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आलेख

अभूतपूर्व तुषारापात

भोपाल : बुधवार, 09 फरवरी, 2011


सुनीता दुबे

नए साल का नया सप्ताह। मध्यप्रदेश के किसानों के लिये 'हैप्पी न्यू ईयर' के 'सैड न्यू ईयर' में रूपान्तरण की शुरूआत। पांच जनवरी को उमरिया, मलाजखण्ड में, 7 जनवरी को दतिया, रीवा में और 8 जनवरी को नौगाँव में शून्य डिग्री पर पहुंचे पारे ने किसानों की रबी फसलों को तबाह कर दिया। अरहर, चना, मटर, मसूर, गेहूँ, फल-सब्जी आदि की अपनी अच्छी फसलों से आशान्वित किसान की खुशियों, उम्मीदों पर तुषारापात हो चुका था। अधिकांश किसानों ने पाले का ऐसा तांडव पहली बार देखा था। राजधानी भोपाल में भी वर्ष 1944 के बाद पहली बार पांच जनवरी को पारा 2.30 पर पहुंच गया। लोगों ने पहली बार देखा ओस को बर्फ में तब्दील होते हुए।

जब भावुक हुये मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री चौहान 26 जनवरी को दमोह जिले के बर्धा गाँव पहुंचकर सीधे कृषक कल्ला अहिरवार के खेत पहुंचे और खेत में पाले से हुई बर्बादी देख भावुक हो गये। उन्होंने कल्ला अहिरवार को गले लगाकर सांत्वना दी और राहत राशि का चैक प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा आपकी फसल खराब हुई है, लेकिन हम आप लोगों का जीवन खराब नहीं होने देंगे। इस संकट की घड़ी में सरकार किसानों के साथ है। हर पीड़ित किसान को शासन की ओर से राहत राशि मिलेगी। किसानों को राहत देने के लिये राजस्व पुस्तक परिपत्र में व्यापक संशोधन किये गये हैं। उन्होंने शासकीय सेवकों को चेतावनी देते हुये कहा कि किसानों को राहत राशि देने में लापरवाही बरतने पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जायेगी।

किसानों से लेकर मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, शासन, प्रशासन सब जुट गए इस अचानक प्रकट हुए प्राकृतिक प्रकोप का सामना करने के लिये। प्रदेश में पाला पड़ने से 34 लाख किसानों की 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें बर्बाद हो गयीं। पाले ने प्रदेश के 50 जिलों में से 46 जिलों को चपेट में ले लिया।

किसानों के लिये हमेशा ही समर्पित मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्राकृतिक आपदा का सामना करने के लिये अपनी शक्ति झोंक दी। बिना यह जाने कि कड़ाकेदार सर्दी कब तक रहने वाली है। श्री चौहान ने छह जनवरी को राहत आयुक्त को फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर किसानों को नियमानुसार शीघ्र राहत राशि दिलवाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने गाँव-गाँव जाकर भ्रमण कर खुद क्षतिग्रस्त फसलों का जायजा लिया और किसानों को आश्वस्त किया कि इस संकट की घड़ी में सरकार किसानों के साथ है। श्री चौहान ने प्रदेश में पाला से हुए फसल नुकसान का उदारतापूर्वक विस्तृत सर्वेक्षण करवाने के निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने फसलों को हुए नुकसान और राहत राशि के प्रदाय की रोज समीक्षा करने, एक पटवारी के पास कम से कम दो हल्का की जिम्मेदारी रहने, प्रभावित किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने, फसलों के साथ ही फलों और सब्जियों को हुए नुकसान का भी आकलन कर नियमानुसार राहत राशि देने, कलेक्टरों से किसानों से स्वयं ही मांग पत्र लेने, गैर लायसेंसी साहूकारों पर कार्रवाई करने, संदिग्ध दायित्व निवारण अधिनियम के अंतर्गत किसानों को लाभ दिलाने, नकली खाद-बीज विक्रेताओं को दण्डित करने, फसल नुकसान आकलन और राहत राशि प्रदान कार्य राहत आयुक्त और कृषि विभाग के समन्वय से करने, प्रभावित किसानों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी सुनिश्चित करने, राहत राशि वितरण में राजस्व पुस्तक परिपत्र में हाल ही में किए गए संशोधन का ध्यान रखने आदि के किसानों के हित में अनेक निर्देश दिए।

पाले ने जिन जिलों की फसलों को अधिक नुकसान पहुंचाया उनमें रायसेन, भोपाल, शाजापुर, इंदौर, सीहोर, नरसिंहपुर, सतना, सीधी, अनूपपुर, मण्डला, पन्ना, उज्जैन, देवास, मंदसौर, सागर, सिवनी एवं छिन्दवाड़ा जिले शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 जनवरी को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से भेंट कर उन्हें अवगत कराया कि फौरी तौर राज्य शासन किसानों की फसल क्षति का आकलन करा कर राज्य स्तर पर राहत दे रहा है। परंतु यह नाकाफी है। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री से केन्द्रीय अध्ययन दल भेजकर क्षति आकलन कर सहायता देने का अनुरोध किया। श्री चौहान ने फसल बीमा योजना के तहत किसान और एक गांव को यूनिट मानकर बीमा का लाभ दिये जाने का भी आग्रह किया। पाले और तुषार के कुदरती कहर से पीड़ित किसानों को राहत दिलाने के लिये श्री चौहान ने 28 जनवरी को प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर 30 लाख 65 हजार पाला प्रभावित किसानों के लिये 1505 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की। पत्र द्वारा ही श्री चौहान ने केन्द्रीय गृह मंत्री श्री पी. चिदम्बरम और वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी से भी सहायता की मांग की। श्री चौहान ने 29 जनवरी को प्रधानमंत्री को पुन: पत्र लिखा और वाणिज्यिक एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से फसल ऋण लेने वाले किसानों के चालू वित्तीय वर्ष के बकाया ब्याज माफ करने तथा फसल ऋण का पुनर्निधारण करने के उक्त बैंकों को निर्देश देने का भी अनुरोध किया। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश के सहकारी बैंकों द्वारा प्रदेश के सहकारी बैंकों द्वारा किसानों को दिये जाने वाले फसल ऋण का पुनर्निधारण, वर्तमान वित्तीय वर्ष में फसल ऋण पर ब्याज माफ, पुनर्निधारित ऋणों पर मध्यकालिक ब्याज दरों के स्थान पर अल्पकालिक ब्याज लागू करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पुन: एक फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में केन्द्र सरकार से पाला पीड़ित किसानों के लिए 2442 करोड़ रूपये के पैकेज की मांग की। केन्द्र सरकार द्वारा इस मांग के विरूद्ध दो फरवरी को मात्र दो सौ करोड़ रूपये के पैकेज की स्वीकृति जारी की गई।

राज्य शासन द्वारा पाले से बचाव की समय-समय पर सलाह जारी करने के साथ ही पाला और फसल क्षति आंकलन के लिए 11 जनवरी को भोपाल में नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई। किसानों को अविलम्ब राहत राशि पहुँचाने के लिए तहसीलदारों को बैंक खाता संचालन के लिए अधिकृत किया गया। 25 प्रतिशत से अधिक फसल हानि पर भू-राजस्व वसूली माफ करने के लिए कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए। किसानों के शून्य बैलेन्स खाते खोल राहत राशि का वितरण करने के निर्देश दिए गए।

 


 

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