 करोड़ की प्रगति पर और 4003 करोड़ रुपये की परियोजनाएँ प्रारंभ होने की कतार में।

  • पायी 500 से कम आबादी वाले गाँवों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री सड़क परियोजना।

  • खोया कृषि के प्रति दुर्लक्ष्य। वर्ष 1993 से 2003 के दशक में मात्र 2.3 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता निर्मित की गई। पायी कृषि को प्राथमिकता। बीते 8 वर्षों में आठ लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता निर्मित हुई।

  • सिंचाई बजट में 284.07 प्रतिशत की वृद्धि। वर्ष 2003-04 का बजट प्रावधान 123 करोड़ 22 लाख से बढ़कर 3 हजार 190 करोड़ 72 लाख रुपये हुआ।

  • कृषि उत्पादन दर में तीन गुना वृद्धि। बजट प्रावधान 364 प्रतिशत बढ़कर 2,58,153 करोड़ रुपये हुआ। खोई कृषि की निगेटिव ग्रोथ।

  • 50 लाख मीट्रिक टन का रिकार्ड गेहूँ उपार्जन। रुपये 100 प्रति क्विंटल की दर से किसानों को बोनस मिला। अकेले वर्ष 2011 में ही किसानों के खातों में सीधे जमा हुए एक हजार करोड़ रुपये।

  • किसानों ने पाया एक प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण। खोया पहले का 16 प्रतिशत दर का बोझ।

  • अफलन, फसल नुकसान भरपाई के लिए सहायता राशि में वृद्धि।

  • नगरीय निकायों में कार्यरत सफाई कामगारों के कल्याण के लिए वर्ष 2008 में मध्यप्रदेश सफाई कामगार आयोग का गठन।

  • भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में 'रामरोटी' योजना लागू। योजना में रैन-बसेरों में रात्रि विश्राम करने वालों को 5 रुपये में भोजन।

  • शहरों में निर्मित होने वाली सभी शासकीय आवासीय कॉलोनियों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 15 प्रतिशत विकसित भू-खण्ड आरक्षण, अल्प आय वर्ग के लिए 10 प्रतिशत और भू-खण्ड आरक्षण।

  • एक हजार करोड़ रुपये के निवेश से शहरी क्षेत्रों में पेयजल तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पीपीपी पद्धति से व्यवस्था होगी।

  • सभी नगरों के सुनियोजित विकास के लिए 110 शहरों के सिटी डेव्हलपमेंट प्लान तैयार।

  • विभिन्न योजनाओं का लाभ लोगों को उनके द्वार तक पहुँचाने के लिए प्रत्येक जिले में खण्ड-स्तरीय, नगर निगम/नगर पालिका अंत्योदय मेलों का आयोजन। अब तक 8 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित।

  • मोबाइल बैंकिंग व्यवस्था से मनरेगा मजदूरों को करीब 134 करोड़ रुपये का भुगतान। मजदूरी मिलना हुआ आसान।

  • अजा, अजजा विद्यार्थियों की छात्रवृत्तियों, शिष्यवृत्तियों में वृद्धि के साथ ही मंहगाई सूचकांक से जोड़ा गया।

  • जननी सुरक्षा योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन से अस्पतालों में प्रसव प्रतिशत 25 से बढ़कर 81 हुआ।

  • शिशु मृत्यु दर 79 प्रति हजार से घटकर 67 प्रति हजार हुई। मध्यप्रदेश उन पाँच राज्यों में शामिल हुआ जहाँ शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक घटी।

  • कुपोषण उन्मूलन के लिए अटल आरोग्य मिशन आरंभ। वर्ष 2003-04 में 6,25,000 बच्चे स्कूल नहीं जाते थे अब यह संख्या घटकर 57 हजार रह गई है।

  • विश्व स्तर की उत्कृष्ट प्रबंधन परामर्श कंपनी किन्से एण्ड कम्पनी ने विश्व की चुनी हुई 20 शालेय शिक्षा व्यवस्थाओं में मध्यप्रदेश को शामिल किया।

  • सात सालों में दूरस्थ अँचलों में 32 शासकीय महाविद्यालय खुले। दूसरे देशों के श्रेष्ठ महाविद्यालयों की शाखाएँ खुल रही हैं।

  • तकनीकी शिक्षा में दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी पढ़ने आ रहे हैं। उदाहरण स्वरूप सिविल इंजीनियरिंग के 65 हजार विद्यार्थियों में लगभग 20 हजार दूसरे राज्यों से हैं।

  • सबसे पहले मध्यप्रदेश ने पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। इसके अलावा 30 प्रतिशत शासकीय सेवाओं में, 50 प्रतिशत शिक्षक पद पर और पुलिस में 10 प्रतिशत आरक्षण है।

  • ई-टेण्डरिंग, ठेकेदारों के सिंगल इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन, इलेक्ट्रॉनिक भुगतान, साइबर ट्रेजरी आदि अनेक सुविधाओं का लाभ आम लोगों को मिल रहा है।

  • भ्रष्टाचार रोकने, समय-सीमा में काम करवाने के लिए मध्यप्रदेश लोक सेवा प्रदाय गारंटी कानून लागू। अभी तक 15 विभागों की 52 सेवाएँ कानून के दायरे में शामिल।

  • खोई शासकीय भर्तियों में अनियमितता। पाई पारदर्शिता।

 


 

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