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आलेख

सुशासन के नवाचारों से व्यवस्था में लोगों का विश्वास बढ़ा

सूचना प्रौद्योगिकी का श्रेष्ठतम उपयोग

भोपाल : बुधवार, 10 अगस्त, 2011


दिनेश मालवीय

विकास से जुड़े दस्तावेजों में और विशेषज्ञों की जुबान पर आजकल "सुशासन"अर्थात गुड गवर्नेन्स शब्द खूब चढ़ा है। विद्वान इसकी परिभाषा मुख्तलिफ तरह से करते हैं, लेकिन इन सबका लब्बोलुआव यह है कि लोगों के पास अधिकार हों, सभी को इंसाफ मिलें और सरकार जो सेवाएँ मुहैया करवाती है, वे आम लोगों को आसानी से मिलें। फैसले लेने और उन्हें आमली जामा पहनाने में लोगों की भागीदारी भी इसमें निहित है। नेतृत्व और प्रशासन की जवाबदेही और सुविचारित योजना-निर्माण भी सुशासन का ही हिस्सा है।

ब्रिटिश राज से विरासत में मिली प्रशासन व्यवस्था, आजाद भारत में ऊपरी रूप से भले ही बदल गयी हो, बुनियादी रूप से इसमें औपनिवेशिक मानसिकता दुबककर ही सही, लेकिन बैठी रही। इसी वजह से सरकारी नौकर, जिन्हें अधिक सम्मानजनक रूप से शासकीय या जनसेवक कहा जाने लगा है, खुद को आम जनता से ऊपर ही नहीं बल्कि कुछ हद तक उसका माई-बाप भी मानता दिखाई देता है। इसके चलते, आम लोगों में भी इतनी जागरूकता नहीं आयी कि वह सरकारी दफ्तरों में जाकर सेवा प्राप्त करने का अपना अधिकार प्रबलता से जता सके। यद्यपि प्रशासन में अनेक लोगों का रवैया सकारात्मक भी होता है और वे जनता को अच्छी सेवाएँ दे रहे हैं।

जम्मू-काश्मीर ले रहा म.प्र. की
सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएँ

 

मध्यप्रदेश ने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पूरे देश में एक अलग पहचान बनाई है। ई-गवर्नेंस में किये गये नवाचार को भारत सरकार ने न केवल पुरस्कृत किया है, बल्कि अन्य राज्य भी इसे अपना रहे हैं। जम्मू-काश्मीर सरकार भी लोक सेवा गारंटी संबंधी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही है। ई-टेंडरिंग के बाद अब राज्य ई-पेमेंट की ओर बढ़ रहा है

इस सूरते-हाल में तमाम किस्म की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार जैसी बुराइयाँ पनपती चली जाती हैं और आम आदमी हाशिये पर बना रहता है।

इन हालात को बदलने की बहुत कोशिश भी हुई और नये प्रयोग भी किये गये। इनमें से कुछ तो थोड़ी हद तक परवान चढ़े, लेकिन ज्यादातर जमी हुई प्रशासनिक काई पर फिसल कर औंधे मुँह गिर गये।

बहरहाल बीते छह-सात सालों में मध्यप्रदेश ने इस कहावत को सही साबित कर दिखाया है कि जहाँ चाह होती है वहाँ राह बन जाती है। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने अपने सात साल के शासन काल में सुशासन की दिशा में बेहतरीन प्रयोग किये, जिन्हें खासी कामयाबी भी मिली हैं। उनकी सबसे बड़ी चिन्ता यह रही कि आम आदमी की शिकायतें जल्दी से जल्दी और असरकारी तरीके से दूर हों, उन्हें शासकीय सुविधाओं का पूरा लाभ मिले और सरकार-प्रशासन के स्तर पर नीति-निर्माण और उनके क्रियान्वयन में आम जनता की सक्रिय भागीदारी हो।

समाधान ऑनलाइन, जन-दर्शन, कॉमन सर्विस सेन्टर, समाधान एक दिन में, ई-टेण्डरिंग, परख, आइडियाज फॉर सी.एम., मंथन, जन सुनवाई और एक ताज़ा प्रयोग लोक सेवा प्रदाय गारंटी कानून, इसी दिशा में उठाये गये कदम हैं।

इन सभी की विशेषता यह है कि इनमें सूचना प्रौद्योगिकी का श्रेष्ठतम उपयोग किया गया है।

सभी कमिश्नर, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी हर मंगलवार को "जन-सुनवाई" करते हैं। इससे बहुत बड़ी तादाद में जन-समस्याओं का निराकरण हुआ है। इसका एक दिलचस्प और सुखद तथ्य यह प्रकाश में आया है कि "जन-सुनवाई" व्यवस्था लागू होने के बाद मानव अधिकार आयोग में प्राप्त होने वाली शिकायतों में बहुत ज्यादा कमी आयी है। जब लोगों की शिकायतों का समाधान संबंधित अधिकारी द्वारा ही हो जाता है, तो वे मानव अधिकार आयोग भला क्यों जाये।

लोक सेवा प्रदाय गारंटी कानून तो इतना ज्यादा प्रभावी है कि प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह तक ने हाल ही में बीना रिफायनरी के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान से इसके संबंध में दरयाफ्त की। बिहार ने भी इसी तर्ज पर कानून लागू किया है और अन्य अनेक राज्य इसको लागू करने की मंशा रखते हैं। इसका कितना ज्यादा असर है, यह इसी बात से साबित हो जाता है कि बीते दस महीनों में 40 लाख से ज्यादा लोगों को इसके तहत सेवाएँ मिल चुकी हैं।

दुनियां में, कदाचित अपनी तरह का यह पहला कानून है, जिसमें तयशुदा समय-सीमा में सेवा नहीं देने वाले शासकीय सेवक को जुर्माना भरना पड़ता है। ढ़ाई सौ रुपये रोज से शुरू होकर जुर्माने की रकम पाँच हजार तक हो सकती है। जुर्माने की रकम संबंधित आवेदक को हर्जाने के रूप में दी जाती है। अपना रवैया न बदलने वाले कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही का भी इसमें प्रावधान है। इस कानून पर प्रभावी अमल और संबंधित योजनाओं के कुशल संचालन के लिए एक अलग लोक सेवा प्रबंधन विभाग बनाया गया है।

समाधान ऑनलाइन भी मुख्यमंत्री द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी के जनहित में किये गये प्रयोग की एक प्रभावी पहल है। हर माह पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री और उनके प्रवास पर रहने की स्थिति में मुख्य सचिव मंत्रालय स्थित कक्ष से सभी जिला कलेक्टरों से सीधी बात कर लंबित शिकायतों की दरयाफ्त करते हैं। इस व्यवस्था से अभी तक सवा आठ सौ से ज्यादा लोगों की शिकायतों का निराकरण हुआ है।

मुख्यमंत्री ने योजनाओं के क्रियान्वयन की ज़मीनी हकीकत जानने और लोगों से सीधी बात करने के लिए "जनदर्शन" के तहत पूरे प्रदेश में सघन दौरा किया। इस दौरान, अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों की जहाँ उन्होंने पीठ ठोंकी, वहीं लापरवाह कर्मचारियों को सज़ा दी। इस दौरान उन्हें आम लोगों से करीब 35 हजार आवेदन मिले, जिनमें से 32 हजार का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया। शेष आवेदनों में आगे की आवश्यक कार्यवाही की गयी।

मुख्यमंत्री द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी के जनहित में श्रेष्ठतम उपयोग पर जोर दिये जाने के फलस्वरूप प्रदेश के गाँव के समूहों में 6500 कॉमन सर्विस सेन्टर खोले गये हैं। प्रत्येक समूह में 5-6 गाँव होते हैं। इसके अलावा 1500 कॉमन सर्विस सेन्टर (mponline) शहरी क्षेत्रों में खोले गये हैं। यह सुविधा मिलने से अब सरकारी दफ्तर कम्प्यूटर पर एक क्लिक से आपके सामने हाजिर हो जाता है। इन केन्द्रों से लोगों को कृषि, शिक्षा,प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन-पत्र, समाचार, विभिन्न विषयों की उपयोगी जानकारी, रेलवे बुकिंग, ऑनलाइन काउंसलिंग सहित 130 से अधिक सेवाएँ नाम मात्र के शुल्क पर उपलब्ध करवाई जाती है। इनमें से 150 केन्द्रों पर कियोस्क बैंकिंग सुविधा उपलब्ध करवाई गयी है, जिससे ' मनरेगा' के तहत श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान किया जाता है। एक अन्य अभिवन पहल के अन्तर्गत लोगों को योजनाओं की जानकारी देने तथा शिकायतें दर्ज करवाने के लिए काल सेन्टर स्थापित किये गये हैं। इसके लिए टोल-फ्री नंबर भी दिया गया है। इन शिकायतों पर संबंधित विभाग कार्यवाही करते हैं। अभी तक लगभग साढ़े तीन लाख लोग इस सुविधा का लाभ ले चुके हैं।

ई-टेण्डरिंग एक अन्य अभिनव सुविधा है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की संभावनाएँ न्यूनतम हो गयी हैं। ई-पेमेन्ट व्यवस्था तथा साइबर ट्रेजरी प्रणाली भी लागू की गयी है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान का मानना है कि अच्छी सरकार के संबंध में आम लोगों के पास भी अच्छे विचार होते हैं। लोग इन विचारों से उन्हें अवगत करवा सकें, इसके लिए एक वेबसाइट www.ideaforcm.com शुरू की गयी है।

इसके अलावा गाँवों में उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति की मॉनीटरिंग के लिए " परख" व्यवस्था लागू की गयी है। इसके तहत प्रदेश के सभी 52 हजार गाँवों में इन सुविधाओं के विषय में जानकारी का ऑनलाइन संकलन किया जाता है। लोगों को जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र,राशन कार्ड आदि की सुविधाएँ आवेदन करने के दिन ही मिल सकें इसके लिए समाधान केन्द्र स्थापित किये गये हैं।

जन-सुनवाई

यह एक आम शिकायत रही है कि अपनी समस्याओं के संबंध में लोग बड़े अफसरों से नहीं मिल पाते। लोग अपनी तकलीफ बड़े अफसरों को सीधे बता सकें, इसके लिए प्रदेश में "जन-सुनवाई" व्यवस्था लागू की गयी है। इसके तहत हर मंगलवार को सभी दफ्तरों में जन-सुनवाई होती है। लोगों का पुलिस से सीधा काम पड़ता है। जन सुनवाई व्यवस्था 23 जून 2009 से शुरू की गयी। जन-सुनवाई में अकेले पुलिस विभाग में प्राप्त 90 हजार 941 शिकायतों में से 85 हजार 516 शिकायतों का निराकरण किया गया। इस प्रकार 95.90 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण किया गया है।

निर्णयों में जनभागीदारी

लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप मुख्यमंत्री ने शासन द्वारा लागू की गयी तथा लागू की जाने वाली योजनाओं में संबंधित वर्ग के लोगों की भागीदारी के लिए अपने शासकीय निवास पर "पंचायतें" आयोजित कीं। इन पंचायतों में प्रदेश भर से संबंधित वर्ग के लोग आकर मुख्यमंत्री से सीधा संवाद करते हैं। वे योजनाओं में संशोधन भी सुझाते हैं। इस संवाद में सामने आने वाले सुझावों का परीक्षण कर उन्हें योजना में शामिल किया जाता है। "लाड़ली लक्ष्मी" जैसी अद्भुत और लोकप्रिय योजना मुख्यमंत्री के साथ लोगों के सीधे संवाद की ही उपज है। अभी तक कुल सोलह पंचायतों का आयोजन हुआ है, जिनमें हुए संवाद के बाद अनेक योजनओं के स्वरूप में लोगों की अपेक्षानुसार संशोधन और बदलाव किये गये है।

इन सभी नवाचारों के चलते मध्यप्रदेश में सुशासन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिससे आम लोगों को काफी राहत मिली है और व्यवस्था में लोगों का विश्वास बढ़ा है। 


 

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